चुनाव चन्दा पार्टी..........तीरंदाज ?
व्ही.एस.भुल्ले
भैया- चुनावों की आहट में मने भी क्यों न एक चुनाव चन्दा पार्टी बना लूं और हाथों-हाथ टिकट बांट टैक्नोलाॅजी की मदद से थोकबंद रैलियां कर डालू। बैसे भी कहते है कि विपक्ष विहीन लोकतंत्र अपंग-सा लगता है। अगर लोकतंत्र मजबूत होने के साथ म्हारी पार्टी भी मजबूत हो, तो सत्ता सिंहासन तक पहुंच मने भी एक मदमुग्ध अंतरमुखी परमानन्दियों की टोली बना डालू और मौजूद पीढी ही नहीं आने वाली अपनी पीढी को समृद्ध खुशहाल बना डालू।
भैये- पहले अपना काला-पीला चिन्दी पन्ना तो चला लें, कोई समझे न समझे थारे स्वराज को कम से कम अपना परलोक न सही इस लोक में तो अपना जीवन समृद्ध खुशहाल बना लें। रही पार्टी-वार्टी की बात, कै थारे को मालूम कोणी म्हारे आयोग में थोकबंद पार्टियों की अस्थियां भरी पडी है। जो कुछ दिये की तरह टिमटिममारही है वो सिम जा रही है उनकी भी फिलहाल घिग्गी बंधी पडी है। कई महानुभावों की तो सुबह से शाम तक हवा फूंकने के बाद भी जनमानस के बीच घुग्गी तक नहीं बज रही है।
भैया- घुग्गा-घुग्गी छोड मने तो तने साफ-साफ बता कि म्हारी पार्टी भी म्हारे लोकतांत्रिक अधिकारों के तहत कै गठित हो जायेगी और जनसेवा कल्याण के नाम गैंगबंद हो, सत्ता के परमानन्द का लाभ उठा पायेगी।
भैये- सच सुनना चाहे तो सुन इस कोरोनाकाल में जहां संक्रमितों की संख्या समूचे विश्व ही नहीं म्हारे देश में भी नित नये ढंग से अलग-अलग रिकार्ड बना रही है, तो वहीं म्हारे जनता जनार्दन की जान हलक में अटकी पडी है। तो वहीं दूसरी ओर जान से लेकर जहान तक का वहीखाता लिखा भरा पडा है और कोरोनाकाल में जान और जहान को लेकर नया इतिहास लिखना पड रहा है। जहां सील सोशल डिस्टेंस के साथ अनलाॅकडाउन शुरू हो चुका है, तो वहीं निर्वाचन लिस्टों के दुरूस्तीकरण का भी अभियान भी शुरू पडा है जिससे शान्तिपूर्ण निष्पक्ष चुनाव हो सके और सेवाकाल में सेवक विहीन क्षेत्रों से सेवकों की चुनी हुई टोली सेवा कल्याण में जुट सके। भैये- जब ऐसे में चवन्नी थारी जेब में नहीं और बावले तने पार्टी गठन की सोच रहा है और नाम भी थारी पार्टी का ऐसा चुनाव चन्दा पार्टी मने तो कुछ शुभ नहीं लग रहा है। मने तो बोल्यू कि तने भी काडू की तरह चुप हो जा, अगर घर में सोशल डिस्टेंस के साथ नहीं रह सकता है तो मास्क लगा और लोगों से दूर निकल जा, इतने पर तो थारी चल जायेगी बरना कोरोनाकाल में न तो भाया कोरोना की कोई पहचान है और न थारी मने तो डर लागे कि कहीं थारी पहचान भी कै पार्टी गठन के चक्कर में इस कोरोनाकाल में बच पायेगी।
भैया- मने समझ लिया थारा इसारा गर पार्टी बनाना होगी तो सबसे पहले मने भी एक गैंग बनाऊंगा और चर्चा-पर्चा के साथ गांव, गली में हार्ट-बाजार लगाऊंगा, चल गया तो जादू, चूक गया तो मौत पार्टी का प्रचार है। इस नारे को ऐडी-चोटी का जोर लगा जन-जन तक पहुंचा अपना कत्र्तव्य अवश्य निभाऊंगा।
जय स्वराज
भैया- चुनावों की आहट में मने भी क्यों न एक चुनाव चन्दा पार्टी बना लूं और हाथों-हाथ टिकट बांट टैक्नोलाॅजी की मदद से थोकबंद रैलियां कर डालू। बैसे भी कहते है कि विपक्ष विहीन लोकतंत्र अपंग-सा लगता है। अगर लोकतंत्र मजबूत होने के साथ म्हारी पार्टी भी मजबूत हो, तो सत्ता सिंहासन तक पहुंच मने भी एक मदमुग्ध अंतरमुखी परमानन्दियों की टोली बना डालू और मौजूद पीढी ही नहीं आने वाली अपनी पीढी को समृद्ध खुशहाल बना डालू। भैये- पहले अपना काला-पीला चिन्दी पन्ना तो चला लें, कोई समझे न समझे थारे स्वराज को कम से कम अपना परलोक न सही इस लोक में तो अपना जीवन समृद्ध खुशहाल बना लें। रही पार्टी-वार्टी की बात, कै थारे को मालूम कोणी म्हारे आयोग में थोकबंद पार्टियों की अस्थियां भरी पडी है। जो कुछ दिये की तरह टिमटिममारही है वो सिम जा रही है उनकी भी फिलहाल घिग्गी बंधी पडी है। कई महानुभावों की तो सुबह से शाम तक हवा फूंकने के बाद भी जनमानस के बीच घुग्गी तक नहीं बज रही है।
भैया- घुग्गा-घुग्गी छोड मने तो तने साफ-साफ बता कि म्हारी पार्टी भी म्हारे लोकतांत्रिक अधिकारों के तहत कै गठित हो जायेगी और जनसेवा कल्याण के नाम गैंगबंद हो, सत्ता के परमानन्द का लाभ उठा पायेगी।
भैये- सच सुनना चाहे तो सुन इस कोरोनाकाल में जहां संक्रमितों की संख्या समूचे विश्व ही नहीं म्हारे देश में भी नित नये ढंग से अलग-अलग रिकार्ड बना रही है, तो वहीं म्हारे जनता जनार्दन की जान हलक में अटकी पडी है। तो वहीं दूसरी ओर जान से लेकर जहान तक का वहीखाता लिखा भरा पडा है और कोरोनाकाल में जान और जहान को लेकर नया इतिहास लिखना पड रहा है। जहां सील सोशल डिस्टेंस के साथ अनलाॅकडाउन शुरू हो चुका है, तो वहीं निर्वाचन लिस्टों के दुरूस्तीकरण का भी अभियान भी शुरू पडा है जिससे शान्तिपूर्ण निष्पक्ष चुनाव हो सके और सेवाकाल में सेवक विहीन क्षेत्रों से सेवकों की चुनी हुई टोली सेवा कल्याण में जुट सके। भैये- जब ऐसे में चवन्नी थारी जेब में नहीं और बावले तने पार्टी गठन की सोच रहा है और नाम भी थारी पार्टी का ऐसा चुनाव चन्दा पार्टी मने तो कुछ शुभ नहीं लग रहा है। मने तो बोल्यू कि तने भी काडू की तरह चुप हो जा, अगर घर में सोशल डिस्टेंस के साथ नहीं रह सकता है तो मास्क लगा और लोगों से दूर निकल जा, इतने पर तो थारी चल जायेगी बरना कोरोनाकाल में न तो भाया कोरोना की कोई पहचान है और न थारी मने तो डर लागे कि कहीं थारी पहचान भी कै पार्टी गठन के चक्कर में इस कोरोनाकाल में बच पायेगी।
भैया- मने समझ लिया थारा इसारा गर पार्टी बनाना होगी तो सबसे पहले मने भी एक गैंग बनाऊंगा और चर्चा-पर्चा के साथ गांव, गली में हार्ट-बाजार लगाऊंगा, चल गया तो जादू, चूक गया तो मौत पार्टी का प्रचार है। इस नारे को ऐडी-चोटी का जोर लगा जन-जन तक पहुंचा अपना कत्र्तव्य अवश्य निभाऊंगा।
जय स्वराज
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