ये भी मर जाये तो राशन नहीं मिलेगा सर्वे चल रहा है वर्तमान व्यवस्था का व्यवहारिक सत्य
व्ही.एस.भुल्ले
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
मौजूद व्यवस्था में अगर किसी को यह मुगालता है कि बैवस मजबूर अभाव ग्रस्त लोगों को मातहतांे की दया, दान या पुरूस्कार स्वरूप भले ही सस्ते राशन के रूप में मिल जाये तो असंभव भी है। मगर आज का सबसे बडा सत्य व्यवस्था का यह कुरूप चेहरा उस कत्र्तव्य विमुख व्यवस्था है जिसके निष्ठापूर्ण निर्वहन का बखान व्यवस्थागत लोग करते नहीं थकते।
मामला म.प्र. का है हुआ कुछ यूं कि जनसुनवाई में एक बैवस गरीब महिला के मिलने वाले बन्द हो चुके सस्ते राशन को प्राप्त करने का था सो आवेदन पश्चात दुर्भाग्य बस आवेदिका का पति चल बसा, जब उक्त जानकारी सम्बन्धित अधिकारी को दी गई इस पर उसका सपाट सा जबाव था कि अगर वह भी मर जाये तो भी राशन नहीं मिलेगा। क्योंकि फिलहाल सर्वे चल रहा है। अब इस बेरहम व्यवस्था को कौन समझायें कि सस्ते राशन के इन्तजार में आवेदक तो हक होने के बावजूद मर गया कम से कम शेष मौजूद उसके परिवारजनों के प्रति तो सहानुभूति होना चाहिए न कि तिरस्कार का भाव।
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
मौजूद व्यवस्था में अगर किसी को यह मुगालता है कि बैवस मजबूर अभाव ग्रस्त लोगों को मातहतांे की दया, दान या पुरूस्कार स्वरूप भले ही सस्ते राशन के रूप में मिल जाये तो असंभव भी है। मगर आज का सबसे बडा सत्य व्यवस्था का यह कुरूप चेहरा उस कत्र्तव्य विमुख व्यवस्था है जिसके निष्ठापूर्ण निर्वहन का बखान व्यवस्थागत लोग करते नहीं थकते। मामला म.प्र. का है हुआ कुछ यूं कि जनसुनवाई में एक बैवस गरीब महिला के मिलने वाले बन्द हो चुके सस्ते राशन को प्राप्त करने का था सो आवेदन पश्चात दुर्भाग्य बस आवेदिका का पति चल बसा, जब उक्त जानकारी सम्बन्धित अधिकारी को दी गई इस पर उसका सपाट सा जबाव था कि अगर वह भी मर जाये तो भी राशन नहीं मिलेगा। क्योंकि फिलहाल सर्वे चल रहा है। अब इस बेरहम व्यवस्था को कौन समझायें कि सस्ते राशन के इन्तजार में आवेदक तो हक होने के बावजूद मर गया कम से कम शेष मौजूद उसके परिवारजनों के प्रति तो सहानुभूति होना चाहिए न कि तिरस्कार का भाव।
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