म.प्र.: विवेकहीन निर्णय और बेरहम सवाल 9 जून से 12वीं की परीक्षा

व्ही.एस.भुल्ले
विलेज टाइम्स समाचार सेवा। 
लगभग 90 फीसद जिलों में पैर पसार नौ हजार के पार कोरोना संक्रमितों के रहते परीक्षा लेने का पुरूषार्थ इतिहास में भले ही एक तारीख के रूप में दर्ज हो। मगर बेरहम सवालों का क्या जो साये की तरह सत्ता से अवश्य यह सवाल करते रहेंगे कि उन मासूमों का गुनाह क्या जो म.ंप्र में कोरोना की उठती लपटों के बीच परीक्षा देने बैवस मजबूर है। आखिर परीक्षा देने वाले भी तो किसी के लाल कलेजे के टुकडे और आंखों के तारे है। हो सकता है कि उनके माँ-बाप की बेजुबान बैवसी लाचार हो, या फिर मजबूर। मगर सेवक सरकार में यह विवेकहीन षडयंत्रपूर्ण निर्णय किसका सामर्थ और किसका पुरूषार्थ है यह तो सत्ता के मुखिया ही जाने। मगर इस निर्णय को लेकर जो आक्रोश आम लोगों में देखने सुनने मिल रहा है और जिस तरह से सोशल मीडिया पर इस निर्णय की आलोचना हो रही है उससे स्पष्ट है कि संवेदनशील सरकार का यह निर्णय कोरोनाकाल में कतई सराहनीय नहीं कहा जा सकता। बेहतर हो कि सत्ता के मुखिया इस निर्णय पर संवेदनशीलता के साथ विचार कर एक ऐसा स्वीकार्य निर्णय दें, जो प्रदेश के भविष्य के लिये सार्थक और सराहनीय कहा जाये।
जय स्वराज   

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