सील, सोशल डिस्टेंस के बीच सप्लाई चेन को लेकर बढते सवाल बेहतर समन्वय, प्रबंधन ही दे सकता है समाधान
व्ही.एस.भुल्ले
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
सीमाऐं सील और देश भर में अलग-अलग कोरोना सेन्टर की स्थापना और शोध के अलावा सोशल डिस्टेंसिंग के माध्यम से जो जंग कोरोना से शुरू हुई है निश्चित ही जीत की संभावनाऐं प्रबल है। मगर सप्लाई चेन खासकर राशन, दवा, पानी और रोजगार को लेकर जो सवाल सामने आ रहे है वह कुछ प्रदेशों में काफी डरावने लगते है। खासकर जिस तरह से म.प्र. में कोरोना संक्रमितों की संख्या बढ रही है और समूचा म.प्र. पहले लाॅकडाउन के बाद दूसरे लाॅकडाउन में प्रवेश कर चुका है। ऐसे में सप्लाई लाईन के कमजोर होने और माॅनिरिटरिंग के साथ राज्य और जिला स्तर पर समन्वय के आभाव के चलते कोरोना के बचाव के संसाधन जैसे मास्क, सेनेट्राईजर और सफाई कार्य में या अन्य सामग्री लेते देते वक्त हेंड गिलेब्स को लेकर सवाल है उनके निदान के जबाव जब सन्तोषजनक न हो जबकि ग्राीष्मकाल शुरू हो चुका है और पेयजल के लिये लोगों को दो-चार होना ही पडेगा। वहीं आम गरीब, मजदूर के सामने विगत दो महीने में रोजगार को लेकर आने वाली समस्या भी सामने है।
ये अलग बात है कि म.प्र. के मुख्यमंत्री के अनुसार वह चैबीसों घंटे अपनी टीम के साथ सेवा में जुटे है और उन्होंने एक टास्क फोर्स अपने पार्टी के अध्यक्ष के नेतृत्व में विभिन्न समाजसेवी, संगठन और कुछ अनुवांशिक संगठनों के साथ बना रखा है जो उन्हें बैकफीट दे रहा है लोगों की सेवा कर रहा है। अगर यह सब सही है तो होने वाले सवालों को मिथक ही माने जाना चाहिए। मगर इसके इतर जो हालात म.प्र. में है या नित नये ढंग से सामने आ रहे है उन पर विचार अवश्य होना चाहिए। क्योंकि जिस सिद्धदत्त से देश के प्रधानमंत्री 130 करोड के देश को दिन रात एक कर कोरोना के महासंकट से सुरक्षित निकाल लेना चाहते है। अगर प्रधानमंत्री की मंशा अनुरूप राज्य सरकारें परिणाम नहीं दे पाई तो यह न तो आम नागरिक और न ही जो लोग लाॅकडाउन सोशल डिस्टेंस की तपस्या कर अपने निष्ठापूर्ण कत्र्तव्य निर्वहन में लगे है उनके साथ न्याय हो पायेगा निश्चित ही उत्तरप्रदेश की योगी सरकार ने पूरे देश में एक संवेदनशील समर्पित सरकार की जो मिशाल प्रस्तुत की है वह अन्य प्रदेशों को सीख लेने एक उदाहरण होना चाहिए। बेहतर हो कि समय रहते सप्लाई लाईन म.प्र. में मजबूत हो और म.प्र. जल्द से जल्द कोरोना मुक्त हो।
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
सीमाऐं सील और देश भर में अलग-अलग कोरोना सेन्टर की स्थापना और शोध के अलावा सोशल डिस्टेंसिंग के माध्यम से जो जंग कोरोना से शुरू हुई है निश्चित ही जीत की संभावनाऐं प्रबल है। मगर सप्लाई चेन खासकर राशन, दवा, पानी और रोजगार को लेकर जो सवाल सामने आ रहे है वह कुछ प्रदेशों में काफी डरावने लगते है। खासकर जिस तरह से म.प्र. में कोरोना संक्रमितों की संख्या बढ रही है और समूचा म.प्र. पहले लाॅकडाउन के बाद दूसरे लाॅकडाउन में प्रवेश कर चुका है। ऐसे में सप्लाई लाईन के कमजोर होने और माॅनिरिटरिंग के साथ राज्य और जिला स्तर पर समन्वय के आभाव के चलते कोरोना के बचाव के संसाधन जैसे मास्क, सेनेट्राईजर और सफाई कार्य में या अन्य सामग्री लेते देते वक्त हेंड गिलेब्स को लेकर सवाल है उनके निदान के जबाव जब सन्तोषजनक न हो जबकि ग्राीष्मकाल शुरू हो चुका है और पेयजल के लिये लोगों को दो-चार होना ही पडेगा। वहीं आम गरीब, मजदूर के सामने विगत दो महीने में रोजगार को लेकर आने वाली समस्या भी सामने है। ये अलग बात है कि म.प्र. के मुख्यमंत्री के अनुसार वह चैबीसों घंटे अपनी टीम के साथ सेवा में जुटे है और उन्होंने एक टास्क फोर्स अपने पार्टी के अध्यक्ष के नेतृत्व में विभिन्न समाजसेवी, संगठन और कुछ अनुवांशिक संगठनों के साथ बना रखा है जो उन्हें बैकफीट दे रहा है लोगों की सेवा कर रहा है। अगर यह सब सही है तो होने वाले सवालों को मिथक ही माने जाना चाहिए। मगर इसके इतर जो हालात म.प्र. में है या नित नये ढंग से सामने आ रहे है उन पर विचार अवश्य होना चाहिए। क्योंकि जिस सिद्धदत्त से देश के प्रधानमंत्री 130 करोड के देश को दिन रात एक कर कोरोना के महासंकट से सुरक्षित निकाल लेना चाहते है। अगर प्रधानमंत्री की मंशा अनुरूप राज्य सरकारें परिणाम नहीं दे पाई तो यह न तो आम नागरिक और न ही जो लोग लाॅकडाउन सोशल डिस्टेंस की तपस्या कर अपने निष्ठापूर्ण कत्र्तव्य निर्वहन में लगे है उनके साथ न्याय हो पायेगा निश्चित ही उत्तरप्रदेश की योगी सरकार ने पूरे देश में एक संवेदनशील समर्पित सरकार की जो मिशाल प्रस्तुत की है वह अन्य प्रदेशों को सीख लेने एक उदाहरण होना चाहिए। बेहतर हो कि समय रहते सप्लाई लाईन म.प्र. में मजबूत हो और म.प्र. जल्द से जल्द कोरोना मुक्त हो।
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