सियासी इशारे पर लोक निर्माण मंत्री को हराने का षडयंत्र करोडों के खर्च से निर्माणाधीन सडक के सत्यानाश का सूत्रधार बनता वन महकमा शिवपुरी के उजाड का कलंक बना स्वार्थवत काकस
वीरेन्द्र शर्मा
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
आज जब कोरोनाकाल में स्थानीय स्तर पर बेरोजगारों को रोजगार तो देश व प्रदेश की मजबूत अर्थव्यवस्था के लिए आत्मनिर्भर भारत का मंत्र समूचे देश में बुलंद हो रहा है, तो वहीं दूसरी ओर देश के प्रधानमंत्री खजाना खोल आत्मनिर्भर भारत के संकल्प के साथ देश को आगे बढा रहे है ऐसे में मदमस्त नौकरशाही की विधि आड में अनैतिक सियासी हठधर्मता इस बात का जीता-जागता प्रमाण है कि उसे न तो मानवीय जीवन की जरूरतों सहूलितयों उसकी समृद्धि, खुशहाली से कुछ लेना-देना है और न ही आत्मनिर्भर भारत निर्माण में उसकी कोई आस्था है। भले ही सरकार जनहित में बिृक्ष जैसे बैंकों से करोडो का कर्ज ले, विकास सेवा कल्याण को आगे बढाने ऐडी चोटी का जोर लगा रही हो।
मगर विधि की आड में विकास को पलीता लगाना शायद वन विभाग जैसे महकमें की नियति बनती जा रही है। देखा जाए तो किसी भी परियोजना के बनाने से पूर्व सभी तैयारियां विधि अनुरूप शासन द्वारा उनकों स्वीकृति दी जाती है। जिसमें एक समन्वय समति भी होती है। जिसमें परियोजनाओं से संबंधित विभागों की स्वीकृति भी ली जाती है। मगर जब परियोजना निर्माणाधीन हो या पूर्णताः की ओर अग्रसर तब जाकर वन विभाग को विधि की और कानून की याद आती है। मगरौनी से धौलागढ सडक निर्माण लगभग पूर्णताः की ओर है तो वहीं धौलागढ से एमपी टू एबी रोड के बीच सडक निर्माणाधीन है। ऐसे में वन विभाग द्वारा सडक निर्माण को लेकर सवाल खडे करना और निर्माणाधीन कार्य को अवरूद्ध करना उसकी नियत पर सवाल खडे करने काफी है। इतना ही नहीं जिस तरह से वन महकमें ने शिवपुरी जिला मुख्यालय के सिंध जलावर्धन प्रोजेक्ट और सीवर लाईन प्रोजेक्ट निर्माण में शहर को खून के आंसू रूलाऐं है और आज भी यह दोनो प्रोजेक्ट पूर्ण नहीं हो सके इसके पीछे भी वन विभाग की कुदृष्टि उत्तरदायी है। अगर सूत्रों की माने तो मगरौनी धौलागढ और एमपी टू एबी रोड में वन विभाग द्वारा उत्पन्न की जा रही अडचनों के पीछे सियासी इशारों का षडयंत्र दिखाई दे रहा है। जो सियासी लोग चाहते है कि नवनियुक्त पीडब्लूडी मंत्री अपने विधानसभा क्षेत्र से चुनाव हार जाए वह विधि की आड में वन विभाग को आगे कर अपने मंसूबे पूर्ण करना चाहते है। क्योंकि मगरौनी, धौलागढ और एमपी टू जो करोडों के कर्ज से निर्माणाधीन है वह पोहरी विधानसभा क्षेत्र में ही आती है तथा इन सडकों का लाभ औपचारिक-अनौपचारिक रूप से पोहरी विधानसभा क्षेत्र के 75 फीसदी लोगों को मिलने वाला है। जहां तक मगरौनी, धौलागढ रोड का कार्य है तो वह लगभग 80 फीसदी पूर्ण हो चुका है, तो वहीं एबी रोड टू एमपी रोड सडक का निर्माण कार्य दुर्तगति से जारी है। देखना होगा कि नवनियुक्त लोकनिर्माण मंत्री और मुख्यमंत्री इसे किस रूप में लेते है। फिलहाल तो वन क्षेत्र में विधि की आड में अंधाधुंध उत्खनन और हजारों हेक्टेयर वन भूमि पर अतिक्रमण के किस्से आम है जिन्हें रोकना वन विभाग की जबावदेही है और डियूटी भी। मगर सियासी षडयंत्र का शिकार वन, वन महकमा सियासी दौर में कुछ खास कर पायेगा यह फिलहाल भविष्य के गर्भ में है।
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
आज जब कोरोनाकाल में स्थानीय स्तर पर बेरोजगारों को रोजगार तो देश व प्रदेश की मजबूत अर्थव्यवस्था के लिए आत्मनिर्भर भारत का मंत्र समूचे देश में बुलंद हो रहा है, तो वहीं दूसरी ओर देश के प्रधानमंत्री खजाना खोल आत्मनिर्भर भारत के संकल्प के साथ देश को आगे बढा रहे है ऐसे में मदमस्त नौकरशाही की विधि आड में अनैतिक सियासी हठधर्मता इस बात का जीता-जागता प्रमाण है कि उसे न तो मानवीय जीवन की जरूरतों सहूलितयों उसकी समृद्धि, खुशहाली से कुछ लेना-देना है और न ही आत्मनिर्भर भारत निर्माण में उसकी कोई आस्था है। भले ही सरकार जनहित में बिृक्ष जैसे बैंकों से करोडो का कर्ज ले, विकास सेवा कल्याण को आगे बढाने ऐडी चोटी का जोर लगा रही हो। मगर विधि की आड में विकास को पलीता लगाना शायद वन विभाग जैसे महकमें की नियति बनती जा रही है। देखा जाए तो किसी भी परियोजना के बनाने से पूर्व सभी तैयारियां विधि अनुरूप शासन द्वारा उनकों स्वीकृति दी जाती है। जिसमें एक समन्वय समति भी होती है। जिसमें परियोजनाओं से संबंधित विभागों की स्वीकृति भी ली जाती है। मगर जब परियोजना निर्माणाधीन हो या पूर्णताः की ओर अग्रसर तब जाकर वन विभाग को विधि की और कानून की याद आती है। मगरौनी से धौलागढ सडक निर्माण लगभग पूर्णताः की ओर है तो वहीं धौलागढ से एमपी टू एबी रोड के बीच सडक निर्माणाधीन है। ऐसे में वन विभाग द्वारा सडक निर्माण को लेकर सवाल खडे करना और निर्माणाधीन कार्य को अवरूद्ध करना उसकी नियत पर सवाल खडे करने काफी है। इतना ही नहीं जिस तरह से वन महकमें ने शिवपुरी जिला मुख्यालय के सिंध जलावर्धन प्रोजेक्ट और सीवर लाईन प्रोजेक्ट निर्माण में शहर को खून के आंसू रूलाऐं है और आज भी यह दोनो प्रोजेक्ट पूर्ण नहीं हो सके इसके पीछे भी वन विभाग की कुदृष्टि उत्तरदायी है। अगर सूत्रों की माने तो मगरौनी धौलागढ और एमपी टू एबी रोड में वन विभाग द्वारा उत्पन्न की जा रही अडचनों के पीछे सियासी इशारों का षडयंत्र दिखाई दे रहा है। जो सियासी लोग चाहते है कि नवनियुक्त पीडब्लूडी मंत्री अपने विधानसभा क्षेत्र से चुनाव हार जाए वह विधि की आड में वन विभाग को आगे कर अपने मंसूबे पूर्ण करना चाहते है। क्योंकि मगरौनी, धौलागढ और एमपी टू जो करोडों के कर्ज से निर्माणाधीन है वह पोहरी विधानसभा क्षेत्र में ही आती है तथा इन सडकों का लाभ औपचारिक-अनौपचारिक रूप से पोहरी विधानसभा क्षेत्र के 75 फीसदी लोगों को मिलने वाला है। जहां तक मगरौनी, धौलागढ रोड का कार्य है तो वह लगभग 80 फीसदी पूर्ण हो चुका है, तो वहीं एबी रोड टू एमपी रोड सडक का निर्माण कार्य दुर्तगति से जारी है। देखना होगा कि नवनियुक्त लोकनिर्माण मंत्री और मुख्यमंत्री इसे किस रूप में लेते है। फिलहाल तो वन क्षेत्र में विधि की आड में अंधाधुंध उत्खनन और हजारों हेक्टेयर वन भूमि पर अतिक्रमण के किस्से आम है जिन्हें रोकना वन विभाग की जबावदेही है और डियूटी भी। मगर सियासी षडयंत्र का शिकार वन, वन महकमा सियासी दौर में कुछ खास कर पायेगा यह फिलहाल भविष्य के गर्भ में है।
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