उत्पादन, अधोसंरचना निर्माण, सेवा, संसाधनों का सार्थक दोहन, मांग पूर्ति, बाजार को सुव्यवस्थित कर होगी समृद्ध अर्थव्यवस्था- व्ही.एस.भुल्ले मुख्य संयोजक स्वराज अल्प और दीर्घकालिक सार्वजनिक बोन्ड बन सकते है अर्थव्यवस्था के सार्थी टाॅप-टू वाॅटम मुद्रा प्रवाह होगा सार्थक मांग पूर्ति के संतुलन के साथ समस्या-समाधान, समृद्ध अर्थव्यवस्था का सूत्र
जयनारायण शर्मा
फिलहाल आर्थिक संस्थाओं का आकलन एक समृद्ध, आर्थिक विरासत तथा मौजूद संसाधनों को लेकर जो भी हो। फिर चाहे उसका स्वरूप सैद्धान्तिक, संभावित, व्यवहारिक हो। मगर किसी भी मजबूत समृद्ध अर्थव्यवस्था का सच यह है कि जब तक किसी भी व्यवस्था में उत्पादन अधोसंरचना निर्माण सेवा, संसाधनों का सार्थक दोहन और मांगपूर्ति के सन्तुलन के साथ बाजार सुव्यवस्थित ना हो, तब तक एक समृद्ध अर्थव्यवस्था दिव्य स्वप्न के समान ही होती है।
उक्त बात स्वराज के मुख्य संयोजक व्ही.एस.भुल्ले ने बजट पूर्व बच्चों के बीचे चर्चा के दौरान कही। उन्होंने कहा कि जब तक समृद्धि के लिए कोई भी राष्ट्र अल्प दीर्घकालिक सार्वजनिक बोन्ड को अपनी अर्थव्यवस्था के सार्थी के रूप में सिद्ध नहीं कर लेते तब तक ऐसे राष्ट्रों में मौजूद आर्थिक समस्याओं के निदान असंभव ही प्रतीत होते रहते है। किसी भी अर्थव्यवस्था के सटीक समाधान में जहां मांगपूर्ति का सन्तुलन और मुद्रा प्रवाह अहम होता है। मगर यह तभी संभव है जब सत्ताओं के बीच सर्वकल्याण का भाव सुनिश्चित हो और यह भारतवर्ष जैसे राष्ट्र में सहज संभव है। मगर इसके उलट जब तक समृद्धि का दिव्य स्वप्न सजोये लोगों के बीच निष्ठापूर्ण कत्र्तव्य निर्वहन का भाव पैदा नहीं होता और आर्थिक समृद्धि के साथ खुशहाल जीवन के प्रति उनका त्याग नहीं होता। तब तक समस्या-समस्या बनी रहेगी और समाधान दूर की कोणी। उन्होंने अंत में कहा कि समूचे विश्व में भारत ही ऐसा भूभाग है जहां अनादिकाल से एक ऐसी ढांचागत अर्थव्यवस्था रही है जिसमें मुद्रा के साथ सामाजिक सरोकारों का चका भी किसी भी समृद्ध अर्थव्यवस्था के रथ को खींचने में अहम रहा है। उन्हांेने कहा कि मुझे गर्व है कि मेरा सीधा संवाद देश की मौजूद पीढी के अलावा आज उस समृद्ध राष्ट्र की विरासत और भविष्य के साथ है। कहते है मौजूद पीढी किसी भी व्यक्ति, परिवार, समाज को हताश या निराश कर सकती है मगर कोई भी समृद्ध खुशहाल विरासत और कृतज्ञतापूर्ण भविष्य कभी भी निराश नहीं कर सकता। क्योंकि बाल स्वभाव ही किसी भी राष्ट्र की समृद्ध खुशहाल विरासत और प्राप्त विरासत की सच्ची उत्तराधिकारी होती है और उसका पुरूषार्थ भव्य और दिव्य होता है। जिसकी भव्यता और दिव्यता का आकलन असंभव ही नहीं नमुमकिन है। यहीं विश्वास किसी भी अर्थव्यवस्था के समृद्ध, खुशहाल सिद्ध होने का एक मात्र सूत्र हो सकता है। अब विचार हमारी सत्ताओं, सियासत और समृद्धि के सपने सजोने वाले उन कृतज्ञ पुरूषार्थियों को करना है जिनसे इस महान राष्ट्र की पीडित, वंचित, आभावग्रस्त करोडो-करोड आशा-आकांक्षाओं को बडी उम्मीद है। काश इस सच से हम समझ पाये।
फिलहाल आर्थिक संस्थाओं का आकलन एक समृद्ध, आर्थिक विरासत तथा मौजूद संसाधनों को लेकर जो भी हो। फिर चाहे उसका स्वरूप सैद्धान्तिक, संभावित, व्यवहारिक हो। मगर किसी भी मजबूत समृद्ध अर्थव्यवस्था का सच यह है कि जब तक किसी भी व्यवस्था में उत्पादन अधोसंरचना निर्माण सेवा, संसाधनों का सार्थक दोहन और मांगपूर्ति के सन्तुलन के साथ बाजार सुव्यवस्थित ना हो, तब तक एक समृद्ध अर्थव्यवस्था दिव्य स्वप्न के समान ही होती है। उक्त बात स्वराज के मुख्य संयोजक व्ही.एस.भुल्ले ने बजट पूर्व बच्चों के बीचे चर्चा के दौरान कही। उन्होंने कहा कि जब तक समृद्धि के लिए कोई भी राष्ट्र अल्प दीर्घकालिक सार्वजनिक बोन्ड को अपनी अर्थव्यवस्था के सार्थी के रूप में सिद्ध नहीं कर लेते तब तक ऐसे राष्ट्रों में मौजूद आर्थिक समस्याओं के निदान असंभव ही प्रतीत होते रहते है। किसी भी अर्थव्यवस्था के सटीक समाधान में जहां मांगपूर्ति का सन्तुलन और मुद्रा प्रवाह अहम होता है। मगर यह तभी संभव है जब सत्ताओं के बीच सर्वकल्याण का भाव सुनिश्चित हो और यह भारतवर्ष जैसे राष्ट्र में सहज संभव है। मगर इसके उलट जब तक समृद्धि का दिव्य स्वप्न सजोये लोगों के बीच निष्ठापूर्ण कत्र्तव्य निर्वहन का भाव पैदा नहीं होता और आर्थिक समृद्धि के साथ खुशहाल जीवन के प्रति उनका त्याग नहीं होता। तब तक समस्या-समस्या बनी रहेगी और समाधान दूर की कोणी। उन्होंने अंत में कहा कि समूचे विश्व में भारत ही ऐसा भूभाग है जहां अनादिकाल से एक ऐसी ढांचागत अर्थव्यवस्था रही है जिसमें मुद्रा के साथ सामाजिक सरोकारों का चका भी किसी भी समृद्ध अर्थव्यवस्था के रथ को खींचने में अहम रहा है। उन्हांेने कहा कि मुझे गर्व है कि मेरा सीधा संवाद देश की मौजूद पीढी के अलावा आज उस समृद्ध राष्ट्र की विरासत और भविष्य के साथ है। कहते है मौजूद पीढी किसी भी व्यक्ति, परिवार, समाज को हताश या निराश कर सकती है मगर कोई भी समृद्ध खुशहाल विरासत और कृतज्ञतापूर्ण भविष्य कभी भी निराश नहीं कर सकता। क्योंकि बाल स्वभाव ही किसी भी राष्ट्र की समृद्ध खुशहाल विरासत और प्राप्त विरासत की सच्ची उत्तराधिकारी होती है और उसका पुरूषार्थ भव्य और दिव्य होता है। जिसकी भव्यता और दिव्यता का आकलन असंभव ही नहीं नमुमकिन है। यहीं विश्वास किसी भी अर्थव्यवस्था के समृद्ध, खुशहाल सिद्ध होने का एक मात्र सूत्र हो सकता है। अब विचार हमारी सत्ताओं, सियासत और समृद्धि के सपने सजोने वाले उन कृतज्ञ पुरूषार्थियों को करना है जिनसे इस महान राष्ट्र की पीडित, वंचित, आभावग्रस्त करोडो-करोड आशा-आकांक्षाओं को बडी उम्मीद है। काश इस सच से हम समझ पाये।
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