13 वर्ष लगे समझने-समझाने में स्वराज के रत्नों की सराहना भय न्याय का पुत्र होता है (प्लेटों)
व्ही.एस.भुल्ले
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
कोरोना के कहर से आज जब समूची मानव सभ्यता भयाक्रान्त है और कोरोना का भय ऐसा कि जिन समाज के रत्नों को मानव जगत में सम्मान मिलना चाहिए था वहीं रत्न मानवीय स्वार्थ अहम, अहंकार का शिकार हो अपनों की ही उपेक्षा और दया के पात्र बन गये थे तो कुछ अपने नैसर्गिक कत्र्तव्य से विमुख हो धन लालसा में दिग भ्रमित हो मानवीय मजबूरी बैवसी को लूट अपने कत्र्तव्यों को कलंकित करने में लगे थे। आज जब समूची मानव सभ्यता पर कोरोना का कहर टूटा है तो ऐसे में कत्र्तव्यनिष्ठ या कत्र्तव्य विमुख सभी भयाक्रान्त है। लोगों को सूझ नहीं रहा कि वह अपने समृद्ध, खुशहाल, बहुमूल्य जीवन की रक्षा कैसे करें।
आज सारा धन अहम अहंकार महत्वकांक्षाऐं, स्वार्थ, सत्तायें चारों खाने चित पडी है। अगर उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को छोड दें शायद ही और कोई मुख्यमंत्री हो जो जगह-जगह पहुंच प्रदेश की व्यवस्थाओं को स्वयं देख रहा हो। ये अलग बात है कि जब समाज के नव रत्नों को स्वराज के मुख्य संयोजक ने पहली मर्तवा 2007 में प्रतीकात्मक नाम कामधेुन वर्ग दें सम्मान करने का संकल्प लें, अपने सीमित संसाधनों के बीच सम्मानित करने का अभियान छेडा। जहां शिक्षक, सैनिक, किसान, मजदूर, उघोगपति, डाॅक्टर, इंजीनियर, विधा से जुडे लोगों को और विद्यवानों को प्रतीकात्मक किया जाता रहा है। ये अलग बात है कि इस तरह के वैचारिक कार्यक्रमों के चलते उन्हें कई मर्तवा हास्य उपवास का भी सामना करना पडा। मगर बगैर विचलित हुये वह स्वराज के साथ आगे बढते रहे। तो वहीं उन्होंने असंगठित क्षेत्र के 60 वर्ष की आयु पूर्ण करने वाले हमारे बुजुर्ग, किसान, मजदूर विभिन्न विधाओं से जुडे नागरिकों तथा पाठशालाओं में अध्ययनरत बच्चों को सम्माननिधि दिलायें जाने को लेकर लगभग दो हजार किलोमीटर की जन-जागरण यात्रा भी की। बहरहाल जब आज कोरोना के भय और उसके कहर से मानव जगत भयाक्रान्त है और सारी सत्तायें, विज्ञान लाचार। ऐसे में सैनिक (पुलिस) पेरामिलिट्री फोर्स, डाॅक्टर (स्वास्थ्य कर्मी) उघोगपति, सफाई-कामगार हमारे मजदूरों के सम्मान की बात देश में होना इस बात की प्रमाणिकता है कि यह वर्ग किसी भी राष्ट्र का कामधेनु वर्ग ही है। जो भले ही अपने जीवोत्पार्जन के लिये संघर्षरत श्रम करता हो, जिस तरह से हजारों वर्ष से हमारा गौवंश निस्वार्थ त्याग कर मानव से बगैर कुछ लिये स्वयं के जीवन निर्वहन के दौरान मानव जगत को स्वस्थ और समृद्ध करता आया है उसी तरह देश का यह वर्ग भी मानव जगत को अपनी सेवायें देता रहा है। जो सर्वकल्याणकारी होता है। जिस तरह से सडक, चिकित्सालयों में या बंद शहरों में हमारे सैनिक (पुलिस) स्वास्थ्यकर्मी, डाॅक्टर, सफाईकर्मी (मजदूर) अपनी जान की परवाह किये बगैर लोगों की जान की रक्षा करने में जुटे है और देश के उघोगपति, समाजसेवी संगठन तनमन धन से भामासा बन दान दे रहे ये प्रमाणिकता है। उनकी राष्ट्र के प्रति जबावदेही और निष्ठापूर्ण कत्र्तव्य निर्वहन के साथ सम्मानित होने की।
निश्चित ही सोशल डिस्टेंस व्यक्ति से व्यक्ति की दूरी घरों में रहकर या सावधानीपूर्वक मास्क पहन हाथों को बार-बार धो कोरोना से मानव संतति बचाने का अभियान चल रहा है स्व-अनुशासन के सिद्धान्त पर है। निश्चित ही जीत हमारी होगी और हम स्वराज के रास्ते सिर्फ कोरोना से ही नहीं जीतेंगे बल्कि समूचे विश्व के सामने एक मजबूत अर्थव्यवस्था बनकर उबरेंगे।
जय स्वराज
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
कोरोना के कहर से आज जब समूची मानव सभ्यता भयाक्रान्त है और कोरोना का भय ऐसा कि जिन समाज के रत्नों को मानव जगत में सम्मान मिलना चाहिए था वहीं रत्न मानवीय स्वार्थ अहम, अहंकार का शिकार हो अपनों की ही उपेक्षा और दया के पात्र बन गये थे तो कुछ अपने नैसर्गिक कत्र्तव्य से विमुख हो धन लालसा में दिग भ्रमित हो मानवीय मजबूरी बैवसी को लूट अपने कत्र्तव्यों को कलंकित करने में लगे थे। आज जब समूची मानव सभ्यता पर कोरोना का कहर टूटा है तो ऐसे में कत्र्तव्यनिष्ठ या कत्र्तव्य विमुख सभी भयाक्रान्त है। लोगों को सूझ नहीं रहा कि वह अपने समृद्ध, खुशहाल, बहुमूल्य जीवन की रक्षा कैसे करें। आज सारा धन अहम अहंकार महत्वकांक्षाऐं, स्वार्थ, सत्तायें चारों खाने चित पडी है। अगर उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को छोड दें शायद ही और कोई मुख्यमंत्री हो जो जगह-जगह पहुंच प्रदेश की व्यवस्थाओं को स्वयं देख रहा हो। ये अलग बात है कि जब समाज के नव रत्नों को स्वराज के मुख्य संयोजक ने पहली मर्तवा 2007 में प्रतीकात्मक नाम कामधेुन वर्ग दें सम्मान करने का संकल्प लें, अपने सीमित संसाधनों के बीच सम्मानित करने का अभियान छेडा। जहां शिक्षक, सैनिक, किसान, मजदूर, उघोगपति, डाॅक्टर, इंजीनियर, विधा से जुडे लोगों को और विद्यवानों को प्रतीकात्मक किया जाता रहा है। ये अलग बात है कि इस तरह के वैचारिक कार्यक्रमों के चलते उन्हें कई मर्तवा हास्य उपवास का भी सामना करना पडा। मगर बगैर विचलित हुये वह स्वराज के साथ आगे बढते रहे। तो वहीं उन्होंने असंगठित क्षेत्र के 60 वर्ष की आयु पूर्ण करने वाले हमारे बुजुर्ग, किसान, मजदूर विभिन्न विधाओं से जुडे नागरिकों तथा पाठशालाओं में अध्ययनरत बच्चों को सम्माननिधि दिलायें जाने को लेकर लगभग दो हजार किलोमीटर की जन-जागरण यात्रा भी की। बहरहाल जब आज कोरोना के भय और उसके कहर से मानव जगत भयाक्रान्त है और सारी सत्तायें, विज्ञान लाचार। ऐसे में सैनिक (पुलिस) पेरामिलिट्री फोर्स, डाॅक्टर (स्वास्थ्य कर्मी) उघोगपति, सफाई-कामगार हमारे मजदूरों के सम्मान की बात देश में होना इस बात की प्रमाणिकता है कि यह वर्ग किसी भी राष्ट्र का कामधेनु वर्ग ही है। जो भले ही अपने जीवोत्पार्जन के लिये संघर्षरत श्रम करता हो, जिस तरह से हजारों वर्ष से हमारा गौवंश निस्वार्थ त्याग कर मानव से बगैर कुछ लिये स्वयं के जीवन निर्वहन के दौरान मानव जगत को स्वस्थ और समृद्ध करता आया है उसी तरह देश का यह वर्ग भी मानव जगत को अपनी सेवायें देता रहा है। जो सर्वकल्याणकारी होता है। जिस तरह से सडक, चिकित्सालयों में या बंद शहरों में हमारे सैनिक (पुलिस) स्वास्थ्यकर्मी, डाॅक्टर, सफाईकर्मी (मजदूर) अपनी जान की परवाह किये बगैर लोगों की जान की रक्षा करने में जुटे है और देश के उघोगपति, समाजसेवी संगठन तनमन धन से भामासा बन दान दे रहे ये प्रमाणिकता है। उनकी राष्ट्र के प्रति जबावदेही और निष्ठापूर्ण कत्र्तव्य निर्वहन के साथ सम्मानित होने की।
निश्चित ही सोशल डिस्टेंस व्यक्ति से व्यक्ति की दूरी घरों में रहकर या सावधानीपूर्वक मास्क पहन हाथों को बार-बार धो कोरोना से मानव संतति बचाने का अभियान चल रहा है स्व-अनुशासन के सिद्धान्त पर है। निश्चित ही जीत हमारी होगी और हम स्वराज के रास्ते सिर्फ कोरोना से ही नहीं जीतेंगे बल्कि समूचे विश्व के सामने एक मजबूत अर्थव्यवस्था बनकर उबरेंगे।
जय स्वराज
Comments
Post a Comment