शराब बंदी के लिये बेहतर वक्त म.प्र. में कोताई पड सकती है भारी

व्ही.एस.भुल्ले
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
जिस तरह से विगत एक माह से शराब की दुकानों पर ताला पडा है यह कोरोना की जंग में सरकार का सराहनीय कदम है। अगर सरकार इसे शराबबंदी का अस्त्र बना म.प्र. की आम गरीब जनता को इससे मुक्ति दिलाना चाहती तो उससे बेहतर और कोई वक्त नहीं हो सकता। बेहतर हो कि सरकार राजस्व के लालच को छोड शराब से होने वाले स्वास्थ्य नुकसान पर होने वाले खर्च दवा और शराब से होने वाले अपराध, एक्सीडेंट, परिवार उत्पीडन जैसी जघन्य घटनाओं की समीक्षा करे, तो उस खर्च की तुलना में शराब से प्राप्त होने वाला राजस्व ऊंट के मुंह में जीरे के समान होगा। 
तो वहीं दूसरी ओर इन्दौर में बढते कोरोना के मामले और वहां फैले वायरस की गंभीरता को देखते हुये तथा भोपाल में आये दिन मिलते संक्रमितों को ध्यान में रखते हुये म.प्र. सरकार को बडी ही सजगता से काम लेना होगा। क्योंकि जिस ग्लोबल दौर में हम जीने की आदत डाल चुके है उस दौर में म.प्र. के किसी भी जिले से भोपाल, इन्दौर की कनेक्टविटी न तो दूर है और न ही असहज। वहीं जहां इन्दौर एक तरह से म.प्र. की आर्थिक राजधानी है तो वहीं दूसरी ओर भोपाल शासन की राजधानी है। इसलिये गंभीरता और बढ जाती है। जिसके लिये सील, सप्लाई और सोशल डिस्टेंस के सिद्धान्त पर ही सरकार को धैर्यपूर्वक कदम बढाने होंगे। क्योंकि हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि जिस महाराष्ट्र में सर्वाधिक कोरोना के मामले है जो गुजरात दूसरे नंबर पर तथा राजस्थान चैथे नंबर पर है तो वहीं यूपी बुंदेलखण्ड में अब संक्रमितों के मामले सामने आने लगे है जिनकी सीमाऐं सीधे म.प्र. से जुडती है। जरा-सी लापरवाही म.प्र. को बहुत बडे संकट में डाल सकती है। बैसे भी प्रधानमंत्री जी ने कहा है कि सावधानी हटी और र्दुघटना घटी। इसलिये हमें प्रधानमंत्री जी से सीख लेते हुये आगे बढना चाहिए। 

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