तीन में से दो पर भाजपा की प्रबल संभावना म.प्र. की सियासी उठापटक का लक्ष्य राज्यसभा, सरकार को कोई खतरा नहीं
वीरेन्द्र भुल्ले
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
जैसे-जैसे म.प्र. की राज्यसभा की तीन सीटों के निर्वाचन का वक्त नजदीक आ रहा है। सियासी उठापटक की गरमाहट स्पष्ट दिखाई दे रही है। अगर अंदर खाने की खबर सही है तो भाजपा नेतृत्व का पहला लक्ष्य म.प्र. की तीन राज्यसभा सीटों में से दो पर जीत हासिल करना हो सकता है। जिस तरह से म.प्र. की कांग्रेस सरकार में उठापटक की दहशत पैदा कर राज्यसभा चुनावों का रास्ता मिल-जुलकर तय हो रहा है उससे साफ जाहिर है कि भाजपा की नजर सरकार की उठापटक से इतर राज्यसभा की दो सीटों पर ज्यादा है। जिस तरह के बयान और खींचतान कांग्रेस भाजपा के बीच बयानों, बैठकों की बीच आ रही है वह सियासी मंसूबों को समझने वालों को स्वतः सिद्ध होना चाहिए। क्योंकि विगत 20 वर्षो की म.प्र. की सियासत इस बात की गवाह है कि म.प्र. की सियासत किस तरह से स्वार्थवत मंसूबों को पूर्ण करने दलों के प्रति निष्ठा और जबावदेही को दरकिनार कर निभाई जा रही है। देखना होगा कि क्या भाजपा के रणनीतकार अपने मंसूबों में सफल हो पायेंगे है या फिर कांग्रेस आलाकमान के मंसूबे धरे रह जायेंगे।
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
जैसे-जैसे म.प्र. की राज्यसभा की तीन सीटों के निर्वाचन का वक्त नजदीक आ रहा है। सियासी उठापटक की गरमाहट स्पष्ट दिखाई दे रही है। अगर अंदर खाने की खबर सही है तो भाजपा नेतृत्व का पहला लक्ष्य म.प्र. की तीन राज्यसभा सीटों में से दो पर जीत हासिल करना हो सकता है। जिस तरह से म.प्र. की कांग्रेस सरकार में उठापटक की दहशत पैदा कर राज्यसभा चुनावों का रास्ता मिल-जुलकर तय हो रहा है उससे साफ जाहिर है कि भाजपा की नजर सरकार की उठापटक से इतर राज्यसभा की दो सीटों पर ज्यादा है। जिस तरह के बयान और खींचतान कांग्रेस भाजपा के बीच बयानों, बैठकों की बीच आ रही है वह सियासी मंसूबों को समझने वालों को स्वतः सिद्ध होना चाहिए। क्योंकि विगत 20 वर्षो की म.प्र. की सियासत इस बात की गवाह है कि म.प्र. की सियासत किस तरह से स्वार्थवत मंसूबों को पूर्ण करने दलों के प्रति निष्ठा और जबावदेही को दरकिनार कर निभाई जा रही है। देखना होगा कि क्या भाजपा के रणनीतकार अपने मंसूबों में सफल हो पायेंगे है या फिर कांग्रेस आलाकमान के मंसूबे धरे रह जायेंगे।
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