मानवता के र्दुदांत दुश्मनों के खिलाफ आत्मरक्षार्थ तैयारी के साथ विश्व समुदाय को भी आगाह करना अहम चीन के दुसाहस को स्पष्ट संदेश की दरकार

व्ही.एस.भुल्ले
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।  
भारतीय विरासत और संस्कृति अनुसार भारतवर्ष का आचार-विचार, संस्कार तथा आचरण, व्यवहार हमेशा से सिर्फ भारतवर्ष के परिपेक्ष में ही नहीं बल्कि समूचे विश्व जगत की मानवता की रक्षा और कल्याण का रहा है। आज जब खबरों के अनुसार चीन से निकल समूचे विश्व की मानवता पर कोरोना कहर बनकर टूट रहा है ऐसे में कोरोना के कहर से हलाक मानवता के खिलाफ चीनी सेना का दुस्साहस संघर्ष करते जीवंत और बैवस मानवता के खिलाफ एक जघन्य कृत्य और अक्षम्य अपराध है फिर कारण जो भी रहे हो। ऐसे में विवाद के बहाने भारतीय सैनिकों से चीनी सैनिकों का बगैर हथियार संघर्ष और सैनिकों की शहादतें समूचे विश्व की मानवता पर हमला है। जिसका संज्ञान कोरोना के कहर से हलाक व मानवता में विश्वास रखने वाले समूचे विश्व जगत ही नहीं अन्य राष्ट्रों को भी लेना चाहिए। साथ ही संयुक्त राष्ट्र जैसी संस्था को भी कोरोनाकाल में ऐसे राष्ट्र को भी स्पष्ट संदेश देना चाहिए जो खतरें में पडी विश्व की मानवता को दरकिनार कर अपने स्वार्थपूर्ण मंसूबों को अंजाम देना चाहते है। क्योंकि जिस तरह से समूचा विश्व मानव कल्याण और मानवता के नाम समय-समय पर अपने कत्र्तव्यों के प्रति कटिबद्ध रहता है उसे यह नहीं भूलना चाहिए कि जिन राष्ट्रों में मानवता को धता-बता अमानवीय कृत्य चल रहे है उन पर विराम कोरोनाकाल में सबसे अहम है यह सही है कि गत दिनों चीनी सैनिकों की हरकत से जिस तरह से भारतीय मानवता उसकी संप्रभुता और स्वाभिमान विचलित हुआ है वह मानवता के लिए शुभसंकेत नहीं कहे जा सकते है। क्योंकि हर राष्ट्र की अपनी संप्रभुता सामर्थ और स्वाभिमान होता है। मगर जब उनके मान-सम्मान पर चोट हो तो वह भी खासकर जब वह राष्ट्र जो कोरोना जैसी महामारी से जूझ रहा हो। ऐसे में दुस्साहसपूर्ण व्यवहार किसी भी राष्ट्र और समृद्ध मानवता को कलंकित करने वाला ही कहा जायेगा। बेहतर हो कि मानवता में विश्वास और कोरोना जैसी महामारी से जूझते राष्ट्रों को चीनी हरकत पर अपना पक्ष मानवता के हित में अवश्य स्पष्ट करना चाहिए।

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