सेवा कल्याण के नाम, स्वयं से छल, आने वाली पीढ़ियों के साथ अन्याय
व्ही.एस.भुल्ले
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
फिलहाल गांव, गली लोकतंत्र के नाम जिस तरह से टाॅप टू वाॅटम ऊपर से लेकर निचले स्तर तक अघोषित रूप से माफियाराज स्थापित होता जा रहा है वह किसी भी सभ्य संस्कृति, संस्कार, सभ्यता के लिए घातक है व्यक्ति, परिवार, समाज ही नहीं इससे मिलकर बनने वाले उस राष्ट्र महान भूभाग के लिए भी अघोषित रूप से संग्राम है जो पथराई आंखों से अपनों के ही कारण बडी विभीसिका देख रहे है वह भी समृद्ध, खुशहाल जीवन की उम्मीद में।
मगर न तो किसी को इस भावी विभीसिका का दर्द है न ही शर्म, हजारों वर्षो की तपस्या को पलीता लगा जिस तरह से सेवा कल्याण के नाम स्वयं स्वार्थपूर्ति का नंगा नाच चल रहा है वह किसी से छिपा नहीं। बेहतर हो हम अपने लिए न सही कम से कम अपनी आने वाले पीढ़ी के लिए तो कुछ त्याग कर सकते है। अगर हम स्वयं के लिए न सही अपनो के लिए ही इतना भी नहीं कर पाये तो इससे बडी अक्षमता, असफलता मानव समाज एवं उस महान सभ्यता, संस्कृति, संस्कारों के लिए और कोई हो नहीं सकती।
जय स्वराज
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
फिलहाल गांव, गली लोकतंत्र के नाम जिस तरह से टाॅप टू वाॅटम ऊपर से लेकर निचले स्तर तक अघोषित रूप से माफियाराज स्थापित होता जा रहा है वह किसी भी सभ्य संस्कृति, संस्कार, सभ्यता के लिए घातक है व्यक्ति, परिवार, समाज ही नहीं इससे मिलकर बनने वाले उस राष्ट्र महान भूभाग के लिए भी अघोषित रूप से संग्राम है जो पथराई आंखों से अपनों के ही कारण बडी विभीसिका देख रहे है वह भी समृद्ध, खुशहाल जीवन की उम्मीद में।मगर न तो किसी को इस भावी विभीसिका का दर्द है न ही शर्म, हजारों वर्षो की तपस्या को पलीता लगा जिस तरह से सेवा कल्याण के नाम स्वयं स्वार्थपूर्ति का नंगा नाच चल रहा है वह किसी से छिपा नहीं। बेहतर हो हम अपने लिए न सही कम से कम अपनी आने वाले पीढ़ी के लिए तो कुछ त्याग कर सकते है। अगर हम स्वयं के लिए न सही अपनो के लिए ही इतना भी नहीं कर पाये तो इससे बडी अक्षमता, असफलता मानव समाज एवं उस महान सभ्यता, संस्कृति, संस्कारों के लिए और कोई हो नहीं सकती।
जय स्वराज
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