म.प्र.ः दुकान खोलने नहीं तैयार शराब ठेकेदार कोरोना के कहर से, कांपी सरकार
वीरेन्द्र शर्मा
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।

कभी लगभग 12 हजार करोड से अधिक धन प्राप्ति का माध्यम रहा म.प्र. में शराब कारोबार फिलहाल संकट में पड गया है। एक ओर जहां शासन शराब ठेकेदारों पर बैठकों के माध्यम से यह दबाव बनाने में लगी है कि जो लोग शराब दुकानों के ठेके या रिन्युवल करा चुके है वह शासन निर्देषों के अनुसार दुकानें खोले, तो वहीं दूसरी ओर वर्ष भर ठेकों की निर्धारित राशि जमा करा चुके ठेकेदार एक माह कोरोना के कहर से बंद दुकानों के चलते होने वाले घाटे के मद्देनजर शराब दुकान खोलने तैयार नहीं है।
अगर अपुष्ट सूत्रों की माने तो म.प्र. के 32 ठेकेदार न्यायालय की शरण में जहां चुके है। अब जबकि केन्द्र सरकार की गाईड लाईन अनुसार म.प्र. सरकार कलेक्टरों के प्रस्ताव पर ग्रीन जाॅन में दुकानें स्थिति अनुसार खोल या नहीं खोल सकती है। ऐसे में ठेकेदारों की शराब दुकानो को खोलने को लेकर मनाही सरकार के सामने एक बडा संकट है। ज्ञात हो कि कोरोना का कहर फिलहाल इतनी जल्द खत्म होने वाला नहीं। ऐसे में कभी शराबबंदी करने की बात करने वाली सरकार क्या निर्णय लेगी यह तो वहीं जाने। मगर बगैर धरना प्रदर्शन और वोट नीति के चलते शराबबंदी का मिला मौका सरकार कैसे भुनाती है देखने वाली बात होगी। मगर डूबते राजस्व के मद्देनजर क्या सरकार फिर से कोई नई शराब नीति लायेगी या फिर इन्ही शराब न खोलने का मन बना चुके शराब ठेकेदारों की शर्तो पर ही शराब दुकानें चलवायेगी।
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।

कभी लगभग 12 हजार करोड से अधिक धन प्राप्ति का माध्यम रहा म.प्र. में शराब कारोबार फिलहाल संकट में पड गया है। एक ओर जहां शासन शराब ठेकेदारों पर बैठकों के माध्यम से यह दबाव बनाने में लगी है कि जो लोग शराब दुकानों के ठेके या रिन्युवल करा चुके है वह शासन निर्देषों के अनुसार दुकानें खोले, तो वहीं दूसरी ओर वर्ष भर ठेकों की निर्धारित राशि जमा करा चुके ठेकेदार एक माह कोरोना के कहर से बंद दुकानों के चलते होने वाले घाटे के मद्देनजर शराब दुकान खोलने तैयार नहीं है।
अगर अपुष्ट सूत्रों की माने तो म.प्र. के 32 ठेकेदार न्यायालय की शरण में जहां चुके है। अब जबकि केन्द्र सरकार की गाईड लाईन अनुसार म.प्र. सरकार कलेक्टरों के प्रस्ताव पर ग्रीन जाॅन में दुकानें स्थिति अनुसार खोल या नहीं खोल सकती है। ऐसे में ठेकेदारों की शराब दुकानो को खोलने को लेकर मनाही सरकार के सामने एक बडा संकट है। ज्ञात हो कि कोरोना का कहर फिलहाल इतनी जल्द खत्म होने वाला नहीं। ऐसे में कभी शराबबंदी करने की बात करने वाली सरकार क्या निर्णय लेगी यह तो वहीं जाने। मगर बगैर धरना प्रदर्शन और वोट नीति के चलते शराबबंदी का मिला मौका सरकार कैसे भुनाती है देखने वाली बात होगी। मगर डूबते राजस्व के मद्देनजर क्या सरकार फिर से कोई नई शराब नीति लायेगी या फिर इन्ही शराब न खोलने का मन बना चुके शराब ठेकेदारों की शर्तो पर ही शराब दुकानें चलवायेगी।
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