स्वकल्याण में बिलखता लोक-कल्याण विधि की आड में पनपती जनधन लूट की प्रवृति
व्ही.एस.भुल्ले
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
जब से विकास, सेवा के नाम पब्लिक, प्रायवेट पार्टनरशिप का मंत्र प्रचलन में क्या आया मानो लोगों को विधि सम्वत जनधन का लूट का लायसन्स मिल गया हो। फिर बात अधोरंचना निर्माण में पुल, सडक, पेयजल, बिजली उपलब्धता को लेकर हो या फिर संचार जैसी सेवासुविधाओं को लेकर सभी दूर एक ही लक्ष्य दिखाई पडता है। स्व-राजनीति और आर्थिक स्थिति चमकाने जिस तरह से गांव, गरीब, पीडित, वंचितों के साथ आर्थिक धोखा देने का जो गोलबंद कारवां शुरू हुआ है वह दिल दहला देने वाला है, न तो इस तरह की योजनाओं का आर्थिक कल्याणकारी लाभ देखा जाता और न ही आम लोगों को मिलने वाली सुविधाओं का पैमाना खोजा जाता है। बल्कि जगह-जगह पब्लिक प्रायवेट पार्टनरशिप के नाम अस्तित्व में आये बसूली के धंधे से आम गरीब की कमर टूटने मजबूर है। चाहे वह रेल लाईनों से जुडे अनुपयोगी योजनायें हो या फिर हाईवे और नेटवर्क मोबाईल सुविधायें सभी दूर सेवा के नाम एकतरफा खेल चल रहा है जिसे राष्ट्र-भक्त, राष्ट्र-जन व जन और राष्ट्र कल्याण में आस्था रखने लोगों को अवश्य देखना चाहिए। अगर यहीं मनमाना क्रम विधि की आड में गोलबंद चलता रहा तो कहीं ऐसा न हो कि आमजन का आक्रोश इतना न बडे कि वह विरोध पर उतारू हो अपनी ही व्यवस्था से बगावत कर दें।
जय स्वराज
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
जब से विकास, सेवा के नाम पब्लिक, प्रायवेट पार्टनरशिप का मंत्र प्रचलन में क्या आया मानो लोगों को विधि सम्वत जनधन का लूट का लायसन्स मिल गया हो। फिर बात अधोरंचना निर्माण में पुल, सडक, पेयजल, बिजली उपलब्धता को लेकर हो या फिर संचार जैसी सेवासुविधाओं को लेकर सभी दूर एक ही लक्ष्य दिखाई पडता है। स्व-राजनीति और आर्थिक स्थिति चमकाने जिस तरह से गांव, गरीब, पीडित, वंचितों के साथ आर्थिक धोखा देने का जो गोलबंद कारवां शुरू हुआ है वह दिल दहला देने वाला है, न तो इस तरह की योजनाओं का आर्थिक कल्याणकारी लाभ देखा जाता और न ही आम लोगों को मिलने वाली सुविधाओं का पैमाना खोजा जाता है। बल्कि जगह-जगह पब्लिक प्रायवेट पार्टनरशिप के नाम अस्तित्व में आये बसूली के धंधे से आम गरीब की कमर टूटने मजबूर है। चाहे वह रेल लाईनों से जुडे अनुपयोगी योजनायें हो या फिर हाईवे और नेटवर्क मोबाईल सुविधायें सभी दूर सेवा के नाम एकतरफा खेल चल रहा है जिसे राष्ट्र-भक्त, राष्ट्र-जन व जन और राष्ट्र कल्याण में आस्था रखने लोगों को अवश्य देखना चाहिए। अगर यहीं मनमाना क्रम विधि की आड में गोलबंद चलता रहा तो कहीं ऐसा न हो कि आमजन का आक्रोश इतना न बडे कि वह विरोध पर उतारू हो अपनी ही व्यवस्था से बगावत कर दें। जय स्वराज
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