आशा-आकांक्षाओं का कचूमर कूटता भीडतंत्र कत्र्तव्य विमुखता के कीर्तिमानों से थर्राया जीवन

व्ही.एस.भुल्ले
विलेज टाइम्स समाचार सेवा। 
आजकल सिद्धान्तः न सही व्यवहारिक तौर पर जिस तरह की कत्र्तव्य विमुखता आचरण व्यवहार में घर करती जा रही हो, परिणाम कि आशा-आकांक्षाओं का कचूमर कूटता भीडतंत्र इतना हावी हो चला कि लोग न तो व्यवस्थागत कानून समझने तैयार है और न ही पालनहार कानून का पालन कराने तैयार। हालात ये है कि मन चाहे ढंग से फूटते धमाके और किसी भी शिष्ट पुरूष के खिलाफ अर्नगल बयानबाजी बगैर जाने-सोचे समझे कि उसके कृत्य से जीवन में कौन-कौन से कष्ट संकट उत्पन्न हो सकते है। मगर स्वयं स्वार्थ में डूब जिस तरह का आचरण व्यवहार आज संस्कृति बन संस्कार का भाग बन रहा है वह बडा ही घातक है। उन सत्ता, सरकारों और समाज के लिये जो सेवा कल्याण, विकास को लक्ष्य मान सेवा कल्याण के कार्य में दिन रात जुटी है। काश इस व्यवहारिक सच को हम अपना स्वार्थ छोडा समझ पाये और सत्ता सिंहासन पर बैठे लोग अपने राजधर्म का पालन कर कोई ऐसा सिस्टम खडा कर पाये जहां कानून की सहर्ष मान्यता भी हो और निष्ठापूर्ण तरीके से कानून का पालन भी हो। 

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