निष्ठापूर्ण, जबावदेह, कत्र्तव्य निर्वहन की मिशाल बनते मुख्यमंत्री उत्तरप्रदेश, दिल्ली, पश्चिम बंगाल, मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री उतरे मैदान में
वीरेन्द्र भुल्ले
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
जब से देश के प्रधानमंत्री ने देश के 130 करोड की आबादी के सामने कोरोना के संभावित खतरे को भाप सम्पूर्ण लाॅकडाउन अतः घरों में रहने की घोषणा की है तभी से उत्तप्रदेश के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ और दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल जबरदस्त एक्शन मोड में दिखे और सरकार की ओर से जो भी व्यवस्थायें संभव हो सकती थी उन्हें पूर्ण करने सारे अमले को जुटा दिया। उसके के बाद जहां सडक पर लोगों को राहत बांटती और ढांढस बंधाती पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बैनर्जी और म.प्र. के नये मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चैहान दिखे। मगर देश की सर्वाधिक आबादी वाले प्रदेश उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री जो जबावदेह निष्ठापूर्ण कत्र्तव्य निर्वहन की जो मिशाल तमाम व्यवस्थाओं के निरीक्षण के साथ स्वयं मौके पर पहुंच यह संदेश समूचे अमले को देने की कोशिश की कि वह कोरोना को लेकर उत्तरप्रदेश सरकार कितनी सजग और समर्पित है। सबसे पहले प्रदेश के गरीब, मजदूर और संक्रमित लोगों की चिन्ता कर उनके चिकित्सीय संसाधन और मजदूरों, किसानों के लिये खादय रसद के साथ नगद राशि की जो व्यवस्था कराई गई वह काबिले गौर है। मगर जिस तरह से दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द्र केजरीवाल ने आम गरीब, मजदूरों की परेशानी को ध्यान में रख जिस तरह की नगद राहत राशि खाने की व्यवस्था की उससे अन्य प्रदेशों को सीख लेना चाहिए।
ये अलग बात है कि आबादी और भूभाग के मामले में दिल्ली प्रदेश छोटा है मगर छोटी-छोटी बातों से अन्य प्रदेशों के मुख्यमंत्री भी इस महा संकट से उबरने की सीख ले सकते है। जिस तरह से देश के सबसे बडे प्रदेश उत्तरप्रदेश में घूम-घूम कर और मौके पर पहुंच मुख्यमंत्री आदित्यनाथ अपने निष्ठापूर्ण कत्र्तव्य निर्वहन की मिशाल पूरे भारतवर्ष में प्रस्तुत कर रहे है। यहीं सच्ची और समर्पित सत्ताओं की मिशालें बनी है। ये अलग बात है कि म.प्र. के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह भी मौजूद संसाधनों के बीच लोगों से संवाद बना ढांढस बधाने में जुटे, तो दूसरी ओर ऐसी जरूरी व्यवस्थायें भी जिससे लोगों को रसद, पानी नियमित मिलता रहे और आर्थिक परेशानी भी आम गरीबों को न हो उसके लिये गरीबों के खाते में नगद राशि के साथ खादन्न दवा उपलब्ध कराने की व्यवस्था करने के निर्देश दिये है। काश इस सकंट की घडी से लोग बेहतर सीख लें अपने घरों में ही रहे और स्वयं व अपने परिवारों को कोरोना जैसी महामारी से बचाने में स्वयं का योगदान सत्ताओं की तरह अपने भी कत्र्तव्य निर्वहन की मिशाल प्रस्तुत करें जो उसका कत्र्तव्य भी है और घर का मुखिया होने के नाते धर्म भी।
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
जब से देश के प्रधानमंत्री ने देश के 130 करोड की आबादी के सामने कोरोना के संभावित खतरे को भाप सम्पूर्ण लाॅकडाउन अतः घरों में रहने की घोषणा की है तभी से उत्तप्रदेश के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ और दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल जबरदस्त एक्शन मोड में दिखे और सरकार की ओर से जो भी व्यवस्थायें संभव हो सकती थी उन्हें पूर्ण करने सारे अमले को जुटा दिया। उसके के बाद जहां सडक पर लोगों को राहत बांटती और ढांढस बंधाती पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बैनर्जी और म.प्र. के नये मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चैहान दिखे। मगर देश की सर्वाधिक आबादी वाले प्रदेश उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री जो जबावदेह निष्ठापूर्ण कत्र्तव्य निर्वहन की जो मिशाल तमाम व्यवस्थाओं के निरीक्षण के साथ स्वयं मौके पर पहुंच यह संदेश समूचे अमले को देने की कोशिश की कि वह कोरोना को लेकर उत्तरप्रदेश सरकार कितनी सजग और समर्पित है। सबसे पहले प्रदेश के गरीब, मजदूर और संक्रमित लोगों की चिन्ता कर उनके चिकित्सीय संसाधन और मजदूरों, किसानों के लिये खादय रसद के साथ नगद राशि की जो व्यवस्था कराई गई वह काबिले गौर है। मगर जिस तरह से दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द्र केजरीवाल ने आम गरीब, मजदूरों की परेशानी को ध्यान में रख जिस तरह की नगद राहत राशि खाने की व्यवस्था की उससे अन्य प्रदेशों को सीख लेना चाहिए।ये अलग बात है कि आबादी और भूभाग के मामले में दिल्ली प्रदेश छोटा है मगर छोटी-छोटी बातों से अन्य प्रदेशों के मुख्यमंत्री भी इस महा संकट से उबरने की सीख ले सकते है। जिस तरह से देश के सबसे बडे प्रदेश उत्तरप्रदेश में घूम-घूम कर और मौके पर पहुंच मुख्यमंत्री आदित्यनाथ अपने निष्ठापूर्ण कत्र्तव्य निर्वहन की मिशाल पूरे भारतवर्ष में प्रस्तुत कर रहे है। यहीं सच्ची और समर्पित सत्ताओं की मिशालें बनी है। ये अलग बात है कि म.प्र. के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह भी मौजूद संसाधनों के बीच लोगों से संवाद बना ढांढस बधाने में जुटे, तो दूसरी ओर ऐसी जरूरी व्यवस्थायें भी जिससे लोगों को रसद, पानी नियमित मिलता रहे और आर्थिक परेशानी भी आम गरीबों को न हो उसके लिये गरीबों के खाते में नगद राशि के साथ खादन्न दवा उपलब्ध कराने की व्यवस्था करने के निर्देश दिये है। काश इस सकंट की घडी से लोग बेहतर सीख लें अपने घरों में ही रहे और स्वयं व अपने परिवारों को कोरोना जैसी महामारी से बचाने में स्वयं का योगदान सत्ताओं की तरह अपने भी कत्र्तव्य निर्वहन की मिशाल प्रस्तुत करें जो उसका कत्र्तव्य भी है और घर का मुखिया होने के नाते धर्म भी।
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