जिस सत्ता संस्थाओं में बौद्धिक तथा शासन में संपदा चोर हो ऐसे स्थान पर समृद्धि खुशहाली असंभव सृजन में समृद्धि और खुशहाली तभी संभव है जब स्वच्छंद वातावरण में प्रतिभा प्रदर्शन और पुरूषार्थ सिद्धि के मार्ग सहज और सरल हो
व्ही.एस.भुल्ले
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
आज जब समृद्ध खुशहाल विरासत के उत्तराधिकारियों के बीच समृद्धि खुशहाली को लेकर आत्मनिर्भरता की बात चर्चाओं में प्रबल है और जिसके लिए लोग संकल्पित और प्रतिबद्ध है उसकी सिद्धता तभी संभव है जब हर नागरिक सत्ता संस्थायें और समाज यह सुनिश्चित करने में सफल हो कि सत्ता संस्था में बौद्धिक और शासन में संपदा चोरी असंभव हो तथा प्रतिभाओं को प्रदर्शन के अवसर सहज सुलभ हो तभी खुशहाल समृद्ध मानव समाज और राष्ट्र की कल्पना की जा सकती है।
ये अलग बात है कि हालिया संघीय सत्ता द्वारा मौजूदा सिस्टम के बीच बडे पैमाने पर अवसर उपलब्ध कराने की घोषणा की है और उस दिशा में वह ऐडी-चोटी का जोर लगा पूरी निष्ठा ईमानदारी के साथ प्रयासरत भी है। मगर सबसे बडी बाधा मौजूदा सिस्टम और उस पीढी की है जो नैसर्गिक स्वभाव अनुसार प्रतिभा प्रदर्शन में बाधक की भूमिका में है। मगर गर्व और गौरव करने वाली बात यह है कि मौजूदा सत्ता समूचे राष्ट्र में एक ऐसा वातारण निर्माण करने में अवश्य कामयाब रही है जहां से प्रतिभायें पंख फहला आसमान छूने का मन बना रही है। मगर जिस शिक्षा, सिस्टम और प्रशिक्षण की सरंचना वर्तमान में मौजूद है उसमें बगैर बडे पैमाने पर सुधार किये प्रतिभाओं की उडान असंभव है। कहते है कि इतिहास बदलने अनादिकाल से युवा पीढी का पुरूषार्थ हमेशा सिद्ध रहा है। ये अलग बात है कि भले ही हमारा वातावरण पर्यावरण और प्रतिभा प्रदर्शन प्रमाणिक परिणामों की संस्कृति में दोष हो। लेकिन पुरूषार्थ की प्रमाणिकता सिद्ध है तो निश्चित ही मौजूदा सरकार के प्रयास अवश्य सफल होंगे। जरूरत आज सर्वकल्याण के भाव के साथ उन कोशिशों की है जो आज कामयाबी की बांट ज्यो रहे है। कहते है कि दुनिया में असंभव कुछ भी नहीं, जरूरत सार्थक प्रयासों की है। अगर साधन उत्तम रहे तो साध्य प्राप्ति असंभव नहीं। यही बात आज समझने वाली होनी चाहिए। क्योंकि सत्ताओं का काम संरक्षण के साथ सकारात्मक वातावरण निर्माण करना होता है जो सत्तायें इतना करने में सक्षम सफल रहती है उनकी सिद्धता अवश्य सुनिश्चित होती है। देखना होगा कि प्रतिभा प्रदर्शन कौशल पशुधन कृषि आध्यात्म विज्ञान आधारित सबमिश्रण से क्या प्रतिफल इस समृद्ध खुशहाल विरासत को वर्तमान से सिद्ध हो हासिल होगा फिलहाल देखने वाली बात होगी। भले ही सत्ताओं के निशाने पर वोट नीति क्यों न हो मगर कहते है कि जहां का समाज और व्यक्ति सजग, समझदार, पुरूषार्थी होते है वहां सफलता स्वयं सिद्ध होती है।
जय स्वराज
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
आज जब समृद्ध खुशहाल विरासत के उत्तराधिकारियों के बीच समृद्धि खुशहाली को लेकर आत्मनिर्भरता की बात चर्चाओं में प्रबल है और जिसके लिए लोग संकल्पित और प्रतिबद्ध है उसकी सिद्धता तभी संभव है जब हर नागरिक सत्ता संस्थायें और समाज यह सुनिश्चित करने में सफल हो कि सत्ता संस्था में बौद्धिक और शासन में संपदा चोरी असंभव हो तथा प्रतिभाओं को प्रदर्शन के अवसर सहज सुलभ हो तभी खुशहाल समृद्ध मानव समाज और राष्ट्र की कल्पना की जा सकती है। ये अलग बात है कि हालिया संघीय सत्ता द्वारा मौजूदा सिस्टम के बीच बडे पैमाने पर अवसर उपलब्ध कराने की घोषणा की है और उस दिशा में वह ऐडी-चोटी का जोर लगा पूरी निष्ठा ईमानदारी के साथ प्रयासरत भी है। मगर सबसे बडी बाधा मौजूदा सिस्टम और उस पीढी की है जो नैसर्गिक स्वभाव अनुसार प्रतिभा प्रदर्शन में बाधक की भूमिका में है। मगर गर्व और गौरव करने वाली बात यह है कि मौजूदा सत्ता समूचे राष्ट्र में एक ऐसा वातारण निर्माण करने में अवश्य कामयाब रही है जहां से प्रतिभायें पंख फहला आसमान छूने का मन बना रही है। मगर जिस शिक्षा, सिस्टम और प्रशिक्षण की सरंचना वर्तमान में मौजूद है उसमें बगैर बडे पैमाने पर सुधार किये प्रतिभाओं की उडान असंभव है। कहते है कि इतिहास बदलने अनादिकाल से युवा पीढी का पुरूषार्थ हमेशा सिद्ध रहा है। ये अलग बात है कि भले ही हमारा वातावरण पर्यावरण और प्रतिभा प्रदर्शन प्रमाणिक परिणामों की संस्कृति में दोष हो। लेकिन पुरूषार्थ की प्रमाणिकता सिद्ध है तो निश्चित ही मौजूदा सरकार के प्रयास अवश्य सफल होंगे। जरूरत आज सर्वकल्याण के भाव के साथ उन कोशिशों की है जो आज कामयाबी की बांट ज्यो रहे है। कहते है कि दुनिया में असंभव कुछ भी नहीं, जरूरत सार्थक प्रयासों की है। अगर साधन उत्तम रहे तो साध्य प्राप्ति असंभव नहीं। यही बात आज समझने वाली होनी चाहिए। क्योंकि सत्ताओं का काम संरक्षण के साथ सकारात्मक वातावरण निर्माण करना होता है जो सत्तायें इतना करने में सक्षम सफल रहती है उनकी सिद्धता अवश्य सुनिश्चित होती है। देखना होगा कि प्रतिभा प्रदर्शन कौशल पशुधन कृषि आध्यात्म विज्ञान आधारित सबमिश्रण से क्या प्रतिफल इस समृद्ध खुशहाल विरासत को वर्तमान से सिद्ध हो हासिल होगा फिलहाल देखने वाली बात होगी। भले ही सत्ताओं के निशाने पर वोट नीति क्यों न हो मगर कहते है कि जहां का समाज और व्यक्ति सजग, समझदार, पुरूषार्थी होते है वहां सफलता स्वयं सिद्ध होती है।
जय स्वराज
Comments
Post a Comment