अव्यवहारिक निर्णयों से असमंजस में राष्ट्र-जन सत्ताओं की व्यवहारिक बुद्धिमता को लेकर उठते सवाल
वीरेन्द्र शर्मा
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
वार्षिक परीक्षाओं के संबंध में केन्द्रीय विद्यालय एवं माध्यमिक विद्यालय स्तर पर जिस तरह से निर्णय लें, लोगों को बताया कि समझाया जा रहा है यह दुर्भाग्यपूर्ण है या यों कहें कि कोरोना को लेकर देशभर में मची होच-पोच और राज्य सत्ताओं के दूर दृष्टा न होने के जो दुष्परिणाम आज आमजन को भोगना पड रहे है वह दर्दनाक ही कहे जायेंगे। माना जाता है कि सत्तायें हमेशा दूरगामी सोच और सार्थक परिणामों की सार्थी और साक्षी रही है। मगर जिस तरह के निर्णय घण्टों-मिनटों में हो रहे है वह न तो कल्याणकारी ही हो सकते है और न ही कोई समाधान दे सकते है। अब इसे सत्ताओं का सौभाग्य कहे या दुर्भाग्य कि आज उनके पास समझ, सोच का इतना अकाल पडा है कि वह सटीक निर्णयों में भी अक्षम, असफल साबित हो रहे है। प्रमाण कुव्यवस्था के रूप में पर्याप्त मौजूद है। बेहतर हो कि कार्य प्रदर्शन में सुधार के साथ सर्वकल्याण का भाव स्पष्ट हो तभी हम इस महासंकट से निकल पायेंगे।
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
वार्षिक परीक्षाओं के संबंध में केन्द्रीय विद्यालय एवं माध्यमिक विद्यालय स्तर पर जिस तरह से निर्णय लें, लोगों को बताया कि समझाया जा रहा है यह दुर्भाग्यपूर्ण है या यों कहें कि कोरोना को लेकर देशभर में मची होच-पोच और राज्य सत्ताओं के दूर दृष्टा न होने के जो दुष्परिणाम आज आमजन को भोगना पड रहे है वह दर्दनाक ही कहे जायेंगे। माना जाता है कि सत्तायें हमेशा दूरगामी सोच और सार्थक परिणामों की सार्थी और साक्षी रही है। मगर जिस तरह के निर्णय घण्टों-मिनटों में हो रहे है वह न तो कल्याणकारी ही हो सकते है और न ही कोई समाधान दे सकते है। अब इसे सत्ताओं का सौभाग्य कहे या दुर्भाग्य कि आज उनके पास समझ, सोच का इतना अकाल पडा है कि वह सटीक निर्णयों में भी अक्षम, असफल साबित हो रहे है। प्रमाण कुव्यवस्था के रूप में पर्याप्त मौजूद है। बेहतर हो कि कार्य प्रदर्शन में सुधार के साथ सर्वकल्याण का भाव स्पष्ट हो तभी हम इस महासंकट से निकल पायेंगे।

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