सत्ता, शौहरत, दौलत की जकड में दम तोडता निजाम असुरक्षित सडक, नाली, चैराहे हवा में बात करते वाहन

वीरेन्द्र भुल्ले
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
अब इसे किसी
भी स्मार्ट शहर का सौभाग्य कहे या दुर्भाग्य जहां चैक चैराहों पर सडक पार करते वक्त या नालियों के नजदीक से गुजरते वक्त कब कैसा हादसा हो जाये परवाह किसे है, न तो सचेतक बोर्ड है, न ही कोई इन्डीकेटर मनमाने ढंग से फर्राटे भरते वाहनों को आलम यह है कि कौन कहा से रोंग साइट आ जाये कोई रोकने वाला नहीं।
कारण सत्ता शौहरत, दौलत की जकड में डूबा निजाम इतना निर्दयी नजर आता है। मानो कि हर माह मोटी पगार भत्तों को प्राप्त करने के बावजूद उसकी कोई जबावदेही ही नहीं, न ही समूचे निजाम में कोई ऐसा कोतवाल जो कत्र्तव्य विमुखता पर सवाल खडे कर निकम्मी होती व्यवस्था के कान ऐठ सके। साधारण से कार्यो से कत्र्तव्य विहीनता इस निजाम व्यवस्था को कहां ले जाकर छोडेगी कहना मुश्किल मंदी के नाम वाहन उघोग पर उडेलने वाले निजाम को शायद पता ही नहीं कि जितने वाहन सडकों पर है उतनी सडक ही पैदल चलने वालों को नहीं बची, रही सही कसर ऊबड-खाबड, खुली नाली और अतिक्रमण की जकड में दम तोडती सडकों ने पूर्ति कर दी जो शिवपुरी जैसे शहर के लिए दर्दनाक ही नहीं शर्मनाक भी है। मगर लगता नहीं, सत्ता शौहरत, दौलत के नशे में चूर निजाम मे ंइतनी आसानी से व्यवस्था सुधरने वाली है। जनसमर्थन की हनक और आलाअफसरों तक सीधी पकड चलते शासन के मंत्री तक को स्वयं फावडा पकड नाला साफ करना पढे और जिम्मेदार सामने ही खडे हो तमाशा देखे इससे बडी शर्मनाक बात और कोई हो नहीं सकती किसी भी निजाम व्यवस्था के लिए, मगर व्यवस्था के नाम अव्यवस्था के नाम कुख्यात इस शहर का फिलहाल सच यही है। 

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