खाद, रसद, दवा, पानी, परिवहन सेवा से परेशान मध्यप्रदेश मुख्यमंत्री उतरे सडकों पर प्रधानमंत्री की सीख और कोरोना के कहर से बेखबर, म.प्र. शासन जुटा ट्रांसपर पोस्टिंग में
व्ही.एस.भुल्ले
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
भले ही कफ्र्यू के बीच बहुमत सिद्ध कर म.प्र. की सत्ता के मुखिया बने म.प्र. के मुख्यमंत्री भोपाल की सडकों पर उतर आमजन व सेवा में तैनात अधिकारी, कर्मचारियों को ढांढस बधाने में जुटो हो। मगर सरकार बदलते ही आये दिन म.प्र. शासन जिस तरह से ट्रांसपर पोस्टिंग के काम में युद्ध स्तर पर कूद पडा है यह कोरोना के कहर के बीच शर्मनाक ही कहा जायेगा। जबकि पूर्व से पदस्थ अधिकारी पहले से ही म.प्र. के लोगों को सहज पूर्व से रसद, राशन, दवा, पानी, परिवहन सेवा सतत उपलब्ध कराने में अक्षम साबित हो रहे है। ऐसे में नई-नई पोस्टिंग किया जाना अपने आप में शासन और सरकार की मंशा पर सवाल खडे करता है। कौन नहीं जानता कि देश के प्रधानमंत्री ने लाॅकडाउन की घोषणा के साथ ही सरकारों को समझाइस और हिदायत दी थी कि सरकारें कुछ महीने के लिये सारे काम छोडकर सिर्फ और सिर्फ लोगों के स्वास्थ्य और कोरोना के कहर से बचाने में जुटे। मगर ठीक उसके उलट म.प्र. सरकार के पास अभी तक पारदर्शी और प्रभावी ऐसा कोई सिस्टम खडा नहीं हो सका जिसे देख सुनकर कहा जा सके कि म.प्र. में कोरोना से जंग के पुख्ता इंतजाम है। आये दिन ट्रांसपर पोस्टिंग के निकलते आदेश और घरों में बैठ जरूरतमंद चीजों के लिये बिलबिलाती जनता का दर्द यह है कि जिस शासन से उसे सिर्फ अदने-से सहयोग भर की दरकार इस कोरोना को परास्त करने को लेकर है वह अभी भी बैठकें और कागजी घोडें सहित जवानी जमाखर्च में जुटा है।
बेहतर हो कि समय की नजाकत और कोरोना के कहर को दृष्टिगत रखते हुये अब कोरोना से जंग करते अग्रिम पंक्ति के सैनिक हमारे नागरिक जो विगत 7 दिनों से अपने-अपने संसाधनों के साथ बिना पुख्ता हथियार के जंग में जुटे है। कम से कम उनके पीछे खडी सरकारें, शासन उसे रसद और जरूरत का सामान तो पहुंचायें जिससे वह कोरोना से जंग के दौरान जरूरी रसद, दवा, पानी, परिवहन से युद्ध न हार जाये। बात गंभीर है और वक्त भी गंभीर। ऐसे में अगर सरकार और शासन गंभीर नहीं हुआ तो म.प्र. का गांव, गली का गरीब तो जिन्दगी की जंग के साथ कोरोना से जंग भी जीत जायेगा। मगर सरकार और शासन के प्रति उसकी आशा-आकांक्षायें और विश्वास अवश्य हार जायेगा। आज शासन सरकार से जुडे संस्था, संगठन, व्यक्तियों को यह समझने वाली बात होना चाहिए क्योंकि जिस तरह से विश्व के धनाडय, विकसित और महाशक्तिशाली देश कोरोना के आगे घुटने टेकने पर मजबूर है और उनकी बैवसी नजर आती है यह बात किसी को नहीं भूलना चाहिए क्योंकि समूचे जनमानस ही नहीं सरकार और शासन का सामना एक ऐसे आदृश्य दुश्मन से है कि जिसकी ताकत बढने में दिन दो दिन नहीं मिनिट सैंकेंड घंटे ही लगते है। अगर हमारी लापरवाही से कोरोना पैर जमाने में सफल हुआ तो यह समूची मानव सभ्यता के लिये आत्मघाती कदम होगा। शायद इस सच को हमारी सरकारें शासन में बैठे लोग जितनी जल्दी समझ पाये वहीं आज के समय में उनकी सार्थकता सिद्धता होगी।
जय स्वराज
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
भले ही कफ्र्यू के बीच बहुमत सिद्ध कर म.प्र. की सत्ता के मुखिया बने म.प्र. के मुख्यमंत्री भोपाल की सडकों पर उतर आमजन व सेवा में तैनात अधिकारी, कर्मचारियों को ढांढस बधाने में जुटो हो। मगर सरकार बदलते ही आये दिन म.प्र. शासन जिस तरह से ट्रांसपर पोस्टिंग के काम में युद्ध स्तर पर कूद पडा है यह कोरोना के कहर के बीच शर्मनाक ही कहा जायेगा। जबकि पूर्व से पदस्थ अधिकारी पहले से ही म.प्र. के लोगों को सहज पूर्व से रसद, राशन, दवा, पानी, परिवहन सेवा सतत उपलब्ध कराने में अक्षम साबित हो रहे है। ऐसे में नई-नई पोस्टिंग किया जाना अपने आप में शासन और सरकार की मंशा पर सवाल खडे करता है। कौन नहीं जानता कि देश के प्रधानमंत्री ने लाॅकडाउन की घोषणा के साथ ही सरकारों को समझाइस और हिदायत दी थी कि सरकारें कुछ महीने के लिये सारे काम छोडकर सिर्फ और सिर्फ लोगों के स्वास्थ्य और कोरोना के कहर से बचाने में जुटे। मगर ठीक उसके उलट म.प्र. सरकार के पास अभी तक पारदर्शी और प्रभावी ऐसा कोई सिस्टम खडा नहीं हो सका जिसे देख सुनकर कहा जा सके कि म.प्र. में कोरोना से जंग के पुख्ता इंतजाम है। आये दिन ट्रांसपर पोस्टिंग के निकलते आदेश और घरों में बैठ जरूरतमंद चीजों के लिये बिलबिलाती जनता का दर्द यह है कि जिस शासन से उसे सिर्फ अदने-से सहयोग भर की दरकार इस कोरोना को परास्त करने को लेकर है वह अभी भी बैठकें और कागजी घोडें सहित जवानी जमाखर्च में जुटा है। बेहतर हो कि समय की नजाकत और कोरोना के कहर को दृष्टिगत रखते हुये अब कोरोना से जंग करते अग्रिम पंक्ति के सैनिक हमारे नागरिक जो विगत 7 दिनों से अपने-अपने संसाधनों के साथ बिना पुख्ता हथियार के जंग में जुटे है। कम से कम उनके पीछे खडी सरकारें, शासन उसे रसद और जरूरत का सामान तो पहुंचायें जिससे वह कोरोना से जंग के दौरान जरूरी रसद, दवा, पानी, परिवहन से युद्ध न हार जाये। बात गंभीर है और वक्त भी गंभीर। ऐसे में अगर सरकार और शासन गंभीर नहीं हुआ तो म.प्र. का गांव, गली का गरीब तो जिन्दगी की जंग के साथ कोरोना से जंग भी जीत जायेगा। मगर सरकार और शासन के प्रति उसकी आशा-आकांक्षायें और विश्वास अवश्य हार जायेगा। आज शासन सरकार से जुडे संस्था, संगठन, व्यक्तियों को यह समझने वाली बात होना चाहिए क्योंकि जिस तरह से विश्व के धनाडय, विकसित और महाशक्तिशाली देश कोरोना के आगे घुटने टेकने पर मजबूर है और उनकी बैवसी नजर आती है यह बात किसी को नहीं भूलना चाहिए क्योंकि समूचे जनमानस ही नहीं सरकार और शासन का सामना एक ऐसे आदृश्य दुश्मन से है कि जिसकी ताकत बढने में दिन दो दिन नहीं मिनिट सैंकेंड घंटे ही लगते है। अगर हमारी लापरवाही से कोरोना पैर जमाने में सफल हुआ तो यह समूची मानव सभ्यता के लिये आत्मघाती कदम होगा। शायद इस सच को हमारी सरकारें शासन में बैठे लोग जितनी जल्दी समझ पाये वहीं आज के समय में उनकी सार्थकता सिद्धता होगी।
जय स्वराज
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