लडाई लम्बी हो तो इंतजाम भी पुख्ता हो कोरोना को परास्त करने बदलना होगा जीवन निर्वहन और सरोकारों का तरीका
व्ही.एस.भुल्ले
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
कहते है कभी-कभी व्यक्ति, परिवार समाज, राज्य और राष्ट्र के सरोकार जीवन निर्वहन में इतने स्वार्थवत महत्वकांक्षी हो जाते है या उनके संस्कार सृष्टि, प्रकृति सिद्धान्त स्वभाव के विरूद्ध एक ऐसी नई संस्कृति अज्ञानता बस इजात कर लेते है जो समूचे मानव जीवन को कंटकग्रस्त और कलंकित करने काफी होता है और सभाओं में शास्त्रार्थ ऐसा कि आंखों से न देखने वाला प्राकृतिक सुन्दरता का विराट वर्णन तो कुछ न सुन पाने वाला व्यक्ति अपनी श्रवण शक्ति का प्रदर्शन इस तरह दर्शाता है कि उससे बेहतर श्रवण शक्ति शायद ही और किसी के पास हो। जब शास्त्रार्थपूर्ण सभाओं में महत्वकांक्षी स्वार्थवत लोग झूठ बोलने और चुप रहने में संकोच न करें और अपने मानव स्वभाव के विरूद्ध आचरण करने लगे ऐसे में कल्पना की जा सकती है कि सृष्टि सृजन में होने वाला निष्ठापूर्ण कत्र्तव्य निर्वहन कितना सिद्ध रहने वाला है। जबकि हर विधा सिद्धान्त, संस्कृति, संस्कार में सर्वकल्याण का भाव सर्वोच्च रहा है। आज उसी मार्ग पर जब कुछ राष्ट्र-भक्तों की टोली मानवता की सेवा को निकली है जिन्हें निश्चित ही सफलता और सिद्धता मिलेगी है। ऐसे में तथ्य और यथार्थ को समझना ही सबसे बडी बुद्धिमानी है।
अगर आज विश्व भर में कोरोना की भयाभयता को देख वल्र्ड हेल्थ आॅर्गनाईजेशन की शंका यह है कि कोरोना हम लोगों के साथ ज्यादा समय तक रहने वाला है। वहीं विश्व के चुनिंदा देश दिन रात एक कर कोरोना को जड से नष्ट करने उसे हराने ऐडी-चोटी का जोर लगा कोरोना से बचाव की व्यवस्था चाकचैबंद करने में लगे है। जिसमें खासकर हमारे भारतवर्ष में लाॅकडाउन, सील सप्लाई, सोशल डिस्टेंस के माध्यम से कोरोना से भीषण संघर्ष चल रहा है। ऐसे में भावी रणनीत को सामने रख हमें जीवन निर्वहन के नये सरोकारों और तरीकों को आत्मसात करने बाध्य होना पड सकता है। जो हमारे जैसे मानव जगत के लिये फिलहाल दूर की कोणी हो सकती है। क्योंकि लाॅकडाउन जहां जीवन में कानून का पालन करने स्पष्ट संदेश है तो वहीं सील, सीमाऐं सील करने के साथ हमें सुरक्षित जीवन के लिये उत्साहित करता है। तो वहीं सप्लाई हमारी प्रशासनिक दक्षता और उसके पुख्ता क्रियान्वयन के साथ निष्ठापूर्ण कत्र्तव्य निर्वहन की टाॅप-टू वाॅटम अर्थात ऊपर से नीचे तक की प्रमाणिक मिशाल प्रस्तुत करता है। क्योंकि कौन नहीं जानता कि शासन की राष्ट्र, राज्य, जिला ईकाईयों से लेकर गांव, गली तक पांच से लेकर दस तक क्रियाशील नम्बर यूनिट मौजूद है। अगर यो कहे कि विभिन्न विभागों के प्रति एक हजार पर कम से कम 5 लोग तो वर्तमान में मौजूद है जिनके आधार पर सप्लाई लाईन को मजबूत ही नहीं उसे कारगार परिणाम मूलक बना एक नई व्यवस्था को सिद्ध किया जा सकता है। जिस तरह से प्रधानमंत्री जी ने ई-ग्राम स्वराज पोर्टल के माध्यम से सिद्धान्तः सिद्ध किया है। इस सप्लाई के माध्यम से दवा, खाद, पेयजल, खादन्न और रोजगार की पुख्ता और प्रमाणिक व्यवस्था बन सकती है। सोशल डिस्टेंस जहां हमें स्वस्थ अनुशासित सृष्टि के प्राकृतिक जीवन सिद्धान्त के अनुरूप निष्ठापूर्ण जीवन निर्वहन की प्रेरणा देता है, तो वहीं हमारे जीवन को स्वलंबी बना उसे समतामूलक होने की प्रेरणा भी देता है। जो स्वस्थ समृद्ध जीवन का आधार बनता है। इसलिये अगर हमें कोरोना से लडने और भी कडे निर्णय लेने की आवश्यकता हो तो कोताही नहीं होनी चाहिए। क्योंकि जीवन बहुमूल्य है और कोरोना से आमने-सामने के छिडे भीषण युद्ध में अब हम काफी जीत की दिशा में बढ रहे है। अगर ऐसे में लाॅकडाउन, सील, सप्लाई, सोशल डिस्टेंस के फाॅर्मूले पर पुरूषार्थ हुआ तो निश्चित ही जीत हमारी ही होनी है और वह हमारा नैसर्गिक स्वभाव भी है और भारतवर्ष की पहचान भी। इस जंग में हम कोरोना से ही सिर्फ मुक्त नहीं होंगे बल्कि हम एक ऐसी मजबूत अर्थव्यवस्था कायम करने में भी कामयाब होंगे, जो हमें विश्व गुरू के मार्ग पर आगे बढा हमारा और हमारी आने वाली पीढी का जीवन स्वस्थ समृद्ध, खुशहाल बनाने में समर्थ और सिद्ध होगा।
जय स्वराज
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
कहते है कभी-कभी व्यक्ति, परिवार समाज, राज्य और राष्ट्र के सरोकार जीवन निर्वहन में इतने स्वार्थवत महत्वकांक्षी हो जाते है या उनके संस्कार सृष्टि, प्रकृति सिद्धान्त स्वभाव के विरूद्ध एक ऐसी नई संस्कृति अज्ञानता बस इजात कर लेते है जो समूचे मानव जीवन को कंटकग्रस्त और कलंकित करने काफी होता है और सभाओं में शास्त्रार्थ ऐसा कि आंखों से न देखने वाला प्राकृतिक सुन्दरता का विराट वर्णन तो कुछ न सुन पाने वाला व्यक्ति अपनी श्रवण शक्ति का प्रदर्शन इस तरह दर्शाता है कि उससे बेहतर श्रवण शक्ति शायद ही और किसी के पास हो। जब शास्त्रार्थपूर्ण सभाओं में महत्वकांक्षी स्वार्थवत लोग झूठ बोलने और चुप रहने में संकोच न करें और अपने मानव स्वभाव के विरूद्ध आचरण करने लगे ऐसे में कल्पना की जा सकती है कि सृष्टि सृजन में होने वाला निष्ठापूर्ण कत्र्तव्य निर्वहन कितना सिद्ध रहने वाला है। जबकि हर विधा सिद्धान्त, संस्कृति, संस्कार में सर्वकल्याण का भाव सर्वोच्च रहा है। आज उसी मार्ग पर जब कुछ राष्ट्र-भक्तों की टोली मानवता की सेवा को निकली है जिन्हें निश्चित ही सफलता और सिद्धता मिलेगी है। ऐसे में तथ्य और यथार्थ को समझना ही सबसे बडी बुद्धिमानी है। अगर आज विश्व भर में कोरोना की भयाभयता को देख वल्र्ड हेल्थ आॅर्गनाईजेशन की शंका यह है कि कोरोना हम लोगों के साथ ज्यादा समय तक रहने वाला है। वहीं विश्व के चुनिंदा देश दिन रात एक कर कोरोना को जड से नष्ट करने उसे हराने ऐडी-चोटी का जोर लगा कोरोना से बचाव की व्यवस्था चाकचैबंद करने में लगे है। जिसमें खासकर हमारे भारतवर्ष में लाॅकडाउन, सील सप्लाई, सोशल डिस्टेंस के माध्यम से कोरोना से भीषण संघर्ष चल रहा है। ऐसे में भावी रणनीत को सामने रख हमें जीवन निर्वहन के नये सरोकारों और तरीकों को आत्मसात करने बाध्य होना पड सकता है। जो हमारे जैसे मानव जगत के लिये फिलहाल दूर की कोणी हो सकती है। क्योंकि लाॅकडाउन जहां जीवन में कानून का पालन करने स्पष्ट संदेश है तो वहीं सील, सीमाऐं सील करने के साथ हमें सुरक्षित जीवन के लिये उत्साहित करता है। तो वहीं सप्लाई हमारी प्रशासनिक दक्षता और उसके पुख्ता क्रियान्वयन के साथ निष्ठापूर्ण कत्र्तव्य निर्वहन की टाॅप-टू वाॅटम अर्थात ऊपर से नीचे तक की प्रमाणिक मिशाल प्रस्तुत करता है। क्योंकि कौन नहीं जानता कि शासन की राष्ट्र, राज्य, जिला ईकाईयों से लेकर गांव, गली तक पांच से लेकर दस तक क्रियाशील नम्बर यूनिट मौजूद है। अगर यो कहे कि विभिन्न विभागों के प्रति एक हजार पर कम से कम 5 लोग तो वर्तमान में मौजूद है जिनके आधार पर सप्लाई लाईन को मजबूत ही नहीं उसे कारगार परिणाम मूलक बना एक नई व्यवस्था को सिद्ध किया जा सकता है। जिस तरह से प्रधानमंत्री जी ने ई-ग्राम स्वराज पोर्टल के माध्यम से सिद्धान्तः सिद्ध किया है। इस सप्लाई के माध्यम से दवा, खाद, पेयजल, खादन्न और रोजगार की पुख्ता और प्रमाणिक व्यवस्था बन सकती है। सोशल डिस्टेंस जहां हमें स्वस्थ अनुशासित सृष्टि के प्राकृतिक जीवन सिद्धान्त के अनुरूप निष्ठापूर्ण जीवन निर्वहन की प्रेरणा देता है, तो वहीं हमारे जीवन को स्वलंबी बना उसे समतामूलक होने की प्रेरणा भी देता है। जो स्वस्थ समृद्ध जीवन का आधार बनता है। इसलिये अगर हमें कोरोना से लडने और भी कडे निर्णय लेने की आवश्यकता हो तो कोताही नहीं होनी चाहिए। क्योंकि जीवन बहुमूल्य है और कोरोना से आमने-सामने के छिडे भीषण युद्ध में अब हम काफी जीत की दिशा में बढ रहे है। अगर ऐसे में लाॅकडाउन, सील, सप्लाई, सोशल डिस्टेंस के फाॅर्मूले पर पुरूषार्थ हुआ तो निश्चित ही जीत हमारी ही होनी है और वह हमारा नैसर्गिक स्वभाव भी है और भारतवर्ष की पहचान भी। इस जंग में हम कोरोना से ही सिर्फ मुक्त नहीं होंगे बल्कि हम एक ऐसी मजबूत अर्थव्यवस्था कायम करने में भी कामयाब होंगे, जो हमें विश्व गुरू के मार्ग पर आगे बढा हमारा और हमारी आने वाली पीढी का जीवन स्वस्थ समृद्ध, खुशहाल बनाने में समर्थ और सिद्ध होगा।
जय स्वराज
Comments
Post a Comment