बगैर तकनीक विशेषज्ञ के अरबों के निर्माण जनधन बर्बादी का अलग विधान वन विभाग को विभीषक, वरदान

व्ही.एस.भुल्ले
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
वन पर्यावरण का संरक्षण सम्बर्धन उतना ही अहम है जितना आम जन का जीवन मगर वन पर्यावरण संरक्षण सम्बर्धन की आड में विभीषक आचार व्यवहार का प्रदर्शन हो जनधन स्थापित नैतिक विधि विरूद्ध बर्बाद हो ऐसे में इस अहम मसले पर चर्चा आवश्यक है कौन नहीं जानता कि वन विभाग निर्माण के नाम बगैर किसी तकनीक विशेषज्ञ के अरबों खर्च कर चुका है। वृक्षारोपण के नाम पर्यावरण को समृद्ध कर जंगली जानवर, पशु-पक्षियों के भोजन युक्त वृक्षों पेडों से तौबा करता यह विभाग के सामने गया। सबसे बडा सवाल तो यह है कि हमारा पशुधन या पशुओं का चारा आज सबसे बडे संकट में घिर गया है। दर-दर भटकता पशुधन, पल पल बेमौत मरता पशुधन इस बात का प्रमाण है कि वन पर्यावरण संरक्षण के नाम कुछ तो गलत हो रहा है जो विधि सम्वत तो हो सकता है। मगर नैतिक रूप से न्याय संगत नहीं। 

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