नैतिक मूल्यों की मईयत और निष्ठापूर्ण कत्र्तव्य निर्वहन का जनाजा जबावदेही के मातम में स्वार्थवत संस्कृति और जश्न के अंदाज खतरनाक

व्ही.एस.भुल्ले
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
जिस तरह से आज सृष्टि के नियम को भूल स्वयं को सिद्ध करने में लीन कोई भी मानवता का इतना दुर्दान्त वीभत्स सच मानवता में विश्वास रखने वालों के सामने होगा किसी ने सपने में भी न सोचा होगा। मगर यह कटु सत्य है और मामला सृष्टि सिद्धान्त अनुरूप साफ है बैसे भी प्रकृति सन्तुलन का नियम है। अगर ऐसे में सत्ता संतुलन को सिद्ध करने का प्रयास है तो वह कितने सिद्ध होने में कामयाब होंगे यहीं बात आज हर आध्यात्म, विचार, व्यक्ति, विधि विद्ववान को मानवता की खातिर समझने वाली होना चाहिए।
काश हमारे बच्चे, युवा, बुजुर्ग इस सार्थक सत्य को समझ पाये, और अपनी संपदा, विधा, विद्ववान को समझ उनका मान-सम्मान कर पाये जो यथार्थ सत्य को समझा उसकी सार्थकता सिद्ध करते हो। आज के समय समस्त सृष्टि और मानवता के लिए सबसे बडी बात होगी जो संभव भी है और स्वतः सिद्ध भी। 

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