एक प्रधानमंत्री और 130 करोड का देश..... स्वयं, परिवार, समाज, राष्ट्र की खातिर, घर में ही रहे, और एक दूसरे से दूरी बनाये रखे संकट की घडी में में प्रधानमंत्री जी की सीख ही सबसे बडा समाधान
व्ही.एस.भुल्ले
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
जिस तरह से कोरोना महामारी के रूप में महा संकट हम भारतवर्ष के लोगों के सामने खडा है। ऐसे में हमारे यशस्वी, तपस्वी प्रधानमंत्री जी की सीख उनके आग्रह उनके निर्देशों का पालन ही आज के समय में स्वयं की रक्षा, परिवार की रक्षा, समाज की रक्षा और राष्ट्र की रक्षा के लिये सबसे अहम है। हम 130 करोड की आबादी वाले इस महान राष्ट्र की जिस तरह से हमारे प्रधानमंत्री जी ने चिन्ता की है ऐसे में हमारी सबसे बडी चिन्ता हमारे अपनो के लिये प्रधानमंत्री जी के वह निर्देश उनका आग्रह कि हम 21 दिनों तक घर में ही रहे और एक दूसरे से दूरी बना परिवार के मुखिया तथा अपने मानव, धर्म का पालन करें। हमें यह विधित होना चाहिए कि हमारी भारत सरकार ने एक लाख 70 हजार करोड रूपये इस महामारी की जंग से लडने सुनिश्चित कर दिये है और स्वयं प्रधानमंत्री जी ने 15000 हजार करोड रूपया इस तरह की बीमारियों के समाधान हेतु अलग से रख छोडे है। हमारी सरकारें पुरजोर हमारी मदद और हमारे स्वस्थ रहने की चिन्ता में जुटी है और समाधान के लिये भरसक मौजूद संसाधनों के बीच प्रयास कर रही है। ऐसे में हमारा कत्र्तव्य है कि हम भी एक महान राष्ट्र के नागरिक होने के नाते अपने-अपने कत्र्तव्यों का निष्ठापूर्ण निर्वहन करें। साथ ही हमें उम्मीद है कि हमारी सरकारें खासकर केन्द्र सरकार से संबंधित जबावदेह लोग शीघ्र यह सुनिश्चित करें कि जितने भी कोरोना जैसी महामारी से प्रभावित लोग है उन्हें जांच चिकित्सा सुविधा के लिये एक ऐसा केन्द्र स्थापित किया जाये जहां त्रिस्तरीय देखभाल चिकित्सीय सुविधा की व्यवस्था बन सके। जिसमें पहले चरण में उन संक्रमित लोगों को रखा जाये जो संभावित संक्रमित है दूसरे स्तर पर संक्रमित लोगों को रखा जाये तथा तीसरे स्तर की देखभाल में उन लोगों को निगरानी में रखा जाये जो इस महामारी से लडकर ठीक हो चुके हैं। जिससे अनावश्यक अप्रत्याशित होने वाले संक्रमण से शेष आबादी को अलग रखा जा सके और कोरोना की लाईन को शेष आबादी से काटा जा सके। निश्चित ही हमारे विद्यवान, समझदार, सेवक, मानव इस गंभीरता और इस समाधान की सार्थकता को समझेंगंे क्योंकि देश बडा है संकट बडा है। मगर देश के लोगों का सामर्थ छोटा नहीं क्योंकि जिस तरह से प्रधानमंत्री जी का सम्मान देश के 130 करोड लोग स्वयं परिवार, समाज और राष्ट्र के लिये स्वयं को घरों में बन्द रख व एक दूसरे से सम्पर्क न रख अपने कत्र्तव्य का निर्वहन कर रहे है इससे जीत इस महान भारतवर्ष की ही होगी और एक मर्तवा फिर से इस राष्ट्र का मान-सम्मान स्थापित होगा।
जय स्वराज
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
जिस तरह से कोरोना महामारी के रूप में महा संकट हम भारतवर्ष के लोगों के सामने खडा है। ऐसे में हमारे यशस्वी, तपस्वी प्रधानमंत्री जी की सीख उनके आग्रह उनके निर्देशों का पालन ही आज के समय में स्वयं की रक्षा, परिवार की रक्षा, समाज की रक्षा और राष्ट्र की रक्षा के लिये सबसे अहम है। हम 130 करोड की आबादी वाले इस महान राष्ट्र की जिस तरह से हमारे प्रधानमंत्री जी ने चिन्ता की है ऐसे में हमारी सबसे बडी चिन्ता हमारे अपनो के लिये प्रधानमंत्री जी के वह निर्देश उनका आग्रह कि हम 21 दिनों तक घर में ही रहे और एक दूसरे से दूरी बना परिवार के मुखिया तथा अपने मानव, धर्म का पालन करें। हमें यह विधित होना चाहिए कि हमारी भारत सरकार ने एक लाख 70 हजार करोड रूपये इस महामारी की जंग से लडने सुनिश्चित कर दिये है और स्वयं प्रधानमंत्री जी ने 15000 हजार करोड रूपया इस तरह की बीमारियों के समाधान हेतु अलग से रख छोडे है। हमारी सरकारें पुरजोर हमारी मदद और हमारे स्वस्थ रहने की चिन्ता में जुटी है और समाधान के लिये भरसक मौजूद संसाधनों के बीच प्रयास कर रही है। ऐसे में हमारा कत्र्तव्य है कि हम भी एक महान राष्ट्र के नागरिक होने के नाते अपने-अपने कत्र्तव्यों का निष्ठापूर्ण निर्वहन करें। साथ ही हमें उम्मीद है कि हमारी सरकारें खासकर केन्द्र सरकार से संबंधित जबावदेह लोग शीघ्र यह सुनिश्चित करें कि जितने भी कोरोना जैसी महामारी से प्रभावित लोग है उन्हें जांच चिकित्सा सुविधा के लिये एक ऐसा केन्द्र स्थापित किया जाये जहां त्रिस्तरीय देखभाल चिकित्सीय सुविधा की व्यवस्था बन सके। जिसमें पहले चरण में उन संक्रमित लोगों को रखा जाये जो संभावित संक्रमित है दूसरे स्तर पर संक्रमित लोगों को रखा जाये तथा तीसरे स्तर की देखभाल में उन लोगों को निगरानी में रखा जाये जो इस महामारी से लडकर ठीक हो चुके हैं। जिससे अनावश्यक अप्रत्याशित होने वाले संक्रमण से शेष आबादी को अलग रखा जा सके और कोरोना की लाईन को शेष आबादी से काटा जा सके। निश्चित ही हमारे विद्यवान, समझदार, सेवक, मानव इस गंभीरता और इस समाधान की सार्थकता को समझेंगंे क्योंकि देश बडा है संकट बडा है। मगर देश के लोगों का सामर्थ छोटा नहीं क्योंकि जिस तरह से प्रधानमंत्री जी का सम्मान देश के 130 करोड लोग स्वयं परिवार, समाज और राष्ट्र के लिये स्वयं को घरों में बन्द रख व एक दूसरे से सम्पर्क न रख अपने कत्र्तव्य का निर्वहन कर रहे है इससे जीत इस महान भारतवर्ष की ही होगी और एक मर्तवा फिर से इस राष्ट्र का मान-सम्मान स्थापित होगा। जय स्वराज
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