कृतज्ञता को कलंकित करता कत्र्तव्य निर्वहन
व्ही.एस.भुल्ले
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
कोरोना से भीषण जंग के बीच अगर सप्लाई लाईन में लीकेज होने या फिर संसाधनों की हेराफेरी की खबरों का चर्चा में आना सही है तो कृतज्ञता को कलंकित करने वाला और कोई दूसरा कत्र्तव्य निर्वहन कोरोना के कहर के बीच हो नहीं सकता। आज जब समूची मानव सभ्यता अपने जीवन के भविष्य को लेकर चिन्तित है और कई जगह वह अपनी जान गंवाने पर मजबूर। ऐसे में कुछ लोगों की कत्र्तव्य विमुखता अपनी जान जोखिम डालकर अपने निष्ठापूर्ण कत्र्तव्य निर्वहन में जुटे लोगों को हतो-उत्साहित करने वाली है। सत्ताओं का राजधर्म ही नहीं उसकी जबावदेही है कि अज्ञानता बस जिस विनाशक संस्कृति को आत्मसात कर जो लोग जीवन के लक्ष्य को लेकर भ्रमित है उन्हें सद मार्ग दिखायें। हालांकि आज की संस्कृति में मौजूद सत्ताओं के लिये यह समझा पाना निश्चित रूप से एक कठिन कार्य है। जहां धन और एश्वर्य को ही लोगों ने समृद्ध, खुशहाल जीवन का उचित मार्ग समझ रखा है। मगर आज जब समूची मानव संस्कृति ही खतरें में है और मानव जीवन संकट में। ऐसे में उन स्वार्थी कत्र्तव्य विमुख लोगों को समझने वाली बात यह होनी चाहिए कि जिस सुखद जीवन के लिये जिस समृद्ध जीवन के लिये जो लोग कोरोना से संघर्ष की लडाई क्षणिक स्वार्थवत अज्ञानता के चलते कमजोर करने में जुटे है उन्हें यह समझ लेना चाहिए कि कोरोना वह संकट है जिसकी हद में आने के बाद दुनिया में मौजूद न तो धन और न ही कोई पावर आडे आने तैयार है। ऐसे में निष्ठापूर्ण सर्वकल्याण के भाव के साथ कत्र्तव्य निर्वहन ही वह मार्ग है जो हर एक के जीवन को सुरक्षित समृद्ध बना सकता है।
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
कोरोना से भीषण जंग के बीच अगर सप्लाई लाईन में लीकेज होने या फिर संसाधनों की हेराफेरी की खबरों का चर्चा में आना सही है तो कृतज्ञता को कलंकित करने वाला और कोई दूसरा कत्र्तव्य निर्वहन कोरोना के कहर के बीच हो नहीं सकता। आज जब समूची मानव सभ्यता अपने जीवन के भविष्य को लेकर चिन्तित है और कई जगह वह अपनी जान गंवाने पर मजबूर। ऐसे में कुछ लोगों की कत्र्तव्य विमुखता अपनी जान जोखिम डालकर अपने निष्ठापूर्ण कत्र्तव्य निर्वहन में जुटे लोगों को हतो-उत्साहित करने वाली है। सत्ताओं का राजधर्म ही नहीं उसकी जबावदेही है कि अज्ञानता बस जिस विनाशक संस्कृति को आत्मसात कर जो लोग जीवन के लक्ष्य को लेकर भ्रमित है उन्हें सद मार्ग दिखायें। हालांकि आज की संस्कृति में मौजूद सत्ताओं के लिये यह समझा पाना निश्चित रूप से एक कठिन कार्य है। जहां धन और एश्वर्य को ही लोगों ने समृद्ध, खुशहाल जीवन का उचित मार्ग समझ रखा है। मगर आज जब समूची मानव संस्कृति ही खतरें में है और मानव जीवन संकट में। ऐसे में उन स्वार्थी कत्र्तव्य विमुख लोगों को समझने वाली बात यह होनी चाहिए कि जिस सुखद जीवन के लिये जिस समृद्ध जीवन के लिये जो लोग कोरोना से संघर्ष की लडाई क्षणिक स्वार्थवत अज्ञानता के चलते कमजोर करने में जुटे है उन्हें यह समझ लेना चाहिए कि कोरोना वह संकट है जिसकी हद में आने के बाद दुनिया में मौजूद न तो धन और न ही कोई पावर आडे आने तैयार है। ऐसे में निष्ठापूर्ण सर्वकल्याण के भाव के साथ कत्र्तव्य निर्वहन ही वह मार्ग है जो हर एक के जीवन को सुरक्षित समृद्ध बना सकता है।
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