मिनीमम टाइम, मैक्जिमम वर्क, पुरूषार्थ दिखाते परिणाम
वीरेन्द्र भुल्ले
म.प्र.। सत्ता की हनक के बीच पुरूषार्थ दिखाते परिणाम इस बात के गवाह हो सकते है कि किस तरह सेवा कल्याण में निष्ठापूर्ण कत्र्तव्य निर्वहन के माध्यम से मौन रह मिनीमम टाइम और मैक्जिमम वर्क आउट कर सार्थक परिणाम प्राप्त किये जा सकते है। ऐसा ही कुछ म.प्र. के शिवपुरी जिले में पदस्थ एक युवा आईएएस अनुग्रह पी ने शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार के क्षेत्र में कर दिखाया है। फिलहाल अगर चर्चाओं में सरगर्म मुद्दे शिक्षा और रोजगार को उपलब्ध संसाधनों की बात करें तो वहीं रोजमर्रा के कार्यो से फारिख हो, आमजन से जुडे सरोकारों की बात हो तो समूचे म.प्र. में आजकल शिवपुरी में इकोफ्र्रेडंली एक ऐसा अजूबा कत्र्तव्य निर्वहन के माध्यम देखने मिल सकता है जो समूची व्यवस्था के लिए व्यवहारिक तौर पर एक नजीर साबित हो। सतत बैठकें और बैठकों में मातहतों को सटीक सीख के साथ नियमित प्रमाणिकता जांचने भ्रमणों के दौर के साथ जो कत्र्तव्य निर्वहन हो रहा है उसके भविष्य के परिणाम जो भी हो मगर प्रयासों पर सवाल नहीं हो सकते। म.प्र. के शिवपुरी जिले में दूरांचल क्षेत्रों में मौजूद विद्यालयों स्कूलों के चमचमाते भवन व समय से स्कूलों की ओर कूच करते शिक्षक साथ ही लगभग 70 हजार युवाओं की सेना भर्ती के लिए संसाधनों के साथ चाक-चैबंद व्यवस्था भी इस बात का प्रमाण है कि अगर सकारात्मक सोच के साथ परिणाममूलक प्रयास किये जाये तो वह सेवा कल्याण के क्षेत्र में सार्थक भी होते है और सफल भी। काश सेवा कल्याण के क्षेत्र में कत्र्तव्य निर्वहन की यह नजीर और लम्बी हो, तो जन सरोकार के लिए यह दूर की कोणी साबित होगी।
म.प्र.। सत्ता की हनक के बीच पुरूषार्थ दिखाते परिणाम इस बात के गवाह हो सकते है कि किस तरह सेवा कल्याण में निष्ठापूर्ण कत्र्तव्य निर्वहन के माध्यम से मौन रह मिनीमम टाइम और मैक्जिमम वर्क आउट कर सार्थक परिणाम प्राप्त किये जा सकते है। ऐसा ही कुछ म.प्र. के शिवपुरी जिले में पदस्थ एक युवा आईएएस अनुग्रह पी ने शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार के क्षेत्र में कर दिखाया है। फिलहाल अगर चर्चाओं में सरगर्म मुद्दे शिक्षा और रोजगार को उपलब्ध संसाधनों की बात करें तो वहीं रोजमर्रा के कार्यो से फारिख हो, आमजन से जुडे सरोकारों की बात हो तो समूचे म.प्र. में आजकल शिवपुरी में इकोफ्र्रेडंली एक ऐसा अजूबा कत्र्तव्य निर्वहन के माध्यम देखने मिल सकता है जो समूची व्यवस्था के लिए व्यवहारिक तौर पर एक नजीर साबित हो। सतत बैठकें और बैठकों में मातहतों को सटीक सीख के साथ नियमित प्रमाणिकता जांचने भ्रमणों के दौर के साथ जो कत्र्तव्य निर्वहन हो रहा है उसके भविष्य के परिणाम जो भी हो मगर प्रयासों पर सवाल नहीं हो सकते। म.प्र. के शिवपुरी जिले में दूरांचल क्षेत्रों में मौजूद विद्यालयों स्कूलों के चमचमाते भवन व समय से स्कूलों की ओर कूच करते शिक्षक साथ ही लगभग 70 हजार युवाओं की सेना भर्ती के लिए संसाधनों के साथ चाक-चैबंद व्यवस्था भी इस बात का प्रमाण है कि अगर सकारात्मक सोच के साथ परिणाममूलक प्रयास किये जाये तो वह सेवा कल्याण के क्षेत्र में सार्थक भी होते है और सफल भी। काश सेवा कल्याण के क्षेत्र में कत्र्तव्य निर्वहन की यह नजीर और लम्बी हो, तो जन सरोकार के लिए यह दूर की कोणी साबित होगी।
Comments
Post a Comment