नीर, क्षीर,मक्खन, घी, दूध 56 भोग से समृद्ध भूभाग पर मौत का कारोवार

विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
धन्यवाद का पात्र है कमलनाथ का निजाम, जो आज माफिया राज पर कहर वनकर टूट रहा हैं। फिर वह दूध, सत्ता, भू,रसद, शिक्षा, स्वास्थ, रोजगार माफिया हो, या फिर घोषित-अघोषित, सिपह-सालारों का कारवां हो। मगर जिस तरह सें सत्ता सियासत के गलियारो मे सत्ता का खौफ, बेखौफ ढंग से बोल रहा हैं। यही आज सबसे बड़ी समझने वाली बात हैं। कोई स्वयं का सियासी कद, तो कोई स्वयं कि समृद्धि, तो कोई सर्व कल्याण को लेकर म.प्र मे संघर्षरत हैं। मगर स्वराज फिलहाल शैया पर हैं। जिसके लिए महात्मा गाॅधी ने ग्राम स्वराज तो पण्डित जी ने अन्तोदय की कल्पना कि तो, स्व. राजीव गाॅधी ने नगरीय-निकाय पंचायती राज की स्थापना कि मगर परिणाम स्वार्थवत लोगो के सत्ता मे रहते सार्थक नही हो पाये। जो सत्ता उन्मुख सियासत के लिये शर्मनाक ही नही, दर्दनाक होना चाहिए। मगर म.प्र के मुख्यमंत्री ने माफिया राज के खिलाफ जो पुरूषार्थ दिखाया हैं। वह काबिले गौर है। देखना होगा कि स्वार्थवत सियासत, समर्थन के बीच वह अपने स्वभाव अनुरूप स्वयं के जीवन के सिद्धात कैसे सिद्ध कर पाते हैं। आज म.प्र मे यही सबसे बड़ा यक्ष सवाल है और सेवा कल्याण उन्मुखी सियासत की सिद्धता।
जय स्वराज

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