अमानत में खयानत को लेकर खौफजदा कोरोना से लडते लोग
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
भोपाल। जिस तरह से जरूरी संसाधनों के आभाव में कोरोना वोलंटियर या फिर घरों में बंद लोग संसाधनों के आभाव में कोरोना से लडने बैवस मजबूर है उन्हें देखकर नहीं लगता कि पहले से ही कत्र्तव्य विमुख सत्ता संस्थायें अपना पूर्व आचरण छोड मानव अस्तित्व के प्रति निष्ठापूर्ण कत्र्तव्य निर्वहन करना चाहती है। जिस तरह से बिना मास्क लगाये लोग विचरण करते दिख जाते है, तो वहीं बगैर पीपीई किट, हेंड गिलब्स, साधारण मास्क के साथ सेवायें देते नजर आते है उससे साफ हो जाता है कि कत्र्तव्य निष्ठा का पैमाना किस मुकाम पर है। अगर अपुष्ट खबरों की माने तो जिस तरह से म.प्र. में आयुर्वेदिक काडे के पैकेट बांटे जाने की खबरे और राहत सामग्री पहुंचाए जाने की खबरे हवा-हवाई है उन्हें देखकर नहीं लगता कि हमारी सत्ता, सरकारें कोरोना के कहर के बीच बहुत कुछ गंभीर है। देखना होगा कि आखिर कब और कैसे कत्र्तव्यनिष्ठा के भाव में सुधार की गुंजाइस नजर आती है।
भोपाल। जिस तरह से जरूरी संसाधनों के आभाव में कोरोना वोलंटियर या फिर घरों में बंद लोग संसाधनों के आभाव में कोरोना से लडने बैवस मजबूर है उन्हें देखकर नहीं लगता कि पहले से ही कत्र्तव्य विमुख सत्ता संस्थायें अपना पूर्व आचरण छोड मानव अस्तित्व के प्रति निष्ठापूर्ण कत्र्तव्य निर्वहन करना चाहती है। जिस तरह से बिना मास्क लगाये लोग विचरण करते दिख जाते है, तो वहीं बगैर पीपीई किट, हेंड गिलब्स, साधारण मास्क के साथ सेवायें देते नजर आते है उससे साफ हो जाता है कि कत्र्तव्य निष्ठा का पैमाना किस मुकाम पर है। अगर अपुष्ट खबरों की माने तो जिस तरह से म.प्र. में आयुर्वेदिक काडे के पैकेट बांटे जाने की खबरे और राहत सामग्री पहुंचाए जाने की खबरे हवा-हवाई है उन्हें देखकर नहीं लगता कि हमारी सत्ता, सरकारें कोरोना के कहर के बीच बहुत कुछ गंभीर है। देखना होगा कि आखिर कब और कैसे कत्र्तव्यनिष्ठा के भाव में सुधार की गुंजाइस नजर आती है।
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