षड़यंत्रपूर्ण सियासत का महा मंथन...............तीरंदाज ?

व्ही.एस.भुल्ले
भैया- आंधी, ओला, सर्द गर्म हवाओं के बीच सिर्फ गमच्छे, लंगोट की अर्ध नग्न हालत में तने कै टोटका कर रहा है कै थारे को मालूम कोणी म्हारा तो समूचा कुनवा ही नहीं, म्हारे निजाम पर भी गहरा संकट आन पडा है। धड़ाम होती म्हारी षडयंत्रकारी सियासत पर मुंये किसी को दुःख, दर्द तक नहीं, सूझ रहा है। 
भैये- दुःख, दर्द म्हारी जूती से, मने तो ग्रीष्मकाल से पूर्व षडयंत्रकारियों से दो-दो हाथ कर सुख की नींद सोने अपने अंग वस्त्रों को चटक धूप में सुखा ग्रीष्मकालीन पूर्व की तैयारी कर रहा हूं। क्योंकि काडू बोल्या कि धूप में वस्त्र सुखाने से कोरोना जैसे वायरस के कहर और घातक जीवाणु से उत्पन्न होने वाली बीमारी और स्वच्छ राजनीति में पेर जमायें बैठी षडयंत्रकारी सियासत के दुष्प्रभावों से बचा जा सकता है। कहते है प्रकृति के बीच चटक धूप में अंग वस्त्र सुखाने से घातक वायरस, खटमल, जूंऐं ही नहीं घातक बीमारी देने वाले वायरस तक दूर हो जाते है। फिर वह षडयंत्रकारी स्वार्थवत महत्वकांक्षी सियासत हो या फिर कोई बीमारी महामारी हो। 
भैया- अब सियासत में सिर्फ मंथन और घातक बीमारियों को रोकने स्क्रीनिंग के दौर के बीच महा मंथन चल रहा है और तने गमच्छा, लंगोटी, अंग वस्त्र सुखा वायरस, जूंऐं, खटमल भगाने में जुटा है। 
भैये- तू न जाडे कि षडयंत्रकारी सियासत के जूंऐं जमजूंऐं तथा महामारी फैलाने वाले घातक वायरसों को, म्हारी तो भरी पूरी कद-काटी ही नहीं पूरी जवानी लूट ली, इन जमजूंओं ने और वायरस ऐसे कि समूची सियासत आज महामारी के कगार पर खड़ी है। 
भैये- कै थारे को मालूम कोणी सियासत में अब षडयंत्र नहीं सफाई को लेकर आरपार का दौर चल रहा है। इसलिए गर्मियों से पूर्व मने तो अंग वस्त्रों की स्क्रीनिंग सहित खटमल, जमजूंओं का पुख्ता इंतजाम कर रहा हूं।
भैया- मने समझ लिया थारा इसारा अब तो आरपार के दौर में स्क्रीनिंग और धूप स्नान से ही स्वच्छंद सियासत और जीवन चलेगा न कि  षडयंत्रकारी सियासत और वायरस युक्त अंग वस्त्रों से तन ढकने का काम हो सकेगा। तब तो थारी और म्हारी चल जायेगी बरना जिस तरह से समूचे विश्व में कोरोना को लेकर हाय-तौबा हो रही है और कमल की राशि पर भविष्याणियां चल रही है मने न लागे कुछ शुभ होने वाला है। सियासत तो जैसी रहे न रहे, मगर हर जीवन स्वस्थ रहे इसके लिए स्क्रीनिंग और धूप स्नान की बयार जरूर चलने वाली है।
जय स्वराज 

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