कांग्रेस को शर्मिष्ठा का कड़वा सच भाजपा हराने का जिम्मा क्या क्षेत्रीय दलों को
वीरेन्द्र भुल्ले
ये अलग बात है कि भाजपा कांग्रेस की करारी हार और आप की धमाकेदार जीत पर शर्मिष्ठा का सीधा सवाल चिदम्बरम से हो। मगर कडवा सच काॅग्रेस की रीति-नीति और उसके पालन कत्र्ताओं के लिए समझने वाली बात है। यूं तो मीडिया जगत 7 वर्षो से ही नहीं विगत 30 वर्षो से कांग्रेस को आगाह करते आ रहे है। जब तब विपक्ष सत्ता पक्ष के कडे प्रहारों ने भी कांग्रेस के जमीर को ललकारने वाले अन्दाज में जगाने की कोशिश की। मगर स्वार्थवत सियासत और चालाक चैकडी ने आज तक ऐसा होने नहीं दिया और न ही भविष्य में भी ऐसी कोई संभावना साफ नजर आती है।
कारण साफ है जिस तरह का आचरण व्यवहार राजस्थान, छत्तीसगढ़, म.प्र. में कांग्रेस सरकारों का है और जो हालात केरल, पश्चिम बंगाल, उड़ीसा, बिहार, महाराष्ट्र से लेकर आन्ध्र, कर्नाटक में है वह किसी से छिपे नहीं। मगर अस्तित्व के लिए उत्तरप्रदेश से लेकर दिल्ली तक छिडे संघर्ष परिणाम साक्षी है। सुधार की संभावना कहीं दिवास्वन भर भविष्य में कांग्रेस को साबित न हो। इसकी संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।
ये अलग बात है कि भाजपा कांग्रेस की करारी हार और आप की धमाकेदार जीत पर शर्मिष्ठा का सीधा सवाल चिदम्बरम से हो। मगर कडवा सच काॅग्रेस की रीति-नीति और उसके पालन कत्र्ताओं के लिए समझने वाली बात है। यूं तो मीडिया जगत 7 वर्षो से ही नहीं विगत 30 वर्षो से कांग्रेस को आगाह करते आ रहे है। जब तब विपक्ष सत्ता पक्ष के कडे प्रहारों ने भी कांग्रेस के जमीर को ललकारने वाले अन्दाज में जगाने की कोशिश की। मगर स्वार्थवत सियासत और चालाक चैकडी ने आज तक ऐसा होने नहीं दिया और न ही भविष्य में भी ऐसी कोई संभावना साफ नजर आती है। कारण साफ है जिस तरह का आचरण व्यवहार राजस्थान, छत्तीसगढ़, म.प्र. में कांग्रेस सरकारों का है और जो हालात केरल, पश्चिम बंगाल, उड़ीसा, बिहार, महाराष्ट्र से लेकर आन्ध्र, कर्नाटक में है वह किसी से छिपे नहीं। मगर अस्तित्व के लिए उत्तरप्रदेश से लेकर दिल्ली तक छिडे संघर्ष परिणाम साक्षी है। सुधार की संभावना कहीं दिवास्वन भर भविष्य में कांग्रेस को साबित न हो। इसकी संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।
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