निष्ठापूर्ण, कत्र्तव्य निर्वहन की सिद्धता सिद्ध करता लोक सेवक प्रचार-प्रसार से इतर प्रमाणिकता की जुगाली करते परिणाम

वीरेन्द्र भुल्ले
विलेज टाइम्स समाचार सेवा। 
बात म.प्र. के जिला शहर शिवपुरी से जुड़ी है कभी अपनी सभ्यता, सुन्दरता, तो कभी जंगली जीव, जन्तु, घने जंगल, झरने, तालाब, तो कभी खूंखार डकैतांे के नाम कुख्याती तो कभी जनकल्याण, सेवा से जुडी योजनाओं को पलीता लगाने के नाम चिरपरिचित जिले में ऐसा भी हो सकता है। जहां कोई लोक सेवक प्रचार प्रसार से दूर अपने निष्ठापूर्ण कत्र्तव्य निर्वहन के परिणाम ही नहीं प्रमाणिकता तौर पर सिद्धता सिद्ध होने पर भी चुप रहे। इससे साफ है कि निष्ठापूर्ण, प्रमाणिक कत्र्तव्य, निर्वहन, अपने कत्र्तव्यों के प्रति आज के माहौल मे निष्ठापूर्ण सिद्ध करे तो वह उसकी सिद्धता ही कही जायेगी। 
ऐसा ही कुछ आज कल म.प्र. के शिवपुरी जिले में चल रहा है। मगर अच्छे कार्यो की चर्चा न होना इस शहर का दुर्भाग्य हमेशा से रहा है। मगर यह कटू सत्य है कि जिस तरह से शिक्षा स्वास्थ रोजगार के क्षेत्र में यह शहर एक लोक सेवक रहते, समृद्ध होने आतुर है यह सत्य बहस का विषय हो सकता है। मगर इस कटृ सत्य पर विचार अवश्य होना चाहिए अगर ईमानदारी निष्ठा का प्रमाण आज की व्यवस्था में किसी को देखना है तो उसे शिवपुरी में उस लोक सेवकों की तलाश अवश्य करना चाहिए। अगर शहर, जिले के लोग सिद्ध हुये तो यह निष्ठापूर्ण कत्र्तव्य निर्वहन करने वाले लोक सेवकों के प्रति सच्ची सहानुभूति होगी, एक समृद्ध मानसिकता की।

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