सत्ता की सार्गिदी और प्राकृतिक संपदा पर माफियाओं की मशकमार 3 दशक से प्राकृतिक संपदा लूट के अखाडे में तब्दील शिवपुरी में नहीं थम रहा सत्ता सार्गिदों का माफियाराज
वीरेन्द्र शर्मा
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
जिस तरह की खबरें सोशल मीडिया से लेकर टी.व्ही चैनल समाचार पत्रों की सुर्खियां बनी रहती है और सत्ता और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर सरगर्म रहता है यह इस बात का प्रमाण है कि सत्ता किसी की भी हो। मगर अघोषित तौर पर सत्ता सार्गिदों का माफियाराज यथावत बना रहता है। ये अलग बात है कि प्राकृतिक संपदा लूट के वैद्य-अवैध उत्खनन और पत्थर खदानों को लेकर पुलिस और प्रशासनिक कार्यावाहियों का अम्बार कभी-कभी पटा रहता है मगर जैसे ही सत्ता के पद चिन्ह अपने हालात बदलते है सार्गिदों का धंधा भी उसी रूप में आकार लेने आतुर हो जाता है।
अगर अपुष्ट सूत्रों की माने तो जिस तरह से बडे पैमाने पर अवैध उत्खनन के मामलों में सभी स्तरों पर सहमति-असहमति दिखाई पडती और जिस तरह से पनडुब्बियों से लेकर पाॅकलेन मशीनों की धमाचैकडी स्वीकृत जगह से कहीं दूर अवैध उत्खनन में लगी रहती है उन्हें देखकर सिर्फ यहीं कहा जा सकता है कि समरथ को नहीं दोष गंुसाईं। विगत तीन दशक में जो लोग सत्ता में रहे है या कहीं न कहीं औपचारिक-अनौपचारिक रूप से सत्ता से जुडे रहे है। ऐसे अवैध उत्खननकत्र्ताओं को सत्ता का संरक्षण अवश्य ही रहता होगा। तभी तो समूची मीडिया के चीखने चिल्लाने के बावजूद भी कोई कारगार कार्यवाही असंभव-सी जान पडती है। यह आज हर नागरिक को विचारणीय सवाल होना चाहिए।
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
जिस तरह की खबरें सोशल मीडिया से लेकर टी.व्ही चैनल समाचार पत्रों की सुर्खियां बनी रहती है और सत्ता और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर सरगर्म रहता है यह इस बात का प्रमाण है कि सत्ता किसी की भी हो। मगर अघोषित तौर पर सत्ता सार्गिदों का माफियाराज यथावत बना रहता है। ये अलग बात है कि प्राकृतिक संपदा लूट के वैद्य-अवैध उत्खनन और पत्थर खदानों को लेकर पुलिस और प्रशासनिक कार्यावाहियों का अम्बार कभी-कभी पटा रहता है मगर जैसे ही सत्ता के पद चिन्ह अपने हालात बदलते है सार्गिदों का धंधा भी उसी रूप में आकार लेने आतुर हो जाता है। अगर अपुष्ट सूत्रों की माने तो जिस तरह से बडे पैमाने पर अवैध उत्खनन के मामलों में सभी स्तरों पर सहमति-असहमति दिखाई पडती और जिस तरह से पनडुब्बियों से लेकर पाॅकलेन मशीनों की धमाचैकडी स्वीकृत जगह से कहीं दूर अवैध उत्खनन में लगी रहती है उन्हें देखकर सिर्फ यहीं कहा जा सकता है कि समरथ को नहीं दोष गंुसाईं। विगत तीन दशक में जो लोग सत्ता में रहे है या कहीं न कहीं औपचारिक-अनौपचारिक रूप से सत्ता से जुडे रहे है। ऐसे अवैध उत्खननकत्र्ताओं को सत्ता का संरक्षण अवश्य ही रहता होगा। तभी तो समूची मीडिया के चीखने चिल्लाने के बावजूद भी कोई कारगार कार्यवाही असंभव-सी जान पडती है। यह आज हर नागरिक को विचारणीय सवाल होना चाहिए।
Comments
Post a Comment