गंभीर हालात और सहज सवाल सार्थक समाधान में समझ बनती है मिशाल
व्ही.एस.भुल्ले
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
जिस तरह से विश्व भर में कोरोना का कहर बरपा है और जिस तरह से हमारा देश भी अब इसके शिकंजे की ओर बढ रहा है यह कोई साधारण बात नहीं। मगर कहते है कि समाधान सृष्टि में एक सहज समझ का आधार रहा है और यहीं समझ आज सील, सप्लाई, सोशल डिस्टेंस, स्वच्छता के माध्यम से सार्थक हो सकती है। हो तो इससे पूर्व भी बेहतर हो सकता था मगर कहते है कि समय के आगे बडी-बडी समझ फैल हो जाती है। सील का तात्पर्य स्वयं को दूर रख बंद जैसे वातावरण में रखना सप्लाई का मतलब जीवन बगैर अवरूद्ध हुये चलना और सोशल डिस्टेंस का मतलब व्यक्ति से व्यक्ति की दूरी स्वच्छता से तात्पर्य स्वयं को स्वच्छ रखते हुये हाथ धोना अशुद्ध वायु स्पर्श न करें इसके लिये मुंह को ढकना, अगर मौजूद संसाधनों के बीच ठीक से समझ बन पाये तो निश्चित ही कोरोना क्या किसी भी ऐसे महासंकट से निवटा जा सकता है। काश हमारे समझदार इस सत्य को समझ पाये तो मानव सभ्यता ही नहीं इस सृष्टि के प्रति उनका बडा योगदान होगा।
जय स्वराज
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
जिस तरह से विश्व भर में कोरोना का कहर बरपा है और जिस तरह से हमारा देश भी अब इसके शिकंजे की ओर बढ रहा है यह कोई साधारण बात नहीं। मगर कहते है कि समाधान सृष्टि में एक सहज समझ का आधार रहा है और यहीं समझ आज सील, सप्लाई, सोशल डिस्टेंस, स्वच्छता के माध्यम से सार्थक हो सकती है। हो तो इससे पूर्व भी बेहतर हो सकता था मगर कहते है कि समय के आगे बडी-बडी समझ फैल हो जाती है। सील का तात्पर्य स्वयं को दूर रख बंद जैसे वातावरण में रखना सप्लाई का मतलब जीवन बगैर अवरूद्ध हुये चलना और सोशल डिस्टेंस का मतलब व्यक्ति से व्यक्ति की दूरी स्वच्छता से तात्पर्य स्वयं को स्वच्छ रखते हुये हाथ धोना अशुद्ध वायु स्पर्श न करें इसके लिये मुंह को ढकना, अगर मौजूद संसाधनों के बीच ठीक से समझ बन पाये तो निश्चित ही कोरोना क्या किसी भी ऐसे महासंकट से निवटा जा सकता है। काश हमारे समझदार इस सत्य को समझ पाये तो मानव सभ्यता ही नहीं इस सृष्टि के प्रति उनका बडा योगदान होगा। जय स्वराज
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