ग्वालियर की गौरव, वैभव पूर्ण विरासत की ताजपोशी श्रेष्ठ सोच, संस्कारों के प्रतीक है कै.वासी श्रीमंत माधौ महाराज
वीरेन्द्र शर्मा भुल्ले

आज से 100 वर्ष पूर्व जब लोग के पास खाने पहनने और अच्छे भवनों में रहने के लाले थे तथा समृद्धि के नाम एक पहाडी, पठारी पथरीले भूभाग के साथ घने घनगौर जंगल हुआ करते थे तब शिक्षा, शुद्ध पेयजल, सडक, सीवर लाईन, रेल परिवहन, खेती किसान, पशु-पालन, खेल मैदान, सांस्कृति भवन, बांध, होस्टल, कोठी, क्वाटर और आउट हाउस जैसे भवनो की कल्पना तक करना बैमानी थी तब कै. श्रीमंत माधौ महाराज की वैभवपूर्ण सोच और गौरवशाली परंपरा और संस्कारों के बल सेवा, सुविधा, संस्कार म.प्र. के शिवपुरीवासियों को उपलब्ध करायें। इतना ही नहीं सैकडों वर्ष तक समृद्ध शिवपुरी, ग्वालियर-चम्बल की भावी पीडी को समृद्ध बनाये रखने की योजना तैयार की। उन्होंने अपनी विराट सोच के चलते ही 100 वर्ष पूर्व सीपरी नाम के पथरीले पठारी घने जंगल से घिरे भूभाग को नरवर जिला होने के बावजूद शिवपुरी को सिंधिया स्टेट की सुन्दर सर्वसुविधायुक्त राजधानी के रूप में विकसित किया। जहां शहर के अन्दर सर्वसुविधायुक्त व्यवस्थायें खेल मैदान, क्लब, सांस्कृति भवन, सचिवालय, महल, कोठी, क्वाटर, आउट हाउस, रहवासी ब्लाॅक, होस्टल, विद्यालयों का निर्माण कराया। वहीं परिवहन से सीपरी को जोडने शिवपुरी, ग्वालियर रेलमार्ग तथा चूने की चिकनी-चिकनी सडके तो हर गांव में एक सार्वजनिक और एक निस्तारी तालाब सहित शिवपुरी वेसन में मौजूद पार्वती, सिंध, महुअर नदी के अथाये जल के बेहतर प्रबंधन के लिए विश्व विख्यात इंजीनियर और इंजीनियरों के भगवान कहे जाने वाले इंजीनियर सर्व मोक्ष गुड्डम विश्वसरैया जी मार्गदर्शन में तिघरा, ककेटो, हरषी, जाधव सागर, सांख्य सागर, माधौलेख जैसे बांधों का निर्माण कराया। वहीं शिवपुरी शहर को प्राकृति रूप से वातानुकूलित रखने शहर के अन्दर 14 तालाब एवं उनकी वेस्टवीयरों का निर्माण कराया। जिन तालाबों की तलहटी में फल उद्यान के रूप में अमरूद के बगीचे लगाये गये, तो वहीं शहर को स्वच्छ और रोशन रखने शहर में सीवर लाईन व्हीटाईप नालियां, पुल, पुलिया तथा हर चैराहे पर रोशनी करने बडे-बडे खम्बों पर रोशनी की व्यवस्था कराई। अपने उच्च संस्कारों की छत्र-छाया में अपनी मातृश्री से अथाये स्नेह के चलते इतने समर्पित संस्कारिक भाव के प्रति समर्पित थे कि अपनी मां के मरणों उपरान्त वह शिवपुरी स्थित छत्री से अपनी मां की प्रतिमा को रथ पर बैठा स्वयं नंगे पैर रथ को खीच किलोमीटरों शहर भ्रमण कराया करते थे। संस्कार और कत्र्तव्य निर्वहन की ऐसी विरासत उन्होंने इस शहर को दी कि आज समूचा ग्वालियर ही नहीं शिवपुरी भी स्वयं पर गर्व कर गौरान्वित मेहसूस करता है। कुछ दिन पूर्व उनकी प्रतिमा का अनावरण ठीक उसी जगह हुआ जहां कभी वह सिंधिया स्टेट के महाराज होने के बावजूद अपने शहर के लोगों से सहज मिल बतियाया करते थे। जिसका अनावरण उनकी प्रपौत्री श्रीमंत यशोधरा राजे सिंधिया ने किया। विगत वर्षो से सैकडो मंदिरों के जीर्णोउद्धार में जुटी श्रीमंत यशोधरा राजे ने परदादी महाराज कै.वासी श्रीमंत जीजाबाई की विरासत को आगे बढाते हुये 150 वर्ष बाद शिवपुरी के श्री भगवान लक्ष्मीनारायण नवग्रह मंदिर के साथ कालियामर्दन, गौरखनाथ, सिद्धेश्वर मंदिर एवं धर्मशाला सहित जिलेभर के सैकडो मंदिरों के जीर्णोउद्धार करा एक नई लकीर खीचने का कार्य किया है। परिणाम कि शिवपुरी में ही जल्द ही भगवाल लक्ष्मीनारायण मंदिर और नवग्रह मंदिर का भव्य, दिव्य स्वरूप शहरवासियों के सामने होगा।
देखा जाए तो आज जहां छत्री है वहां स्थित बाणगंगा, गणेश मंदिर सहित छत्री के अंदर भगवान राम और कृष्ण मंदिर का निर्माण कै.वासी श्रीमंत जीजाबाई महाराज ने कराया था। क्योंकि उनकी ईश्वर के प्रति गहरी आस्था थी और उन्हें बाणगंगा स्थित स्थान से बडा स्नेह था इसलिए उनकी छत्री वहीं पर बनाई गई और जिस पुत्र को वह अगाद स्नेह रखती थी उन्हीं कै.वासी श्रीमंत माधौ महाराज की छत्री भी उन्हीं के सामने बनी है। बहरहाल श्रीमंत माधौ महाराज की मूर्ति अनावरण से प्राप्त शिवपुरी शहर को उनके सानिध्य आशीर्वाद का प्रतिफल एक विराट सोच, सर्वकल्याण और संस्कारों के रूप में कब प्राप्त होगा यह तो देखने वाली बात होगी। मगर जो कार्य श्रीमंत यशोधरा राजे सिंधिया ने एक सच्चे जनप्रतिनिधि होने के नाते अपने निष्ठापूर्ण कत्र्तव्य निर्वहन के माध्यम से शिवपुरी शहर के लिए किया है वह सैकडो वर्ष तक अवश्य लोगों के बीच और शिवपुरी के इतिहास में मौजूद रहने वाला है।

आज से 100 वर्ष पूर्व जब लोग के पास खाने पहनने और अच्छे भवनों में रहने के लाले थे तथा समृद्धि के नाम एक पहाडी, पठारी पथरीले भूभाग के साथ घने घनगौर जंगल हुआ करते थे तब शिक्षा, शुद्ध पेयजल, सडक, सीवर लाईन, रेल परिवहन, खेती किसान, पशु-पालन, खेल मैदान, सांस्कृति भवन, बांध, होस्टल, कोठी, क्वाटर और आउट हाउस जैसे भवनो की कल्पना तक करना बैमानी थी तब कै. श्रीमंत माधौ महाराज की वैभवपूर्ण सोच और गौरवशाली परंपरा और संस्कारों के बल सेवा, सुविधा, संस्कार म.प्र. के शिवपुरीवासियों को उपलब्ध करायें। इतना ही नहीं सैकडों वर्ष तक समृद्ध शिवपुरी, ग्वालियर-चम्बल की भावी पीडी को समृद्ध बनाये रखने की योजना तैयार की। उन्होंने अपनी विराट सोच के चलते ही 100 वर्ष पूर्व सीपरी नाम के पथरीले पठारी घने जंगल से घिरे भूभाग को नरवर जिला होने के बावजूद शिवपुरी को सिंधिया स्टेट की सुन्दर सर्वसुविधायुक्त राजधानी के रूप में विकसित किया। जहां शहर के अन्दर सर्वसुविधायुक्त व्यवस्थायें खेल मैदान, क्लब, सांस्कृति भवन, सचिवालय, महल, कोठी, क्वाटर, आउट हाउस, रहवासी ब्लाॅक, होस्टल, विद्यालयों का निर्माण कराया। वहीं परिवहन से सीपरी को जोडने शिवपुरी, ग्वालियर रेलमार्ग तथा चूने की चिकनी-चिकनी सडके तो हर गांव में एक सार्वजनिक और एक निस्तारी तालाब सहित शिवपुरी वेसन में मौजूद पार्वती, सिंध, महुअर नदी के अथाये जल के बेहतर प्रबंधन के लिए विश्व विख्यात इंजीनियर और इंजीनियरों के भगवान कहे जाने वाले इंजीनियर सर्व मोक्ष गुड्डम विश्वसरैया जी मार्गदर्शन में तिघरा, ककेटो, हरषी, जाधव सागर, सांख्य सागर, माधौलेख जैसे बांधों का निर्माण कराया। वहीं शिवपुरी शहर को प्राकृति रूप से वातानुकूलित रखने शहर के अन्दर 14 तालाब एवं उनकी वेस्टवीयरों का निर्माण कराया। जिन तालाबों की तलहटी में फल उद्यान के रूप में अमरूद के बगीचे लगाये गये, तो वहीं शहर को स्वच्छ और रोशन रखने शहर में सीवर लाईन व्हीटाईप नालियां, पुल, पुलिया तथा हर चैराहे पर रोशनी करने बडे-बडे खम्बों पर रोशनी की व्यवस्था कराई। अपने उच्च संस्कारों की छत्र-छाया में अपनी मातृश्री से अथाये स्नेह के चलते इतने समर्पित संस्कारिक भाव के प्रति समर्पित थे कि अपनी मां के मरणों उपरान्त वह शिवपुरी स्थित छत्री से अपनी मां की प्रतिमा को रथ पर बैठा स्वयं नंगे पैर रथ को खीच किलोमीटरों शहर भ्रमण कराया करते थे। संस्कार और कत्र्तव्य निर्वहन की ऐसी विरासत उन्होंने इस शहर को दी कि आज समूचा ग्वालियर ही नहीं शिवपुरी भी स्वयं पर गर्व कर गौरान्वित मेहसूस करता है। कुछ दिन पूर्व उनकी प्रतिमा का अनावरण ठीक उसी जगह हुआ जहां कभी वह सिंधिया स्टेट के महाराज होने के बावजूद अपने शहर के लोगों से सहज मिल बतियाया करते थे। जिसका अनावरण उनकी प्रपौत्री श्रीमंत यशोधरा राजे सिंधिया ने किया। विगत वर्षो से सैकडो मंदिरों के जीर्णोउद्धार में जुटी श्रीमंत यशोधरा राजे ने परदादी महाराज कै.वासी श्रीमंत जीजाबाई की विरासत को आगे बढाते हुये 150 वर्ष बाद शिवपुरी के श्री भगवान लक्ष्मीनारायण नवग्रह मंदिर के साथ कालियामर्दन, गौरखनाथ, सिद्धेश्वर मंदिर एवं धर्मशाला सहित जिलेभर के सैकडो मंदिरों के जीर्णोउद्धार करा एक नई लकीर खीचने का कार्य किया है। परिणाम कि शिवपुरी में ही जल्द ही भगवाल लक्ष्मीनारायण मंदिर और नवग्रह मंदिर का भव्य, दिव्य स्वरूप शहरवासियों के सामने होगा। देखा जाए तो आज जहां छत्री है वहां स्थित बाणगंगा, गणेश मंदिर सहित छत्री के अंदर भगवान राम और कृष्ण मंदिर का निर्माण कै.वासी श्रीमंत जीजाबाई महाराज ने कराया था। क्योंकि उनकी ईश्वर के प्रति गहरी आस्था थी और उन्हें बाणगंगा स्थित स्थान से बडा स्नेह था इसलिए उनकी छत्री वहीं पर बनाई गई और जिस पुत्र को वह अगाद स्नेह रखती थी उन्हीं कै.वासी श्रीमंत माधौ महाराज की छत्री भी उन्हीं के सामने बनी है। बहरहाल श्रीमंत माधौ महाराज की मूर्ति अनावरण से प्राप्त शिवपुरी शहर को उनके सानिध्य आशीर्वाद का प्रतिफल एक विराट सोच, सर्वकल्याण और संस्कारों के रूप में कब प्राप्त होगा यह तो देखने वाली बात होगी। मगर जो कार्य श्रीमंत यशोधरा राजे सिंधिया ने एक सच्चे जनप्रतिनिधि होने के नाते अपने निष्ठापूर्ण कत्र्तव्य निर्वहन के माध्यम से शिवपुरी शहर के लिए किया है वह सैकडो वर्ष तक अवश्य लोगों के बीच और शिवपुरी के इतिहास में मौजूद रहने वाला है।
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