अभी भी न चेते तो फिर पछताना होगा समृद्ध समाज और सत्ताओं को

मुख्य संयोजक स्वराज
जिस तरह से प्रधानमंत्री के आव्हान पर देश की 130 करोड के लगभग आबादी अपने घरों में और शासन में तैनात जनसेवा में जुटे लोग सडकों पर तैनात है उससे इतना तो स्पष्ट है कि जीत हमारी ही होगी। बैसे भी स्वराज का लक्ष्य ऐसे ही निष्ठापूर्ण कत्र्तव्य निर्वहन को लेकर रहा है जो कोरोना जैसी महामारी से लडने में आज ब्राहामास्त्र साबित हो रहा है। 
ज्ञात हो कि कोरोना की गंभीरता को समझ स्वराज के मुख्य संयोजक ने 16 मार्च के अपने आलेख में यह सलाह मशवरा सत्ता और सरकारों को दिया था कि कोरोना की भयाभयता को देख मौजूद संसाधनों के मद्देजनर तत्काल राष्ट्रीय, प्रादेशिक, जिला नगर, कस्बों की सीमाऐं सील कर आबादी से दूर एक अलग चिकित्सा सेवा जांच, शोध केन्द्र बनाया जाये जिसमें चिकित्सीय सुविधा त्रिस्तरीय हो और उस राष्ट्रीय सेन्टर को एयर टेक्सियों से लैस किया जाये जिससे देश में कहीं पर भी कोरोना से ग्रषित या संभावित व्यक्ति की सूचना मिले तो उसे तत्काल एयर एम्बुलेंस के माध्यम से मौजूद आबादी से दूर उस राष्ट्रीय चिकित्सीय केन्द्र पहुंचा उसकी जांच कर उसे चिकित्सीय लाभ दिया जा सके। मगर दुर्भाग्य कि 16 मार्च से 7वें दिन अर्थात 22 मार्च का एक दिन स्-विवेक लाॅकडाउन 24 मार्च से 21 दिन का सम्पूर्ण लाॅकडाउन सुनिश्चित कर पाये। कुछ दिन बाद जब स्वराज संयोजक ने सत्ता सरकारों से जुडे लोगों को अपनी भावनाओं के माध्यम से यह मशवरा समाचार के रूप में सोशल मीडिया पर दिया कि एक राष्ट्रीय कट्रोल रूम प्रदेश में प्रादेशिक व जिले में जिले की कंट्रोल रूम स्थापित जो स्वास्थ्य सुरक्षा एवं रसद, दवा, पानी की व्यवस्था करने तैनात हो। साथ ही प्रदेश एवं जिले की सीमा पर स्क्रीनिंग टीमों की तैनाती के साथ एम्बुलेंसों की व्यवस्था भी हो जिससे 100 फीसद लाॅकडाउन का पालन सुनिश्चित हो। वहीं जिला प्रदेश एवं राष्ट्रीय स्तर पर सुबह शाम कोरोना की स्थिति को लेकर वैद्याानिक बुलेटिन ब्रीफ हो जिससे 100 फीसद यह सुनिश्चित हो सके कि रोजाना की स्थिति क्या है। वहीं आज जब समाचार चैनलों में रूस के राष्ट्रपति ने अपने राष्ट्र में 100 फीसद लाॅकडाउन सख्ती से लागू करने तथा आबादी से दूर पार्को में टेन्ट लगाकर तत्काल कोरोना पीडितों की चिकित्सीय सुविधा की घोषणा की इससे जाहिर होता है कि विदेशों में मौजूद सत्ता सरकारों का तंत्र इतना मजबूत है। हालांकि ये अलग बात है कि अब हमारे देश में भी केन्द्रिय स्तर पर व कुछ प्रदेशों में डेली सुबह शाम व्यवस्था एवं कोरोना की स्थिति को लेकर ब्रीफिंग हो रही है। मगर अभी तक हम देश भर में आबादी से दूर एक ऐसा स्थान स्थापित करने में अक्षम असफल हो रहे है जहां देश भर में मौजूद संक्रमित या संभावित कोरोना पीडितों को रख इकजाई कोरोना से सीधे सामना करने की स्थिति सुनिश्चित कर सके। इसके उलट जिला व प्रदेश स्तरों पर जिस तरह से कोरोना पीडितों का इलाज हो रहा है वह सुखद तो है मगर कोरोना की कमर तोडने और इसे परास्त करने आबादी से दूर पूर्व की भांति जो हमारे धर्म ग्रंथों और इतिहास में मौजूद है खुले मैदान में इससे दो-दो हाथ करने होंगे। जिससे शेष आबादी प्रभावित न हो और कोरोना की बढती चैन को स्थाई रूप से काट परास्त किया जा सके। 
जय स्वराज 

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