सशक्त सप्लाई लाईन दे सकती है स्थाई समाधान सील, सप्लाई, सोशल डिस्टेंस स्वच्छता को करना होगा आत्मसात सत्ता सरकारें जो भी रही हो, गरीबी क्यों विलखती है यक्ष सवाल

व्ही.एस.भुल्ले
विलेज टाइम्स समाचार सेवा। 
विश्व भर ही नहीं जिस तरह से भारतवर्ष में कोरोना पैर पसार रहा है इसका स्थाई समाधान सिर्फ और सिर्फ मजबूत सप्लाई की सुनिश्चिता ही दे सकती है। जिसमें स्वराज का मार्ग जीवन निर्वहन में सबसे अचूक अस्त्र है। अगर सील, सप्लाई, सोशल डिस्टेंस स्वच्छता को जीवन निर्वहन में आत्मसात कर लिया जाये तो कोई कारण नहीं कि कोरोना का अस्तित्व भारत में जिन्दा रह सके। आज जब कोरोना महामारी के संकट से समूचा विश्व जूझ रहा है और संक्रमितों की संख्या 25 लाख के पार है। ऐसे में कुछ दिनों से लगभग प्रतिदिन चार हजार के एवरेज से बढते भारत में संक्रमित लोगों की संख्या भी अब 70 हजार के पार जहां पहुंची है। तीसरे लाॅकडाउन के दौर में चल रहे भारतवर्ष में जिस तरह से विभिन्न राज्यों ने लाॅकडाउन बढाने की मांग केन्द्र सरकार से रखी है निश्चित ही केन्द्र और राज्य सरकारों का आपसी समन्वय इस महासंकट से निवटने का कारगार माध्यम माना जा सकता है। मगर जब तक ऊपर से लेकर नीचे तक सप्लाई लाईन सशक्त नहीं हो जाती है तब तक लाॅकडाउन और संक्रमित लोगों की संख्या बढने के आसार प्रबल है। जब हम सील की बात करते है तो इसका मतलब साफ है कि स्वयं को सुरक्षित रखने दैनिक जीवन निर्वहन के दौरान स्वयं को सुरक्षित करना मकान, व्यवसाय स्थल, मजदूरी, नौकरी स्थल को इस तरह से सील कर लेना कि कोरोना छू भी न सके और यह सिर्फ सोशल डिस्टेंस स्वच्छता और सुरक्षा के लिये उपलब्ध मास्क, सेनेट्राईजर और रहने की आवासों की बनावट वस्त्र जूते कवर इत्यदि के माध्यम से की जा सकती है। जहां तक सप्लाई लाईन की बात है तो इसमें सबसे अहम दवा, चिकित्सा सेवा, राशन, जरूरत का सामान शुद्ध पेयजल, बिजली, संचार, बचाव किट, परिवहन जैसे क्षेत्रों में ऊपर से नीचे तक एक स्थाई व्यवस्था गांव, गली से लेकर मेनूफेक्चरिंग उत्पादन सप्लाई केन्द्रों से जोड सुरक्षित परिवहन के माध्यम से की जा सकती है। जिसमें सुरक्षित संसाधन मास्क, सेनेट्राईजर और सेनेट्राइज होने वाले वस्त्रों के साथ पर्याप्त मात्रा में स्क्रीनिंग मशीनों का चलन और कार्य स्थलों को सील के माध्यम से सुरक्षित कर सोशल डिस्टेंस के जीवन निर्वहन के दौरान आत्मसात करना ही होगा। शहरों में आवासीय सुधार के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में आचार-व्यवहार, आवास जीवन निर्वहन के कार्य इस तरह से व्यवस्थित करने होगें जिससे व्यक्ति से व्यक्ति की आवश्यक दूरी तथा लोगों के शरीर को सुरक्षित कर कोरोना को रोका जा सके। जिसमें मौसम अनुसार रोजगार कार्यो की कार्य योजना निर्माण एवं सेवा कार्यो की कार्य योजना सुनिश्चित करनी होगी। जिससे न तो अर्थव्यवस्था प्रभावित होगी और न ही लोगों का रोजगार। जिसमें औषधीय फलदार वृक्षारोपण से लेकर जल संग्रहण सहित दूध प्राप्ति के लिये गौ-पालन जैसे कार्यो के आगे बढाया जा सकता है तथा हस्त शिल्प और पुरानी शिल्प कलाआंे को बढावा दें बहुत हद तक रोजगार के साथ अर्थव्यवस्था को आगे ले जाया जा सकता है। मगर यह तभी संभव है जब सरकारें, संस्थायें और समाज के लोग अपनी जबावदेही सुनिश्चित करते हुये अपने-अपने कत्र्तव्यों का निर्वहन पूरी निष्ठा ईमानदारी से करे, नहीं तो जो हालात वर्तमान में नजर आ रहे है वह बहुत सुखद नहीं कहे जा सकते। सुखद जीवन तो तभी संभव होगा जब लोग स्वराज के मार्ग पर आगे बढे, जो हर मानव को सृष्टि सिद्धान्त अनुरूप स्वच्छंद और स्वस्थ जीवन जीने की प्रेरणा देता है। 

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