ये है देश का मिजाज, कत्र्तव्यनिष्ठा बनी इन्सानियत का ताज पुलिस कीर्ति, आसमान पर दुर्दान्त अपराधियों पर आत्मरक्षार्थ संगीनों का कहर
व्ही.एस.भुल्ले
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
जिस हैदराबाद की दुर्दान्त, बलात्कार, हत्याकाण्ड पर समूचा देश खोल उठा था इन्सानियत, फवद-फवद कर रो रही थी और बैवसी बैचेन। मगर जब पुलिस से हथियार छीन भाग रहे दुर्दान्त अपराधियों पर आत्मरक्षार्थ पुलिस की दहाडती संगीनों का मुंह ठाय-ठाय करते ठीक उसी जगह खुला, जहां दुर्दान्त बलात्कारियों ने बलात्कार पश्चात पीडिता को जिन्दा जला दिया था तो चारों अपराधियों में से कुछ ढेर तो मरणासन्न थे। इससे पूर्व कि उन्हें जीवन रक्षक सहायता मिल पाती चारों ढेर हो चुके थे। यह खबर आते ही मानो समूचा देश उस पुलिस के नाम की वाह-वाही करते नहीं थका। जिसके नाम पर लोग जब तब तोहमत मलते नहीं थकते थे। मगर आज हैदराबाद तेलंगाना पुलिस ने समूचे देश में पुलिस का नाम रोशन कर दिया। सडक से लेकर संसद तक पुलिस की निष्ठा, कत्र्तव्य को सराहा गया। इससे देश के मिजाज को समझा जा सकता है। अब देश की सियासत सिस्टम को समझना यह है कि इन्सानियत की खातिर किये गये निष्ठापूर्ण कत्र्तव्य निर्वहन को देश की आवाम कैसे हाथों हाथों सर का ताज बना लेती।
काश षडयंत्र पूर्ण सियासत और सड़ांन्ध मारता वह सिस्टम इस सच को समझ पाये जो अपने कत्र्तव्य के लिए निष्ठापूर्ण, निर्वहन किया करता हो उसे इन्सानियत कैसे सर का ताज बना उसे सराहती है।
जय स्वराज
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
जिस हैदराबाद की दुर्दान्त, बलात्कार, हत्याकाण्ड पर समूचा देश खोल उठा था इन्सानियत, फवद-फवद कर रो रही थी और बैवसी बैचेन। मगर जब पुलिस से हथियार छीन भाग रहे दुर्दान्त अपराधियों पर आत्मरक्षार्थ पुलिस की दहाडती संगीनों का मुंह ठाय-ठाय करते ठीक उसी जगह खुला, जहां दुर्दान्त बलात्कारियों ने बलात्कार पश्चात पीडिता को जिन्दा जला दिया था तो चारों अपराधियों में से कुछ ढेर तो मरणासन्न थे। इससे पूर्व कि उन्हें जीवन रक्षक सहायता मिल पाती चारों ढेर हो चुके थे। यह खबर आते ही मानो समूचा देश उस पुलिस के नाम की वाह-वाही करते नहीं थका। जिसके नाम पर लोग जब तब तोहमत मलते नहीं थकते थे। मगर आज हैदराबाद तेलंगाना पुलिस ने समूचे देश में पुलिस का नाम रोशन कर दिया। सडक से लेकर संसद तक पुलिस की निष्ठा, कत्र्तव्य को सराहा गया। इससे देश के मिजाज को समझा जा सकता है। अब देश की सियासत सिस्टम को समझना यह है कि इन्सानियत की खातिर किये गये निष्ठापूर्ण कत्र्तव्य निर्वहन को देश की आवाम कैसे हाथों हाथों सर का ताज बना लेती।काश षडयंत्र पूर्ण सियासत और सड़ांन्ध मारता वह सिस्टम इस सच को समझ पाये जो अपने कत्र्तव्य के लिए निष्ठापूर्ण, निर्वहन किया करता हो उसे इन्सानियत कैसे सर का ताज बना उसे सराहती है।
जय स्वराज
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