मदमुग्ध, अमृत्व हुआ, वेलगाम जीवन से जद्दोहद करती जिन्दगियां
व्ही.एस.भुल्ले
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।

माननीय श्रीमानों आप तो बैसे भी विधि सम्वत समृद्ध, संरक्षित, शक्तिशाली है और हमारा आपके सेवक होने पर अगाद विश्वास, हमारी वोट की और टेक्स के रूप में मिलने वाले अर्थ की शक्ति ने आपको निर्भीक होकर जनसेवा कल्याण के लिये सक्षम, समृद्ध बनाया है। मगर आज जब उन खानाबदोस्सों की स्थिति में कोरोना के चलते सडकों पर हम बदहाल है ऐसे में हमें उम्मीद है कि आप हमारी इस असहनीय पीडा और स्थिति से बाकिब होंगे। जिस रोजगार की चाहत में कभी हमने अपना गांव घर द्वार छोडा और शहरों को हमने दिन रात मेहनत कर आवाद किया तथा समृद्ध शहर नगर होने का रूतवा दिया आज वहीं शहर और वो लोग हमारे लिये अंजान हो चुके है। हमारे पैर के छाले और छालों से हुये घाव इस बात के गवाह है कि भीषण गर्मी में वेहाल हम किस महासंकट को झेलने पर मजबूर है।
माननीय श्रीमानों आपके हाथ में कानून है, सत्ता है, समूचे संसाधन है अगर हम अपनी अक्षुण बुद्धि की माने तो हमारे पास जहाज, रेल, बस वाहनों का बेडा पूरे देश में भरपूर खडा है। लाॅकडाउन के दौर में 70 फीसदी अमला बेकार पडा है यह सही है कि सडे सिस्टम से मजबूत सप्लाई लाईन की उम्मीद हमारे लिये बैमानी साबित हो रही है। ऐसे में हम सुरक्षित अपनी मातृभूति, अपने गांव, अपने घर अपनो के बीच इस महासंकट के दौर में लौट सके यह उम्मीद तो हम कर ही सकते है। क्योंकि जो बडा बदलाव आम तौर पर हम विगत 70 वर्षो में व्यवस्था के अंदर नहीं कर पाये और एक नई संस्कृति से ओतप्रोत संस्कारों से अनभिज्ञ पूरी पीढी हमारे सामने है। हमें बखूबी मालूम है कि जब चुनाव होते है तो वाहनों की उपलब्धता तीन दिन के अंदर समूची हो जाती है और शान्तिपूर्ण मतदान के माध्यम से सरकारें चुन ली जाती। मगर ये सही है कि हम सरकारें चुनने के तो सार्थी है। मगर सत्ताओं से सहज रूप से सेवा कल्याण की खातिर वह सबकुछ करा लें, यह आज की स्थिति में संभव नहीं। मगर हम धन्य है कि आज हम ऐसे लोगों के संरक्षण में अपने निष्ठापूर्ण, कत्र्तव्य निर्वहन के लिये बाध्य है जो सत्ता का अमृत्व प्राप्त मद-मुग्ध हो सेवा कल्याण के कार्य में दिन रात जुटे है और आदेशों के अश्व पर सवार विश्व की मजबूत अर्थव्यवस्था के लिये आत्म निर्भर होने की दिशा में अश्व-मेघ यज्ञ के लिये तैयार है। माननीय श्रीमानों सम्राट, शासक, राजा, महाराजा सत्ता, सरकार का अस्तित्व दीनहीन गरीबों के बीच अनादिकाल से रहा है और आमजन के बीच उनके अपने कुछ खट्टे-मीठे अनुभव भी है। हमारी आपमें पूर्ण आस्था और विश्वास है कि घरों, आॅफिसों में बैठकर आप हमारे आग्रह पर अवश्य विचार करेंगे। हमें आप कुछ करे न करे, कम से कम घर पहुंचने की सुरक्षित व्यवस्था और रोजगार के संसाधन अवश्य उपलब्ध करायेंगे। ऐसी हमारी मान्यता है और आज भी इस दुःख कह घडी में हमें आप से किंचित मात्र कोई शिकायत नहीं। क्योंकि हमारा जन्म ही निष्ठापूर्ण कत्र्तव्य निर्वहन के लिये होता है।
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।

माननीय श्रीमानों आप तो बैसे भी विधि सम्वत समृद्ध, संरक्षित, शक्तिशाली है और हमारा आपके सेवक होने पर अगाद विश्वास, हमारी वोट की और टेक्स के रूप में मिलने वाले अर्थ की शक्ति ने आपको निर्भीक होकर जनसेवा कल्याण के लिये सक्षम, समृद्ध बनाया है। मगर आज जब उन खानाबदोस्सों की स्थिति में कोरोना के चलते सडकों पर हम बदहाल है ऐसे में हमें उम्मीद है कि आप हमारी इस असहनीय पीडा और स्थिति से बाकिब होंगे। जिस रोजगार की चाहत में कभी हमने अपना गांव घर द्वार छोडा और शहरों को हमने दिन रात मेहनत कर आवाद किया तथा समृद्ध शहर नगर होने का रूतवा दिया आज वहीं शहर और वो लोग हमारे लिये अंजान हो चुके है। हमारे पैर के छाले और छालों से हुये घाव इस बात के गवाह है कि भीषण गर्मी में वेहाल हम किस महासंकट को झेलने पर मजबूर है।
माननीय श्रीमानों आपके हाथ में कानून है, सत्ता है, समूचे संसाधन है अगर हम अपनी अक्षुण बुद्धि की माने तो हमारे पास जहाज, रेल, बस वाहनों का बेडा पूरे देश में भरपूर खडा है। लाॅकडाउन के दौर में 70 फीसदी अमला बेकार पडा है यह सही है कि सडे सिस्टम से मजबूत सप्लाई लाईन की उम्मीद हमारे लिये बैमानी साबित हो रही है। ऐसे में हम सुरक्षित अपनी मातृभूति, अपने गांव, अपने घर अपनो के बीच इस महासंकट के दौर में लौट सके यह उम्मीद तो हम कर ही सकते है। क्योंकि जो बडा बदलाव आम तौर पर हम विगत 70 वर्षो में व्यवस्था के अंदर नहीं कर पाये और एक नई संस्कृति से ओतप्रोत संस्कारों से अनभिज्ञ पूरी पीढी हमारे सामने है। हमें बखूबी मालूम है कि जब चुनाव होते है तो वाहनों की उपलब्धता तीन दिन के अंदर समूची हो जाती है और शान्तिपूर्ण मतदान के माध्यम से सरकारें चुन ली जाती। मगर ये सही है कि हम सरकारें चुनने के तो सार्थी है। मगर सत्ताओं से सहज रूप से सेवा कल्याण की खातिर वह सबकुछ करा लें, यह आज की स्थिति में संभव नहीं। मगर हम धन्य है कि आज हम ऐसे लोगों के संरक्षण में अपने निष्ठापूर्ण, कत्र्तव्य निर्वहन के लिये बाध्य है जो सत्ता का अमृत्व प्राप्त मद-मुग्ध हो सेवा कल्याण के कार्य में दिन रात जुटे है और आदेशों के अश्व पर सवार विश्व की मजबूत अर्थव्यवस्था के लिये आत्म निर्भर होने की दिशा में अश्व-मेघ यज्ञ के लिये तैयार है। माननीय श्रीमानों सम्राट, शासक, राजा, महाराजा सत्ता, सरकार का अस्तित्व दीनहीन गरीबों के बीच अनादिकाल से रहा है और आमजन के बीच उनके अपने कुछ खट्टे-मीठे अनुभव भी है। हमारी आपमें पूर्ण आस्था और विश्वास है कि घरों, आॅफिसों में बैठकर आप हमारे आग्रह पर अवश्य विचार करेंगे। हमें आप कुछ करे न करे, कम से कम घर पहुंचने की सुरक्षित व्यवस्था और रोजगार के संसाधन अवश्य उपलब्ध करायेंगे। ऐसी हमारी मान्यता है और आज भी इस दुःख कह घडी में हमें आप से किंचित मात्र कोई शिकायत नहीं। क्योंकि हमारा जन्म ही निष्ठापूर्ण कत्र्तव्य निर्वहन के लिये होता है।
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