उपचुनाव में आसान न होगी, प्रमुख सियासी दलों की जीत कोरोनाकाल में आमजन के सवाल

वीरेन्द्र शर्मा
विलेज टाइम्स समाचार सेवा। 
जिस तरह से बगैर किसी शोर-शरावे के उपचुनाव की सुगबुहाहट सुन युवाओं के जत्थे सियासत में सक्रिय हो रहे है और वह भी खासकर प्रमुख राजनैतिक दल भाजपा, कांग्रेस जैसे दलों से इतर उसे देखकर नहीं लगता कि प्रमुख राजनैतिक दलों का उपचुनाव में रास्ता इतना आसान रहने वाला। जिस तरह से लोगों ने सोशक और पोशक शब्दों को आधार बना व सेवा कल्याण के नाम स्वयं के स्वार्थ सिद्ध करने वाले दलों के खिलाफ अभियान छेडने का क्रम शुरू किया है उसको जबरदस्त समर्थन मिलने की चर्चाऐं सियासी गलियारों में आजकल सरगर्म है। युवाओं की टोली जिस तरह से मानवीय सरोकारों के साथ लोगों तक अपनी बात पहुंचा और सियासी दलों की पोल खोलने में लगी है उसका भविष्य क्या होगा यह तो फिलहाल भविष्य के गर्भ में है। मगर युवाओं की टोली का जुनून अगर परवान चढा तो सियासी दलों का रास्ता उतना आसान नहीं होगा जितना वह मानकर चल रहे है। चींटी की चाल और सियासत का हाल का नारा फिलहाल तो चर्चाओं में सरगर्म है। देखना होगा कि चींटी की चाल का नारा परवान चढेगा या सत्ता, संसाधन और सियासत से समृद्ध लोगों का कारवां आगे बढेगा। 

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