आर्थिक समृद्धि का जरिया बनता लाॅकडाउन 20 का बिन्डल 30 में तो 10 की पुडिया 40 में मिल रही है पसंद-नपसंद का सवाल ही नहीं
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
वाजिब दाम और उत्तम क्वालिटी की लालसा लें भरे बाजारों में खरीददारी करने वालों का आलम यह है कि लाॅकडाउन खुलती दुकानों से रोजमर्रा की खरीददारी के वक्त न तो वाजिब दाम का कोई पैमाना रहा और न ही क्वालिटी की पसंद-नपसंद का। मजे की बात तो यह है कि जिन बिन्डल, पुडिया के आदि को लोगों जो बिन्डल 20 का तो पुडिया 10 रूपये की मिलती थी उनकी कीमत क्रमशः 30 और 40 हो चुकी है। कारण चैपट व्यवस्था इतनी बडी मशीनरी समूचे संसाधन और कानून का डंडा होने के बावजूद बैवसी पर आर्थिक समृद्धि के महल खडा करने वालो का लाॅकडाउन में जो पुरूषार्थ बढा है वह थमने का नाम नहीं ले रहा। बैवस लोग एक ओर तो घरों में बैठ कोरोना से लड रहे है, तो दूसरी ओर पैसे के लिये आदमखोर हो चुके उन लोगों से लड रहे है तो तीसरी ओर सत्ताओं की अकर्मण्यता को निहारने पर मजबूर है।
वाजिब दाम और उत्तम क्वालिटी की लालसा लें भरे बाजारों में खरीददारी करने वालों का आलम यह है कि लाॅकडाउन खुलती दुकानों से रोजमर्रा की खरीददारी के वक्त न तो वाजिब दाम का कोई पैमाना रहा और न ही क्वालिटी की पसंद-नपसंद का। मजे की बात तो यह है कि जिन बिन्डल, पुडिया के आदि को लोगों जो बिन्डल 20 का तो पुडिया 10 रूपये की मिलती थी उनकी कीमत क्रमशः 30 और 40 हो चुकी है। कारण चैपट व्यवस्था इतनी बडी मशीनरी समूचे संसाधन और कानून का डंडा होने के बावजूद बैवसी पर आर्थिक समृद्धि के महल खडा करने वालो का लाॅकडाउन में जो पुरूषार्थ बढा है वह थमने का नाम नहीं ले रहा। बैवस लोग एक ओर तो घरों में बैठ कोरोना से लड रहे है, तो दूसरी ओर पैसे के लिये आदमखोर हो चुके उन लोगों से लड रहे है तो तीसरी ओर सत्ताओं की अकर्मण्यता को निहारने पर मजबूर है।

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