घटिया सडकों की पूरी बसूली सडक, सेवा, सुविधा के नाम आमजन की खुलेयाम लूट विधान को विसार स्वार्थवत समाधान में डूबी सत्तायें

व्ही.एस.भुल्ले 
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
जिस तरह से देश भर में अच्छी सडकों एवं सडक किनारे सुविधाओं के नाम टोलों पर सरेयाम आमजन की सडक, सेवा, सुविधा के नाम लूट मची है वह किसी से छिपी नहीं। ऊंट पुल पुलिया परखच्चे उडती सडकें अपने जन्म से 1 वर्ष भी पूरा नहीं कर रही और परखच्चे उड जाते है। मगर पूरी शुल्क बूसली का काम टाॅलों द्वारा बडी ही निष्ठा के साथ आमजन को परेशान किया जाता है। अगर हम बात करें ग्वालियर से लेकर देवास तक कि एनएचआई द्वारा निर्मित सडकों की तो हालात ये है कि खस्ता सडकों की हालत और क्षत-विच्छेत हो चुकी संकेतक या अन्य सुविधाओं सहित सडकों पर हिचकोले मारते वाहन एनएचआई की इंजीनियरिंग एवं जिस कीमत पर सडकों का निर्माण किया गया है उससे जाहिर होता है कि विधि ही नहीं संविधान निहित आम नागरिकों के अधिकारों का खुलेयाम चीरहरण कैसे किया जा रहा है इससे शर्मनाक बात और क्या होगी कि जिन सडकों को बने 1 वर्ष भी नहीं हुआ और उनके या तो परखच्चे उड गये या उन पर पेंच के रूप में थिगडे लगाने पड रहे है। कई जानें इन उम्मदा सडकों पर जाने बाद भी एनएचआई की निद्रा नहीं टूटी, न ही परिवहन मंत्रालय को इस बात की परवाह कि जिस एनएचआई पर वह गर्व करती नहीं थकती आज इतनी घटिया स्तर की सडके एनएचआई के संरक्षण में बनाई गई है या जा रही है जो किसी भी जबावदेह व्यवस्था और सभ्य समाज के लिए शर्मनाक भी है और दर्दनाक भी। अगर एनएचआई के घटिया निर्माण का उदाहरण देखना है तो म.प्र. के शिवपुरी जिला मुख्यालय के वायपास मार्ग और फट चुके पुल को देखा जा सकता है। जो एनएचआई के लिए दर्दनाक भी होना चाहिए और शर्मनाक भी। जिस बने एक वर्ष भी नहीं हुआ था मगर जिस तरह से टाॅलों का स्थापन है और उन टोलो पर बसूली का तरीका अगर सडक निर्माण और टाॅल बसूली की केन्द्र सरकार सीबीआई से जांच करायें तो काफी चैकाने वाले खुलासे देश के सामने होंगे। मगर लगता नहीं कि जनधन की मची लूट पर कोई संज्ञान लें।

Comments

Popular posts from this blog

खण्ड खण्ड असतित्व का अखण्ड आधार

संविधान से विमुख सत्तायें, स्वराज में बड़ी बाधा सत्ताओं का सर्वोच्च समर्पण व आस्था अहम: व्ही.एस.भुल्ले

श्राफ भोगता समृद्ध भूभाग गौ-पालन सिर्फ आध्यात्म नहीं बल्कि मानव जीवन से जुडा सिद्धान्तः व्यवहारिक विज्ञान है अमृतदायिनी के निस्वार्थ, निष्ठापूर्ण कत्र्तव्य निर्वहन, त्याग तपस्या का तिरस्कार, अपमान पडा भारी जघन्य अन्याय, अत्याचार का दंश भोगती भ्रमित मानव सभ्यता