ग्राम सभा में नहीं हो सका शास्त्रार्थ ई-स्वराज और स्वामित्व से सुधार के संकेत

व्ही.एस.भुल्ले
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।

यूं तो पंचायतीराज दिवस पर तकनीकी के माध्यम से सोशल डिस्टेंसिंग को ध्यान में रख कोरोना की हार सुनिश्चित करने देश प्रधान अपने ग्राम प्रधानों से मुखाबित थे जिसमें जहां गांव प्रधानों ने देश प्रधान के साथ कोरोना की महामारी से निवटने ग्राम पंचायत स्तर पर किये गये प्रयासों को सांझा किया, तो वहीं देश प्रधान ने भी कोरोना महामारी की गंभीरता को देखते हुये दो गज की दूरी के सिद्धान्त का पालन करने का आग्रह किया और समस्त देशवासियों तक इस सूत्र को पहुंचाने का आव्हान किया। देश प्रधान ने निश्चित ही प्रयोग के तौर पर देश के 6 राज्यों में शुरू होने वाली माहती योजना के प्रयास का उल्लेख किया, तो दूसरी ओर उन्होंने ई-ग्राम स्वराज के पोर्टल पर सभी जानकारी और ग्राम विकास की स्थिति जानने-पहचानने का अच्छा अवसर बताया। वहीं स्वामित्व योजना को गांवों में होने वाले विकास और वाद-विवाद निवटारे का माध्यम बताया। 
देश को उम्मीद थी कि भारत की आत्मा कहे जाने वाले गांवों के प्रधानों के साथ देश के प्रधान के सामने देश की दशा-दिशा को लेकर शास्त्रार्थ होगा। मगर समय की कमी ने ऐसा होने नहीं दिया। निश्चित ही ऐसे समय पर अगर मौजूद समस्या गिरती अर्थव्यवस्था और नवभारत निर्माण में गांवों के अनुभव उनके ज्ञान-विज्ञान, संस्कृति, संस्कारों को लेकर शास्त्रार्थ होता, तो निश्चित ही 130 करोड की जनसंख्या वाले इस महान देश में एक नई संस्कृति सूत्रपात अवश्य होता। बहरहाल ई-ग्राम स्वराज पोर्टल और स्वामित्व योजना प्रभावी मूलमंत्र देश की दशा और दिशा सुधारने में माहती साबित हो सकती है। अगर इनका क्रियान्वयन कुछ संशोधनों के साथ प्रभावी रूप से हो पाये। क्योंकि
न तो समस्यायें कोरोना के आने के पूर्व कम थी और न ही कोरोना के सानिध्य में कम होने वाली है। जरूरत सिंगल विन्डो समाधान की है जो सिर्फ शास्त्रार्थ के व्यवहारिक अनुभव से ही प्राप्त हो सकता है। 

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