तीरंदाज..............? म.प्र. में मचा सियासी मंथन अंत की ओर बढते सियासी षडयंत्र, गांव, गली, गरीब, गौवंश की हाय न ले डूबे स्वार्थवत सियासत और सियासी महत्वकांक्षायें
व्ही.एस.भुल्ले
भैया- मने तो लागे कि अब म.प्र. में षडयंत्रपूर्ण सियासत का अंत होने वाला है। म्हारे को तो डर है कि कहीं गांव, गली, गरीब गौवंश की हाय स्वार्थवत सियासी षडयंत्रों को न ले डूबे। क्योंकि स्वार्थवत सियासी महत्वकांक्षायें फिलहाल म.प्र. में सर चढकर बोल रही है। जिसके चलते जबरदस्त उठा पटक और मंथन की बयार चल रही है। सियासी पंडित 128 की लिस्ट का दावा तो कुछ राज्य सभा में प्रभुत्व तो कुछ सत्ता में भागीदारी को लेकर सियासी मंथन में अपना अमूल्य योगदान देने में जुटे है। काडू बोल्या कि अब तो म.प्र. का निजाम ढोलने वाला है, तो कहीं राज्य सभा में राष्ट्रवादियों का दबदबा हो इसलिए म.प्र. में उठा पटक का खेल खेला जा रहा है। भाया अब तू ही बता कि मने आखिर किसकी सिपारी विकास, सेवा, कल्याण के नाम लू।
भैये- तने बावला शै, कै थारे को मालूम कोणी गांव, गली, गौवंश की सेवा, कल्याण, विकास के बाजार में बेटिंग-इन रीचार्ज का उद्योग म्हारे प्रदेश में हाथों हाथ खडा हो लिया है और होर्स ट्रेडिंग को लेकर सत्ता के गलियारो में बवाल कटा पडा है। भले ही इस मंथन से आशा-आकांक्षाओं को रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य नसीब न हो। मगर सेवा, कल्याण, विकास के नाम स्वयं के घर भरने वालो के खिलाफ काफी बडा मसौदा म्हारे प्रदेश में तैयार हो चुका है। बेरहमी से आशा-आकांक्षाओं को लूटने वालों के बीच अब आरपार की जंग का ऐलान हो चुका है। ऐसे में कौन सत्ता के लिए किसको कहां पटखनी देगा उसकी रणनीति को लेकर दिल्ली बाजार में चर्चाओं का दौर चल रहा है।
भैया- तो क्या हम गांव, गली, गौवंश की आशा-आकांक्षाओं से पटी पडी नाव बीच मझदार में ही स्वार्थवत संघर्ष के बीच डूब जायेगी और सेवा, कल्याण, विकास के नाम आशा-आकांक्षाओं की अर्थी मातमी धुनों के साथ म्हारे प्रदेश की राजधानी की सडकों पर निकाली जायेगी।,
भैये- मुंऐ चुपकर और मौजूद सियासत को नस्तमस्तक कर सम्मान कर इतने पर तो चल जायेगी बरना थारी तो थारी म्हारी भी बेभाव सडक पर स्वार्थवत सिपारी किलरों के हाथों रही-सही कुट जायेगी।
भैया- मने समझ लिया थारा इसारा सत्ता, सियासत जिसकी की भी हो, आशा-आकांक्षाओं की लाशों पर बैठ मने तो अब कोई आवाज नहीं उठाऊंगा। मगर राष्ट्र और इंसानियत में विश्वास रखने वालों को मने तो कभी पीठ नहीं दिखाऊंगा, बोल भैया कैसी रही।
जय स्वराज
भैया- मने तो लागे कि अब म.प्र. में षडयंत्रपूर्ण सियासत का अंत होने वाला है। म्हारे को तो डर है कि कहीं गांव, गली, गरीब गौवंश की हाय स्वार्थवत सियासी षडयंत्रों को न ले डूबे। क्योंकि स्वार्थवत सियासी महत्वकांक्षायें फिलहाल म.प्र. में सर चढकर बोल रही है। जिसके चलते जबरदस्त उठा पटक और मंथन की बयार चल रही है। सियासी पंडित 128 की लिस्ट का दावा तो कुछ राज्य सभा में प्रभुत्व तो कुछ सत्ता में भागीदारी को लेकर सियासी मंथन में अपना अमूल्य योगदान देने में जुटे है। काडू बोल्या कि अब तो म.प्र. का निजाम ढोलने वाला है, तो कहीं राज्य सभा में राष्ट्रवादियों का दबदबा हो इसलिए म.प्र. में उठा पटक का खेल खेला जा रहा है। भाया अब तू ही बता कि मने आखिर किसकी सिपारी विकास, सेवा, कल्याण के नाम लू।भैये- तने बावला शै, कै थारे को मालूम कोणी गांव, गली, गौवंश की सेवा, कल्याण, विकास के बाजार में बेटिंग-इन रीचार्ज का उद्योग म्हारे प्रदेश में हाथों हाथ खडा हो लिया है और होर्स ट्रेडिंग को लेकर सत्ता के गलियारो में बवाल कटा पडा है। भले ही इस मंथन से आशा-आकांक्षाओं को रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य नसीब न हो। मगर सेवा, कल्याण, विकास के नाम स्वयं के घर भरने वालो के खिलाफ काफी बडा मसौदा म्हारे प्रदेश में तैयार हो चुका है। बेरहमी से आशा-आकांक्षाओं को लूटने वालों के बीच अब आरपार की जंग का ऐलान हो चुका है। ऐसे में कौन सत्ता के लिए किसको कहां पटखनी देगा उसकी रणनीति को लेकर दिल्ली बाजार में चर्चाओं का दौर चल रहा है।
भैया- तो क्या हम गांव, गली, गौवंश की आशा-आकांक्षाओं से पटी पडी नाव बीच मझदार में ही स्वार्थवत संघर्ष के बीच डूब जायेगी और सेवा, कल्याण, विकास के नाम आशा-आकांक्षाओं की अर्थी मातमी धुनों के साथ म्हारे प्रदेश की राजधानी की सडकों पर निकाली जायेगी।,
भैये- मुंऐ चुपकर और मौजूद सियासत को नस्तमस्तक कर सम्मान कर इतने पर तो चल जायेगी बरना थारी तो थारी म्हारी भी बेभाव सडक पर स्वार्थवत सिपारी किलरों के हाथों रही-सही कुट जायेगी।
भैया- मने समझ लिया थारा इसारा सत्ता, सियासत जिसकी की भी हो, आशा-आकांक्षाओं की लाशों पर बैठ मने तो अब कोई आवाज नहीं उठाऊंगा। मगर राष्ट्र और इंसानियत में विश्वास रखने वालों को मने तो कभी पीठ नहीं दिखाऊंगा, बोल भैया कैसी रही।
जय स्वराज
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