बढते संक्रमितों से, बढती चिन्ता आखिर हम स्वयं के जीवन और अपने प्रियजन, सज्जनों के अंजाने में ही सही दुश्मन कैसे हो सकते है संभव हो तो घरों के अंदर ही रहे, बाहर निकलने पर नाक मुंह पर मास्क अवश्य लगायें और हर व्यक्ति से सोशल डिस्टेंस कम से कम 10 फीट या 2 मीटर की दूरी अवश्य रखें तथा शासन और डाॅक्टरों द्वारा सुझाये गये आहार व्यवहार से सभी के जीवन को सुरक्षित करें आज हर व्यक्ति का यहीं सबसे बडा धर्म और कर्म होना चाहिए

व्ही.एस.भुल्ले
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
जिस तरह से समूचे विश्व में ही नहीं, हमारे देश-प्रदेश, जिले तथा कस्बा स्तर पर कोरोना संक्रमित लोग मिल रहे है। निश्चित ही वह कोरोना को परास्त करने में कामयाब होगें। मगर इतने बडे देश और एक अरब से अधिक जनसंख्या वाले देश में अगर हर व्यक्ति नागरिक ने अपनी जबावदेही अभी भी नहीं समझ, स्वयं के साथ अपने प्रियजन, सज्जन और अडोसी-पडोसी, नगर, शहर के लोगों के जीवन को सुरक्षित रखने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका नहीं निभाई, तो यह मानव, जाति ही नहीं, हर उस नागरिक की कृतज्ञता पर कलंक होगा जो स्वयं के जीवन को समृद्ध, खुशहाल और स्वस्थ देखना चाहता है।
बेहतर हो कि हम मुंह पर मास्क लगायें बहुत अधिक जरूरी काम होने पर ही घर से बाहर जाये और ध्यान रखें कि बात करते समय पर्याप्त दूरी तथा किसी भी स्थिति में किसी दूसरे व्यक्ति के संपर्क में न आये। आधा-आधा घंटे या एक-एक घंटे के अंतराल के बाद साबुन या सेनेट्राईजर से हाथ साफ करते रहे और किसी भी प्रकार की दिक्कत होने पर शासन द्वारा नंबर पर संपर्क करें या फिर कोरोना संेटर पर चिकित्सक को अवश्य दिखायें और खान-पान, आचार-व्यवहार से शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढाये रखने के लिए अच्छा आहार लें। क्योंकि अब समय किसी को दोष देने या लापरवाही का नहीं, अब समय है सजगकता और सावधानी का इस कोरोनाकाल में आज यहीं सबसे बडी समझने वाली बात होना चाहिए।
जय स्वराज

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