बेहाल मजदूरों को कुछ बडा करने की तैयारी सिस्टम दुरूस्त रहा तो संकल्प होगा सार्थक
व्ही.एस.भुल्ले
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
जहान छोड, जान बचाने अपने-अपने घरों को लौट रहे मजदूरों के रोजगार को लेकर लगता है कि म.प्र. सरकार कुछ अधिक गंभीर है। इसलिये कहा जा सकता है कि रोजगार को लेकर म.प्र. में कुछ बडा होने वाला है। ये अलग बात है कि सत्ता के अहंकारी स्वभाव के चलते कभी-कभी सरकारों को वो सार्थकता सफलता सिद्ध नहीं होती जिनके लिये वह संकल्पित हो सेवा कल्याण के लिये अस्तित्व में होती है। अगर ऐसे में सत्ताओं की सेवा और सार्थकता को लेकर कोई सवाल होता है तो इसमें गलती न तो उन सत्ताओं की होती है जो लोकतंत्र की पगडंडियों से होकर सत्ता सिंहासन तक पहुंचती है और न ही सिस्टम से जुडे उन महानुभावों की कोई त्रुटि होती है जिनके लिये आजादी के बाद से लेकर आज तक कोई ऐसा मैकनिजिम खडा नहीं हो सका, न ही व्यवहारिक प्रशिक्षण की व्यवस्था जिससे उसका आचरण, जीवंत और संवेदनशील हो सके। बातें बहुत है मगर जिस तरह की तैयारी रोजगार को लेकर शहरी और ग्रामीण स्तर पर सत्तायें करने में जुटी है खासकर म.प्र., अगर सत्तारूपी अहंकार, सेवा कल्याण के आडे नहीं आया तो निश्चित ही सरकार के के प्रयास सार्थक भी होंगें और सिद्ध भी।
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
जहान छोड, जान बचाने अपने-अपने घरों को लौट रहे मजदूरों के रोजगार को लेकर लगता है कि म.प्र. सरकार कुछ अधिक गंभीर है। इसलिये कहा जा सकता है कि रोजगार को लेकर म.प्र. में कुछ बडा होने वाला है। ये अलग बात है कि सत्ता के अहंकारी स्वभाव के चलते कभी-कभी सरकारों को वो सार्थकता सफलता सिद्ध नहीं होती जिनके लिये वह संकल्पित हो सेवा कल्याण के लिये अस्तित्व में होती है। अगर ऐसे में सत्ताओं की सेवा और सार्थकता को लेकर कोई सवाल होता है तो इसमें गलती न तो उन सत्ताओं की होती है जो लोकतंत्र की पगडंडियों से होकर सत्ता सिंहासन तक पहुंचती है और न ही सिस्टम से जुडे उन महानुभावों की कोई त्रुटि होती है जिनके लिये आजादी के बाद से लेकर आज तक कोई ऐसा मैकनिजिम खडा नहीं हो सका, न ही व्यवहारिक प्रशिक्षण की व्यवस्था जिससे उसका आचरण, जीवंत और संवेदनशील हो सके। बातें बहुत है मगर जिस तरह की तैयारी रोजगार को लेकर शहरी और ग्रामीण स्तर पर सत्तायें करने में जुटी है खासकर म.प्र., अगर सत्तारूपी अहंकार, सेवा कल्याण के आडे नहीं आया तो निश्चित ही सरकार के के प्रयास सार्थक भी होंगें और सिद्ध भी।

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