-कोरोना से निर्णायक युद्ध के लिये भावी, प्रभावी कार्य योजना की दरकार -युद्ध स्तर पर तैयार हो कार्य योजना -सुरक्षा, स्वास्थ्य, रसद, पानी, परिवहन, दवा, रोजगार की उपलब्धता हो सुनिश्चित -एक्सन टीम मोड में रहे राष्ट्रीय प्रादेशिक जिला स्तरीय टीम, हाईटेक हो कंट्रौल रूम -राष्ट्रीय प्रादेशिक कोरोना सेन्टरों की आबादी से दूर हो स्थापना
व्ही.एस.भुल्ले
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
राष्ट्रीय प्रादेशिक जिले की सीमाऐं सील होने के साथ सामाजिक दूरी घरों के अन्दर रहने के बावजूद फिलहाल आने वाले दिनों की भावी कार्य योजना की दरकार अब अहम हो चुकी है। हालांकि लाॅकडाउन समाप्त होने की तारीख और समीक्षा की तारीख सुनिश्चित है और देश का प्रदेश का जिलों का समूचा मैदानी अमला सडक पर जो सुरक्षा, स्वास्थ्य, दवा, पानी की व्यवस्था करने मे जुटा है। मगर लाॅकडाउन के बावजूद जिस तरह से कोरोना से संक्रमित लोगों की संख्या देश व विश्व के अन्य देशों में बढ रही है ऐसे में समय का तकाजा है कि हमारी सत्तायें, सरकार, भावी कार्य योजनाओं में समय रहते सुरक्षा, स्वास्थ्य, परिवहन, दवा, पानी, रोजगार को लेकर युद्ध स्तर पर जुट व्यवस्था बनाने की रणनीत तैयार कर लें। जिसके तहत राष्ट्रीय प्रादेशिक जिला स्तर पर सीमाऐं सील की समीक्षा के साथ आबादी से दूर त्रिस्तरीय कोरोना स्वास्थ्य केन्द्रों की स्थापना तथा सुरक्षा, परिवहन, रसद, दवा, पानी, रोजगार सुनिश्चित करने जहां रसद दवा उत्पादन केन्द्रांे से संपर्क बना त्रिस्तरीय कंट्रोल रूमों को और सजग सक्रिय रखने अलग-अलग सेल स्थापित हो। जिससे विगत 24 मार्च से अपने-अपने घरों में बंद सामाजिक दूरी बना कोरोना को परास्त करने में जुटे हमारे 130 करोड नागरिकों की सुरक्षा, स्वास्थ्य, रसद, पानी, दवा, परिवहन, रोजगार की चेन को मजबूत कर जरूरी चीजों की सप्लाई लाईन को मजबूत बना कोरोना की चेन को तोडा जा सके।
अगर आवश्यक हो तो ग्रामीण क्षेत्रों में मनरेगा जैसी योजनाओं के माध्यम से नगद राहत के तहत ग्रीष्मकालीन के दौरान बारिस का पानी रोकने व फलदार वृक्षों के बरसात में रोपित करने नर्सरी के माध्यम से पौध उत्पादन वृक्षारोपण की तैयारी के गड्डे तथा तालाब, स्टाफ डेम कंटूर निर्माण जैसे कार्य सामाजिक दूरी के सिद्धान्त के साथ शुरू किये जा सकते है। तो वहीं शहरी क्षेत्रों में मनरेगा के तहत ही नवीन तालाब निर्माण वृक्षारोपण एवं घर-घर खाने की सामग्री दवा, पानी इत्यादि सप्लाई के माध्यम से रोजगार का सृजन कर सप्लाई लाईन मजबूत की जा सकती है। जिससे जिन लोगों पर नगद आय की कमी आने वाली है उसकी भरपाई की जा सके। तभी हम कोरोना की चेन तोड उसे समूल नष्ट कर सकते है। इसके अलावा अगर शैक्षिणक शस्त्र को भी अगले शिक्षण सत्र के लिये बढा दिया जाये तो यह भी एक माहती कदम हो सकता है। क्योंकि कोरोना से लडने फिलहाल एक दूसरे से सामाजिक दूरी अपने-अपने घरों के अन्दर रहना भी प्रभावी अस्त्र है। यह बात हम सभी को आज की स्थिति में समझने वाली बात होना चाहिए। क्योंकि कोरोना के कहर को देखते हुये हमारी स्वयं की व परिवार, समाज सहित राष्ट्र के जीवन की रक्षा ही हमारा धर्म है और कर्म है। अगर हम अपने प्रधानमंत्री के आव्हान अनुरूप 5 अप्रैल को रात्रि 9 बजे ब्लैक आउट कर दीपक, मोमबत्ती जला या मोबाईल टाॅर्चो की लाईट जला अपनी एकता और सामर्थ का परिचय देते है तो यह देश के 130 करोड लोगों का वह पुरूषार्थ होगा जिसकी चर्चा तो अवश्य इतिहास अंकित होगी ही साथ ही कोरोना से जीत के नजदीक पहचानने का हमारा ऐलान भी होगा।
जय स्वराज
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
राष्ट्रीय प्रादेशिक जिले की सीमाऐं सील होने के साथ सामाजिक दूरी घरों के अन्दर रहने के बावजूद फिलहाल आने वाले दिनों की भावी कार्य योजना की दरकार अब अहम हो चुकी है। हालांकि लाॅकडाउन समाप्त होने की तारीख और समीक्षा की तारीख सुनिश्चित है और देश का प्रदेश का जिलों का समूचा मैदानी अमला सडक पर जो सुरक्षा, स्वास्थ्य, दवा, पानी की व्यवस्था करने मे जुटा है। मगर लाॅकडाउन के बावजूद जिस तरह से कोरोना से संक्रमित लोगों की संख्या देश व विश्व के अन्य देशों में बढ रही है ऐसे में समय का तकाजा है कि हमारी सत्तायें, सरकार, भावी कार्य योजनाओं में समय रहते सुरक्षा, स्वास्थ्य, परिवहन, दवा, पानी, रोजगार को लेकर युद्ध स्तर पर जुट व्यवस्था बनाने की रणनीत तैयार कर लें। जिसके तहत राष्ट्रीय प्रादेशिक जिला स्तर पर सीमाऐं सील की समीक्षा के साथ आबादी से दूर त्रिस्तरीय कोरोना स्वास्थ्य केन्द्रों की स्थापना तथा सुरक्षा, परिवहन, रसद, दवा, पानी, रोजगार सुनिश्चित करने जहां रसद दवा उत्पादन केन्द्रांे से संपर्क बना त्रिस्तरीय कंट्रोल रूमों को और सजग सक्रिय रखने अलग-अलग सेल स्थापित हो। जिससे विगत 24 मार्च से अपने-अपने घरों में बंद सामाजिक दूरी बना कोरोना को परास्त करने में जुटे हमारे 130 करोड नागरिकों की सुरक्षा, स्वास्थ्य, रसद, पानी, दवा, परिवहन, रोजगार की चेन को मजबूत कर जरूरी चीजों की सप्लाई लाईन को मजबूत बना कोरोना की चेन को तोडा जा सके।
अगर आवश्यक हो तो ग्रामीण क्षेत्रों में मनरेगा जैसी योजनाओं के माध्यम से नगद राहत के तहत ग्रीष्मकालीन के दौरान बारिस का पानी रोकने व फलदार वृक्षों के बरसात में रोपित करने नर्सरी के माध्यम से पौध उत्पादन वृक्षारोपण की तैयारी के गड्डे तथा तालाब, स्टाफ डेम कंटूर निर्माण जैसे कार्य सामाजिक दूरी के सिद्धान्त के साथ शुरू किये जा सकते है। तो वहीं शहरी क्षेत्रों में मनरेगा के तहत ही नवीन तालाब निर्माण वृक्षारोपण एवं घर-घर खाने की सामग्री दवा, पानी इत्यादि सप्लाई के माध्यम से रोजगार का सृजन कर सप्लाई लाईन मजबूत की जा सकती है। जिससे जिन लोगों पर नगद आय की कमी आने वाली है उसकी भरपाई की जा सके। तभी हम कोरोना की चेन तोड उसे समूल नष्ट कर सकते है। इसके अलावा अगर शैक्षिणक शस्त्र को भी अगले शिक्षण सत्र के लिये बढा दिया जाये तो यह भी एक माहती कदम हो सकता है। क्योंकि कोरोना से लडने फिलहाल एक दूसरे से सामाजिक दूरी अपने-अपने घरों के अन्दर रहना भी प्रभावी अस्त्र है। यह बात हम सभी को आज की स्थिति में समझने वाली बात होना चाहिए। क्योंकि कोरोना के कहर को देखते हुये हमारी स्वयं की व परिवार, समाज सहित राष्ट्र के जीवन की रक्षा ही हमारा धर्म है और कर्म है। अगर हम अपने प्रधानमंत्री के आव्हान अनुरूप 5 अप्रैल को रात्रि 9 बजे ब्लैक आउट कर दीपक, मोमबत्ती जला या मोबाईल टाॅर्चो की लाईट जला अपनी एकता और सामर्थ का परिचय देते है तो यह देश के 130 करोड लोगों का वह पुरूषार्थ होगा जिसकी चर्चा तो अवश्य इतिहास अंकित होगी ही साथ ही कोरोना से जीत के नजदीक पहचानने का हमारा ऐलान भी होगा।
जय स्वराज

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