अब ठीक है, हमको कुछ नहीं पता कि कोरोना संक्रमित कहां है और कौन नहीं......तीरंदाज ?

व्ही.एस.भुल्ले
भैया- वह कितने कैसे वायरस है उनकी क्या पहचान है और उनका इलाज क्या है तथा कहां और किस रूप में वह पाये जाते जिनकी कदम ताल से म्हारे महान भारत ही नहीं समूचे विश्व में कोहराम मचा है। सुना है पाटली पुत्र में कोरोना का जबरदस्त हमला हुआ है जहां न तो महामहिम का कार्यालय और न ही मंत्री सहित सियासी लोगों का इकबाल संक्रमण से सुरक्षित रहा है। मुंआ टी.व्ही वाला सुबह से ही डकरा रहा है कि बिहार में कोरोना विस्फोट हुआ है, तो वहीं महाराष्ट्र, तमिलनायडू, दिल्ली में कोरोना का आतंक मचा है। बचा तो भाया अब म्हारा मौन प्रदेश भी नहीं है जहां संक्रमितों का आंकडा 19 हजार के पार जा पहुंचा है। विश्व विरादरी बता रही है कि संक्रमितों का मामला समूचे विश्व में सबा करोड के पार, तो म्हारे महान भारत में 9 लाख के पार जा पहुंचा है। अब तू ही बता कैसे बचेगी म्हारी जान और कैसे चलेगी म्हारी चुनाव चंदा पार्टी। क्योंकि अब हमकों कुछ नहीं पता कि किस जगह कोरोना संक्रमण है और किस जगह पर नहीं ?
भैये- शोले को चले आधा सैकडा पूरा होने को है मगर तू है कि अभी भी गब्बर सिंह का वहीं डायलाॅग दोहरा रहा है जो उसने शोले फिल्म में उसने अपने साथियों की नाकामी पर उन्हें मृत्युदण्ड देते वक्त बोला था और हाथ में मौजूद रिवाल्वर से टेªगर का मुंह खोला था जिसमें उसने छः खाने वाली रिवाल्वर में तीन गोली डाल और घिररी को घुमा बोला था कि अब ठीक है हमको कुछ नहीं पता कि किन खानों में जिन्दगी है और किन खानों में मौत ? भाया ये तो फिल्मी डायलाॅग है इसका कोरोना जैसी महामारी से कै लेना-देना। 
भैया- कै थारे को मालूम कोणी कि गब्बर ने जब रिवाल्वर का पहली बार ट्रेगर दबाया तो उसके तीनों निकम्मे साथी बच गए थे और जब गब्बर जोर-जोर से हंसा तो वह तीनों भी जोर-जोर से गब्बर की हंसी में अपनी हंसी मिलाते दिखे। सो भैया जब तक लाॅकडाउन था तब तक कोई बात न थी मगर जब से अनलाॅकडाउन हुआ और लोगों ने हंसना, खेलना शुरू किया, सो भाया जगह-जगह कोरोना विस्फोट होने लगा। अब इसमें सत्य क्या है यह तो स्वयं कोरोना ही जाने जिसकी न तो अभी तक स्थाई कोई प्रमाणिक पहचान है और न ही कोई उसकी प्रमाणिक दव या फिर वो ही सत्य को पहचाने जो सबसे पहले भारत में इसकी खोज को पुरोदा कर लाये, मने न लागे कि मामला इतनी जल्दी सुलटने वाला है, तने कै बोले।
भैये- तने तो बावला शै, कै थारे को मालूम कोणी कि आत्मनिर्भर निर्माण का अभियान शुरू हो चुका है और मुंए कोरोना से लडने मानव पर दवा का ट्रायल शुरू हो चुका है। आज नहीं तो कल दवा तो आ ही जायेगी और अर्थव्यवस्था सुधारने खुले खजाने से म्हारी और थारी अर्थव्यवस्था भी मजबूत हो जायेगी। तो फिर तने क्यूं हाथो-हाथ खुद की छाती कूट रिया शै। कै तनेे काले-पीले चिन्दी पन्ने का मातम मना रिया शै। थारे को मालूम कोणी कि अब जमाना मल्टीकलर चिन्दी पन्नों का नहीं, अब जमाना नेट-इंटरनेट का है बैसे भी भाईयों के भाई हालिया स्वदेशी 5जी की घोषणा कर दी है। तो वहीं अहमदाबाद की कंपनी ने ड्रग ट्रायल शुरू कर दी है। इतने पर तो थारी चोटी और म्हारी लंगोटी दोनो बच जायेंगी और मने माने तो भैया ये सियासी और सल्तनत का दौर है सो तने चुप ही कर, नहीं तो थारी तो थारी म्हारी मिट्टी भी वेभाव कुट जायेगी। 
भैया- कै मडे तू, धमकाना चावे या फिर कोरोना से डराना चावे, अगर थारे मगज में कोई मक्कारी है तो कान खोलकर सुन मने इस कोरोनाकाल में अपना तन और इज्जत ढकने कफन नहीं सिर्फ वस्त्र ढूंढ रहा हूं। गर म्हारे को जरा भी ऐसा लगा कि म्हारे तन ढंकने में वस्त्र ही काफुर है तो भाया इस दुनिया में अपना लोहा मनमाने कफन को भी पहनने से मने नहीं चूकने वाला। इसलिए मै जाडू कि तू कै कहना चावे। मने तो म्हारे पाटली पुत्र ने माननीय-श्रीमान, माई-बापों पर आई मुंए कोरोना की आपदा पर अपना दुखडा थारे को सुना रिया शै। मने न लागे कि म्हारे जैसे नंगे-भूखो का बाबा महाकाल के मास श्रावण में कुछ बिगाड हो पावेगा भैया ये तो महामारी है जो कभी किसी की न हुई तो म्हारी भी कै होगी। सो मने तो लागे कै बाबा भोलेनाथ श्रावण मास में जयकारा ही काम आवेगा और म्हारे जैसे नंगे भूखों की जान अब तो भोलेनाथ का आर्शीवाद बचावेगा।   

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