कृतज्ञ मानवता को कलंकित करती, कत्र्तव्य विमुख सेवा प्रमाण-प्रमाणिकता से जूझती आशा-आकांक्षायें सील, सप्लाई, सोशल डिस्टेंस के अचूक अस्त्र से होगा कोरोना का खात्मा

व्ही.एस.भुल्ले
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
आज जब विश्व भर में कोरोना से दो लाख से अधिक मौत और तीस लाख के करीब संक्रमित लोगों की संख्या है वहीं भारतवर्ष में कोरोना संक्रमित लोगों का आंकडा साढे उनत्तीस हजार के पार जा पहुंचा है। जिसमें सर्वाधिक चिन्ता का विषय तो उन पांच राज्यों में है जहां महाराष्ट्र में संक्रमितों की संख्या साढे आठ हजार, गुजरात में साढे तीन हजार, दिल्ली में इक्तीस सौ, राजस्थान में बाईस सौ और मध्यप्रदेश में इक्कीस सौ के पार है यह इस बात का खुला प्रमाण है कि सत्तायें, सरकारें और मौजूद संसाधन कोरोना के कहर के आगे नाकाफी साबित हो रहे है। ऐसे में जरूरत है समूची मानव, सभ्यता के साथ स्वयं अपने प्रियजन, परिवारजन, समाजजन और राष्ट्र-जन के बहुमूल्य जीवन को बचा उनके जीवन को सुरक्षित, संरक्षित करने की है। जिसके लिये हमें व्यक्ति से व्यक्ति, परिवार से परिवार, समाज से समाज और राष्ट्र से राष्ट्र को सील, सप्लाई, सोशल डिस्टेंस का संदेश देना होगा और अपने-अपने नैसर्गिक स्वभाव अनुरूप अपने-अपने निष्ठापूर्ण कत्र्तव्यों का निर्वहन प्रमाण-प्रमाणिकता के साथ करना होगा। 
आज की स्थिाति में हर मानव, इंसान, नागरिक का सबसे बडा धर्म और कर्म होना चाहिए कि वह अपने घर गली, गांव, मझरा, टोला, नगर, कस्बा, जिला, राज्य से लेकर राष्ट्र स्तर तक सील, सप्लाई, सोशल डिस्टेंस अर्थात स्वयं को घरों के अन्दर रहने जैसी संस्कृति, संस्कार, आचरण, व्यवहार स्वच्छता और सतर्कता का पालन करते हुये इसे ढाल बना जीवन निर्वहन के कार्यो को जरूरत अनुसार करने की आदत डालनी होगी, तो वहीं सप्लाई भी जीवन निर्वहन की आवश्यक वस्तुओं की जरूरत अनुसार संकलग्न कर उसे व्यवस्था की मदद से जुटाने की आदत डालनी होगी। रहा सवाल सोशल डिस्टेंस तो व्यक्ति से व्यक्ति की दो गज की दूरी और मास्क, गमछा, तोलिया से मुंह ढक समय-समय पर हाथ सफाई का ध्यान रखते हुये हमें इसकी आदत भी जीवन निर्वहन के दौरान डालनी चाहिए। जीवोत्पार्जन में आवश्यक सामग्री जैसे दवा, राशन, पानी, रोजगार को सहज बनाने में हमें योगदान देना होगा जो कोरोना ही नहीं भविष्य में आने वाली वायरस युक्त बीमारियों से निवटने काफी होगा। जो हमें एक स्वस्थ जीवन ही नहीं एक समृद्ध अर्थव्यवस्था भी देगा। आज के समय में सत्ता और सरकारों को चाहिए कि वह सिर्फ अपने देश भर में ही हर पंचायत, वार्ड स्तर पर मौजूद उचित मूल्य की दुकानों को सप्लाई केन्द्र कर मान या उस केन्द्र के संरक्षण में सप्लाई की खुली व्यवस्था कर केन्द्र स्तर पर मौजूद उचित मूल्य दुकान के सेल्समेन, सरपंच, वार्ड परिषद के मेम्बर, पंच, सचिव, रोजगार सहायक आशा, आगनबाडी कार्यकत्र्ता, शिक्षक, पटवारी, वन-वीट गार्ड, ग्राम कोटवार, पोस्टमेन इत्यादि की समिति बना सप्लाई व्यवस्था को दुरूस्त बना सकती है जो दवा, राशन, पेयजल और रोजगार की जरूरत अनुसार मांग पूर्ति का अन्तर शासन को बता बेहतर व्यवस्था जमा सकते है। चूंकि काम कठिन है मुनाफाखोरी और अर्थ, अलाली का दौर है। मगर श्रेष्ठ मानव का कत्र्तव्य होता है कि उसे कोशिश तो करनी ही चाहिए। कहते है कि पुरूषार्थ ही मानव की पहचान होती है इसलिये हमें उम्मीद अवश्य रखना चाहिए कि हम बेहतर करेंगे और कोरोना को भी परास्त कर उसका खात्मा करने में कामयाब होंगे। 
जय स्वराज

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