प्रधानमंत्री की चिन्ता व्यर्थ नहीं सडक पर मौत से खेलती व्यवस्था कोरोना से खुद की रक्षा ही स्वजन, प्रियजनों की सुरक्षा काम न हो तो घर में ही रहे

व्ही.एस.भुल्ले
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
कोरोना के कहर से जब समूचा विश्व कराहने पर मजबूर है और खौफ से बैवस मजबूर नजर आ रहा है ऐसे में भारत के प्रधानमंत्री जी की चिन्ता उनकी नाराजगी, उनका आग्रह कोई बैवजह नहीं हो सकता। मामला साफ है कि जिस तरह से विश्व भर में लोग कोरोना की चपेट में आ अपनी बहुमूल्य जान गवा रहे है वह कोरोना जैसी महामारी की भयाभयता को समझने काफी है। कहीं पर सीमाऐं सील तो कहीं कफ्र्यू, शट-डाउन की स्थिति उन बेगुनाह जानों को बचाने की शासन और सरकारों की कोशिश है जो जाने-अनजाने इसका शिकार हो रहीं है। फिलहाल की स्थिति में कोरोना से बचने का मात्र एक ही उपाय है कि हम एक दूसरे के संपर्क में न जाये अपने घरों पर ही रहे और अगर कोई ऐसी बीमारी होती है जिसके लक्षण कोरोना से मिलते-जुलते हो तो अवश्य शासकीय डाॅक्टर या फिर शासन द्वारा निर्धारित मोबाईल नंबरों पर संपर्क कर देश एवं मानव जगत पर आई विपदा से लडने में शासन और सरकारों का हाथ हम बटा अपनी अपने स्वजन-प्रियजनों की जीवन और स्वास्थ्य की रक्षा कर सकते है। आज यह हर सजग मानव को समझने और अपने प्रियजन, सज्जन, मित्रगण, पहचान वालों को समझाने वाली बात होना चाहिए। क्योंकि खुद की रक्षा और सुरक्षा में ही अपने परिजन, समाजजन और राष्ट्र की सुरक्षा है। सत्ता, सरकारें जो भी संभव है या हो सकता है उसके तहत वह व्यवस्था व संसाधन उपलब्ध करा लोगों के जीवन को सुरक्षित करने के प्रयास में जुटी है। हमारा धर्म और कर्म है कि हम भी शासन सरकारों के निर्देशानुसार अपने कत्र्तव्यों का निर्वहन करें तभी हम कोरोना जैसी महामारी से जंग जीत पायेंगे।
जय स्वराज

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