कोरोना के साथ अर्थव्यवस्था को भी बनाये रखना अहम आर्थिक महाशक्ति बनने में सार्थक सार्थी साबित होगा स्वराज
व्ही.एस.भुल्ले
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
अब जबकि लाॅकडाउन के खत्म होने की या और बढाये जाने की तारीख में कुछ ही घंटों का समय शेष है और देश के प्रधानमंत्री एक मर्तवा फिर से देश के 130 करोड लोगों को सम्बोधित करने वाले है। ऐसे में 9 हजार से अधिक संक्रमित लोगों की संख्या भी देश के सामने है। संभावना तो विश्व को भी अनेक है और अपने-अपने घरों में बंद रह सोशल डिस्टेंस का पालन करने वालों की अपनी-अपनी अपेक्षायें। ऐसे में देश के प्रधानमंत्री जिनके कंधों पर 130 करोड की आवाम का भार है और विश्व जगत को मदद की अपेक्षा। निश्चित ही भारतवर्ष अनादिकाल से एक ऐसा भूभाग रहा है जिसने न तो अपनी बौद्धिक संपदा और न ही संसाधनों से किसी को निराश किया है और हमारी महान संस्कृति में जीवन की दिनचर्या का भाग भी है कि अगर दरवाजे कोई जरूरतमंद आ जाये तो हम न तो उसे निराश करते है और न ही खाली हाथ छोडते है। मगर यह तो कल ही तय होगा कि जब प्रधानमंत्री देश को सम्बोधित करेंगें। मगर स्वराज का आग्रह है कि यशस्वी प्रधानमंत्री और दिन रात एक कर देश सेवा में जुटी उनकी टीम से कि कोरोना को पस्त करने सील सप्लाई सोशल डिस्टेंस के साथ आय की सप्लाई के मार्ग पर राष्ट्रीय संपदा और लोगों की जरूरतों की पूर्ति हो सके। जब हम सील की बात करते है तो उसका मतलब सुरक्षा और कानून तथा व्यवस्था को लेकर होता है जिसमें राष्ट्रीय प्रादेशिक, जिला, नगर, कस्बा, गांव की सीमाऐं सील होने के साथ जिला, प्रदेश, राष्ट्रीय स्तर पर सीमाओं पर ऐसे चेक पोस्टों से है जहां हर व्यक्ति की सीमा पर ही स्क्रीनिंग हो सके और काम न हो तो लोगों को आने-जाने की अनुमति न हो जिससे सीमा पर ही संक्रमित व्यक्ति को चिन्हित कर एम्बूलेंस के माध्यम से निर्धारित कोरोना सेन्टर चिकित्सा के लिये संक्रमित व्यक्ति को भेजा जा सके।
रहा सवाल सप्लाई का तो सप्लाई में खासकर उन लोगों के लिये जहां टोटल लाॅकडाउन है और लोग अपने-अपने घरों में बंद उनके लिये दवा, आटा, चावल, नमक, तेल और पेयजल सहित कुछ मसालों की पूर्ति घर पर ही हो सके। सप्लाई सुनिश्चित हो उसके लिये जिले से लेकर प्रदेश और राष्ट्र स्तर पर रिटेलर, हाॅलसेलर और उत्पादकों के बीच मांग अनुसार पूर्ति की व्यवस्था समन्वय के साथ सुनिश्चित हो। दूसरी अहम सप्लाई नगद राशि के रूप में व्यक्ति के श्रम से मिली वह राशि हो। जिससे वह उतना व अपने परिवार का जीवन निर्वहन कर सकें और ऐसे में केवल दो ही क्षेत्र कुशल, अकुशल शिक्षित लोगों के लिये मुफीद हो सकते है जिसमें नम्बर एक हाॅम डिलेवरी से जुडे कार्य जो शहरी क्षेत्र में हो सकते है दूसरे ग्रामीण क्षेत्रों में बारिस पूर्व तालाब, स्टाफ डेम, कंटूर निर्माण, नर्सरी, वृक्षारोपण तैयारी, गोदाम निर्माण, पेयजल सप्लाई जैविक खाद निर्माण, गौ पालन या पशु पालन जैसे कार्यो को लिया जा सकता है। जिससे रोजगार में बटने वाली राशि से समूचे देश में बारिश का बडे पैमाने पर जल संग्रहित कर वाटर लेवल बडा बारिश के दौरान फल एवं औषघि वृक्षों का रोपण कार्य किया जा सके वह भी सोशल डिस्टेंस के सिद्धान्त के साथ। जहां तक सोशल डिस्टेंस का सवाल है तो समूचा देश प्रधानमंत्री जी के आव्हान पर उसका पालन कर ही रहा है। मगर इस बीच जो भी बसूली या देनदारी आम नागरिक की हो वह तीन माह के लिये स्थगित कर सरकारों के पास लोगों के पेंडिग पडे छोटे-मोटे भुगतानों की प्रक्रिया जारी रखी जाये जो रोजगारमूलक है अगर इसमें से सुनियोजित तरीके से खासकर सप्लाई लाइन में और रोजगार में अगर परिचय पत्र भी जारी हो, तो पुख्ता व्यवस्था में हमारी यह बडी उपलब्धि होगी।
जय स्वराज
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
अब जबकि लाॅकडाउन के खत्म होने की या और बढाये जाने की तारीख में कुछ ही घंटों का समय शेष है और देश के प्रधानमंत्री एक मर्तवा फिर से देश के 130 करोड लोगों को सम्बोधित करने वाले है। ऐसे में 9 हजार से अधिक संक्रमित लोगों की संख्या भी देश के सामने है। संभावना तो विश्व को भी अनेक है और अपने-अपने घरों में बंद रह सोशल डिस्टेंस का पालन करने वालों की अपनी-अपनी अपेक्षायें। ऐसे में देश के प्रधानमंत्री जिनके कंधों पर 130 करोड की आवाम का भार है और विश्व जगत को मदद की अपेक्षा। निश्चित ही भारतवर्ष अनादिकाल से एक ऐसा भूभाग रहा है जिसने न तो अपनी बौद्धिक संपदा और न ही संसाधनों से किसी को निराश किया है और हमारी महान संस्कृति में जीवन की दिनचर्या का भाग भी है कि अगर दरवाजे कोई जरूरतमंद आ जाये तो हम न तो उसे निराश करते है और न ही खाली हाथ छोडते है। मगर यह तो कल ही तय होगा कि जब प्रधानमंत्री देश को सम्बोधित करेंगें। मगर स्वराज का आग्रह है कि यशस्वी प्रधानमंत्री और दिन रात एक कर देश सेवा में जुटी उनकी टीम से कि कोरोना को पस्त करने सील सप्लाई सोशल डिस्टेंस के साथ आय की सप्लाई के मार्ग पर राष्ट्रीय संपदा और लोगों की जरूरतों की पूर्ति हो सके। जब हम सील की बात करते है तो उसका मतलब सुरक्षा और कानून तथा व्यवस्था को लेकर होता है जिसमें राष्ट्रीय प्रादेशिक, जिला, नगर, कस्बा, गांव की सीमाऐं सील होने के साथ जिला, प्रदेश, राष्ट्रीय स्तर पर सीमाओं पर ऐसे चेक पोस्टों से है जहां हर व्यक्ति की सीमा पर ही स्क्रीनिंग हो सके और काम न हो तो लोगों को आने-जाने की अनुमति न हो जिससे सीमा पर ही संक्रमित व्यक्ति को चिन्हित कर एम्बूलेंस के माध्यम से निर्धारित कोरोना सेन्टर चिकित्सा के लिये संक्रमित व्यक्ति को भेजा जा सके। रहा सवाल सप्लाई का तो सप्लाई में खासकर उन लोगों के लिये जहां टोटल लाॅकडाउन है और लोग अपने-अपने घरों में बंद उनके लिये दवा, आटा, चावल, नमक, तेल और पेयजल सहित कुछ मसालों की पूर्ति घर पर ही हो सके। सप्लाई सुनिश्चित हो उसके लिये जिले से लेकर प्रदेश और राष्ट्र स्तर पर रिटेलर, हाॅलसेलर और उत्पादकों के बीच मांग अनुसार पूर्ति की व्यवस्था समन्वय के साथ सुनिश्चित हो। दूसरी अहम सप्लाई नगद राशि के रूप में व्यक्ति के श्रम से मिली वह राशि हो। जिससे वह उतना व अपने परिवार का जीवन निर्वहन कर सकें और ऐसे में केवल दो ही क्षेत्र कुशल, अकुशल शिक्षित लोगों के लिये मुफीद हो सकते है जिसमें नम्बर एक हाॅम डिलेवरी से जुडे कार्य जो शहरी क्षेत्र में हो सकते है दूसरे ग्रामीण क्षेत्रों में बारिस पूर्व तालाब, स्टाफ डेम, कंटूर निर्माण, नर्सरी, वृक्षारोपण तैयारी, गोदाम निर्माण, पेयजल सप्लाई जैविक खाद निर्माण, गौ पालन या पशु पालन जैसे कार्यो को लिया जा सकता है। जिससे रोजगार में बटने वाली राशि से समूचे देश में बारिश का बडे पैमाने पर जल संग्रहित कर वाटर लेवल बडा बारिश के दौरान फल एवं औषघि वृक्षों का रोपण कार्य किया जा सके वह भी सोशल डिस्टेंस के सिद्धान्त के साथ। जहां तक सोशल डिस्टेंस का सवाल है तो समूचा देश प्रधानमंत्री जी के आव्हान पर उसका पालन कर ही रहा है। मगर इस बीच जो भी बसूली या देनदारी आम नागरिक की हो वह तीन माह के लिये स्थगित कर सरकारों के पास लोगों के पेंडिग पडे छोटे-मोटे भुगतानों की प्रक्रिया जारी रखी जाये जो रोजगारमूलक है अगर इसमें से सुनियोजित तरीके से खासकर सप्लाई लाइन में और रोजगार में अगर परिचय पत्र भी जारी हो, तो पुख्ता व्यवस्था में हमारी यह बडी उपलब्धि होगी।
जय स्वराज
Comments
Post a Comment