राष्ट्रीय आपदा में कोताही पर कार्यवाही सुनिश्चित हो और सेवा में जुटे लोगों का हो सम्मान कोरोना के कहर के बीच मंत्रीमंडल का गठन
व्ही.एस.भुल्ले
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
जिस सिद्धत्त से देश के प्रधानमंत्री और उनकी टीम देश के 130 करोड लोगों को पूरी संवेदनशीलता के साथ कोरोना के कहर से बचाने में जुटी है तो वहीं दूसरी ओर कई जगह सरकार, शासन में कत्र्तव्य निष्ठा को लेकर सवाल भी उठ रहे है। जिस पर प्रधानमंत्री और उनकी समूची टीम को संज्ञान अवश्य लेना चाहिए। जब देश में कोरोना के चलते राष्ट्रीय आपदा के हालात है ऐसे में कुछ प्रदेश, जिलों में न समझपूर्ण निर्णय सारी मेहनत पर पानी फेर सकते है। एक ओर जहां म.प्र. में संक्रमितों का आंकडा डेढ हजार के पार पहुंच गया है, तो वहीं कुछ नये जिलों में संक्रमण की आमद ने म.प्र. को सकते में डाल दिया है। तो वहीं विश्व में कोरोना का शिकार हो एक लाख अधिक लोग अपनी जान गवां चुके ह। मगर इस सब वेखबर कोरोना से निवटने अपने पांच सदस्यीय मंत्रीमंडल का गठन कर नगरीय निकायों और छात्रों की एडमीशन को लेकर पहली बैठक में निर्णय लिये है। मगर समूचा प्रदेश अभी भी उन आंकडों से अनभिज्ञ है कि कोरोना से निवटने कितने संसाधन प्रदेश में चिकित्सीय सुविधा या चिकित्सा सेवा में जुटे लोगों को कोरोना से बचाव के संसाधन उपलब्ध है और कितनी व्यवस्था और जुटाई जाने शेष है। साथ ही जो आम नागरिक घर में रहकर लाॅकडाउन का पालन कर रहे है उनके राशन पानी, दवा या जरूरत पडने पर घर से बाहर निकल रहे है उनके लिये म.प्र. में बचाव संसाधन के रूप में मास्क, गिलब्स, केप या किट बाजार में उपलब्धता क्या है। हालांकि कुछ यक्ष सवालों के साथ समूचा तैनात अमला पूरे जी-जान से कोरोना को परास्त करने में जुटा है, तो वहीं दूसरी ओर सरकार को चाहिए कि वह सत्ता सियासत के आडम्बर से बाहर निकल इतना तो सुनिश्चित कर ले कि जल्द से जल्द कोरोना को काबू कर उसे परास्त किया जा सके। क्योंकि कोरोना कोई साधारण बीमारी अब नहीं रही समूचा विश्व आतंकित है तो लाखों लोग अभी तक जान गवां चुके है कई लाख संक्रमित हो चुके है। ऐसे में देश ही नहीं म.प्र. में बढते संक्रमण के आंकडे कोरोना की भयाभयता को समझने काफी होना चाहिए। अब विचार सत्ता, सरकार और शासन को करना है।
जय स्वराज
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
जिस सिद्धत्त से देश के प्रधानमंत्री और उनकी टीम देश के 130 करोड लोगों को पूरी संवेदनशीलता के साथ कोरोना के कहर से बचाने में जुटी है तो वहीं दूसरी ओर कई जगह सरकार, शासन में कत्र्तव्य निष्ठा को लेकर सवाल भी उठ रहे है। जिस पर प्रधानमंत्री और उनकी समूची टीम को संज्ञान अवश्य लेना चाहिए। जब देश में कोरोना के चलते राष्ट्रीय आपदा के हालात है ऐसे में कुछ प्रदेश, जिलों में न समझपूर्ण निर्णय सारी मेहनत पर पानी फेर सकते है। एक ओर जहां म.प्र. में संक्रमितों का आंकडा डेढ हजार के पार पहुंच गया है, तो वहीं कुछ नये जिलों में संक्रमण की आमद ने म.प्र. को सकते में डाल दिया है। तो वहीं विश्व में कोरोना का शिकार हो एक लाख अधिक लोग अपनी जान गवां चुके ह। मगर इस सब वेखबर कोरोना से निवटने अपने पांच सदस्यीय मंत्रीमंडल का गठन कर नगरीय निकायों और छात्रों की एडमीशन को लेकर पहली बैठक में निर्णय लिये है। मगर समूचा प्रदेश अभी भी उन आंकडों से अनभिज्ञ है कि कोरोना से निवटने कितने संसाधन प्रदेश में चिकित्सीय सुविधा या चिकित्सा सेवा में जुटे लोगों को कोरोना से बचाव के संसाधन उपलब्ध है और कितनी व्यवस्था और जुटाई जाने शेष है। साथ ही जो आम नागरिक घर में रहकर लाॅकडाउन का पालन कर रहे है उनके राशन पानी, दवा या जरूरत पडने पर घर से बाहर निकल रहे है उनके लिये म.प्र. में बचाव संसाधन के रूप में मास्क, गिलब्स, केप या किट बाजार में उपलब्धता क्या है। हालांकि कुछ यक्ष सवालों के साथ समूचा तैनात अमला पूरे जी-जान से कोरोना को परास्त करने में जुटा है, तो वहीं दूसरी ओर सरकार को चाहिए कि वह सत्ता सियासत के आडम्बर से बाहर निकल इतना तो सुनिश्चित कर ले कि जल्द से जल्द कोरोना को काबू कर उसे परास्त किया जा सके। क्योंकि कोरोना कोई साधारण बीमारी अब नहीं रही समूचा विश्व आतंकित है तो लाखों लोग अभी तक जान गवां चुके है कई लाख संक्रमित हो चुके है। ऐसे में देश ही नहीं म.प्र. में बढते संक्रमण के आंकडे कोरोना की भयाभयता को समझने काफी होना चाहिए। अब विचार सत्ता, सरकार और शासन को करना है।
जय स्वराज

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